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December 30, 2022
अरावली पहाड़ियों की गोद और राजस्थान के रेगिस्तान से घिरा पुष्कर कस्बा पुरातन झील पुष्कर सरोवर को अपने दामन मे थामे हुए है। राजस्थान के अजमेर जिले में बसा पुष्कर मानो पूरे प्रदेश के प्राकर्तिक खुबसुरती अपने आप में समेटे हुए हैं। यहां किसी हिल स्टेशन का एहसास कराती ऊंची अरावली की पहाड़ियां है। तो राजस्थान की पहचान कहे जाने वाले रेगिस्तान रेतीले धोरों का अहसास करवाते हैं। वही पुष्कर क्षेत्र में प्राकृतिक के पोषण से बड़ी झील भी है। जिसकी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ साथ धार्मिक महत्व भी कई सदियों से बना हुआ है। बावजूद इसके विकास और चंद पैसों की अंधी दौड़ ने पुष्कर के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है। हालात तो यह है की पुष्कर की प्राकृतिक संपदा के चीरहरण को रोकने के लिए अब कोई कृष्ण नजर नहीं आ रहा ।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सन 2018 में एक मामले के दौरान राजस्थान की सरकार से पूछा कि राजस्थान में अचानक कहां गायब हो गई 31 पहाड़ियां ? जिसके बाद कोर्ट ने अपना तख्त लहजा इस्तेमाल करते हुए सरकार से 48 घंटे में तमाम खदान और खनन रोकने को कहा था। बावजूद इसके आज तक अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है । खनन माफिया अरावली की पहाड़ियों का सीना चीर इस प्राकृतिक संपदा को बदरंग करने में लगे हैं। इसी का एक उदाहरण तीर्थ नगरी पुष्कर की अरावली पर्वतमाला की श्रंखला नाग पहाड़ पर देखने को मिल रहा है। जहां दिन और रात लगातार अवैध खनन का सिलसिला जारी है। पुष्कर के खड़ी-खड़ी रोड स्थित पहाड़ी और पुरोहिता पहाड़ी का हाल तो और भी खराब है। जहां खनन माफिया धड़ल्ले से प्राकृतिक संपदा को अवैध तरीके से नोच रहे हैं। प्रकृति के बनाए जिन पहाडो ने नैसर्गिक रक्षा कवच का काम किया। जिन पहाड़ों ने राजस्थान के रेगिस्तान की धूल या प्रदूषण भरी हवा को दिल्ली से पहले रोकने का काम किया। इतना ही नहीं पुष्कर के पहाड़ हवा के साथ उड़ती रेत को किलो में तब्दील कर रेगिस्तान का स्वरूप दे देते हैं। जिसके कारण पुष्कर का रेगिस्तान बाहरी क्षेत्रों की तरफ नहीं जा पाता था। लगातार पहाड़ियों में चल रहे खनन की बदौलत अब यह रेगिस्तान नागौर,थांवला, बॉडी घाटी, सांभर, कुचामन के साथ-साथ जयपुर तक पहुंच रहा है। उन्ही पहाड़ों को दिन-रात विस्फोट के जरिए तोड़ा जा रहा है। मौजूदा हालात देखकर लगता है कि आने वाले दौर में पुष्कर की पहाड़ियां मात्र इतिहास के पन्नों में ही नजर आएगी।
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