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November 14, 2022
मनीषा मन से✒️
नानक नाम जहाज है जो जपे वो तर जाए.......
कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा के दिन सिख समुदाय के पहले गुरु नानक देव जी का जन्म धूमधाम से मनाया जाता है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के तलवंडी नामक स्थान पर गुरु नानक देव साहिब का जन्म हुआ जिनके नाम से आज भी तलवंडी ननकाना साहिब के नाम से दुनिया भर में जाना जाता है। आज के दिन गुरुद्वारों को विशेष रूप से सजाया जा रहा है। बड़े पैमाने पर जगह-जगह सिख समुदाय द्वारा कार्यक्रम और नगर कीर्तन आयोजित करने के साथ ही प्रभातफेरी भी निकाली जाती है.....
गुरु नानक देव सिर्फ सिख समुदाय के लिए ही नहीं बल्कि संपूर्ण मानव जाति के लिए एक वरदान के रूप में सामने आए। ऐसा इसलिए क्योंकि गुरु नानक देव ने अपने पूरे जीवन में लोगों को सद् मार्ग पर चलने का ना सिर्फ उपदेश दिया बल्कि इसके लिए आदर्श भी स्थापित किए ।
गुरु नानक देव साहेब बचपन से ही आध्यात्मिकता की तरफ अग्रसर हो चुके थे। सत्संग और चिंतन में समय बताने वाले गुरु नानक ईश्वर की तलाश में 8 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़ कर निकल पड़े। इनके समर्पण भाव को देखकर ही लोग इन्हें दिव्य पुरुष मानने लगे। 38 साल की उम्र तक गुरु नानक देव जी का ज्ञान परिपक्व होकर परम ज्ञान में बदल चुका था।
गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन काल में धर्म को सिर्फ दिखावे के तौर पर मानने से इनकार कर दिया। 11 साल की उम्र में विद्रोही होकर उन्होंने हिंदू धर्म में होने के बावजूद जनेऊ पहनने से इंकार कर दिया था। उनका कहना था कि जनेऊ पहनने की जगह लोगों को अपने भीतर गुणों का विकास करना चाहिए। वे अंधविश्वास और आडंबर के सख्त खिलाफ थे। उन्हें बाहरी दिखावे से सख्त नफरत थी। वे हमेशा जीवन में आंतरिक बदलाव पर जोर दिया करते थे।
महान संत होने की बावजूद भी उन्होंने गृहस्थ जीवन से किनारा नहीं किया। उनका विवाह 1496 ईस्वी में हुआ और इसके साथ ही उनका एक परिवार भी बसा। अपनी आध्यात्मिक यात्रा के दौरान वे भारत, तिब्बत और अरब पहुंचे। उनकी यात्रा 30 सालों तक चली, जबकि अपना अंतिम समय उन्होंने पंजाब के करतारपुर में गुजारा।
गुरु नानक देव साहिब ने सिख धर्म की स्थापना करते हुए इक ओंकार मंत्र दिया ...जिसका अर्थ था ईश्वर एक है और सभी जगह मौजूद है। समस्त सृष्टि का मालिक होने की वजह से ईश्वर ही हम सभी का पिता है। इसीलिए सभी को प्रेम पूर्वक रहना चाहिए। उन्होंने धन कमाने को लेकर भी मार्गदर्शन प्रदान किया, जिसमें उनका मानना था कि धन कमाकर कल्याण कार्यों में उपयोग किया जाना चाहिए। धन को हमेशा जेब तक सीमित रखें ,उसे कभी अपने दिल में जगह ना दें। जो इंसान धन को दिल में जगह देता है, वह खुद का ही नुकसान करता है।
आज जब स्त्रियों के मान सम्मान को लेकर आए दिन नई चर्चाएं छिड़ी रहती हैं तब गुरु नानक देव जी का वचन है कि स्त्री जाति का हमेशा आदर करना चाहिए। गुरुदेव स्त्री और पुरुष सभी को समान मानते थे।
लाइफ मैनेजमेंट का पाठ पढ़ाते हुए गुरु नानक देव साहब ने एक महत्वपूर्ण उपदेश दिया था कि मनुष्य को हमेशा तनाव मुक्त रहकर अपना काम निरंतर करते रहना चाहिए और सदैव प्रसन्न रहना चाहिए। संसार को जीतने से पहले अपने भीतर के विकारों पर विजय हासिल करना सबसे ज्यादा आवश्यक है। यदि इंसान अपने भीतर की बुराइयों को खत्म कर दे तो उसे जीतने से कोई नहीं रोक सकता।
गुरु नानक जयंती पर गुरु नानक देव साहिब के उपदेशों को जीवन में स्वीकार कर लाइफ मैनेजमेंट को अपनाना ना सिर्फ वक्त की जरूरत है बल्कि खुद पर जीत हासिल करने का भी एक सीधा सरल रास्ता भी है। आज जब हम दिन भर अपनी उलझनों में उलझ कर जीवन को जटिल बनाए हुए हैं, जब सारे रास्ते बंद नजर आने लगे हैं, ऐसे समय में गुरु नानक देव साहिब का दिया हुआ लाइफ मैनेजमेंट हमारे लिए जीवन को आसान बनाने का सबसे बेहतर तरीका है। इसे अपनाकर ना सिर्फ खुद का बल्कि अपने आसपास रहने वाले सभी जीवो का भला किया जा सकता है।
सभी को गुरु नानक देव जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं
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