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November 3, 2022
धर्म और अध्यात्म की नगरी मैं कल शुक्रवार से धार्मिक मेले का शुभारंभ होने जा रहा है । इस पांच दिवसीय भीष्म पंचक पंचतीर्थ स्नान में आस्था की डुबकी लगाने देश भर से आने वाले श्रद्धालु अब पुष्कर पहुचने लगे है । कार्तिक एकादशी से शुरू होने वाला यह स्नान कार्तिक पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा । पंचतीर्थ महा स्नान 4 नवंबर से 7 नवंबर तक रहेगा । 8 नवंबर को सूर्य ग्रहण के चलते सरोवर में स्नान और ब्रह्मा मंदिर में दर्शन नही हो पाएंगे । ऐसी मान्यता है की कार्तिक पंचतीर्थ स्नान में किए स्नान का फल, एक हजार बार किए गंगा स्नानके समान, सौ बार माघ स्नान के समान और जो फल कुम्भ में प्रयाग में स्नान करने पर मिलता है, वही फल कार्तिक माह में पुष्कर सरोवर के तट पर स्नान करने से मिलता है । जो व्यक्ति कार्तिक के पवित्र माह के नियमों का पालन करते हैं, वह वर्ष भर के सभी पापों से मुक्ति पाते हैं। इन्ही मान्यताओ के चलते कार्तिक माह के एकादशी माह स्नान के दिन धार्मिक नगरी पुष्कर में हजारो श्रदालुओ पवित्र सरोवर में आस्था की डूबकी लगाकर धर्म लाभ प्राप्त करते है । कार्तिक माह स्नान के लिए सरोवर के घाटो पर अलसुबह से ही महिला श्रदालुओ का सैलाब उमड़ना शुरू हो जाता है । इसके साथ ही श्रदालुओ सरोवर के घाटो पर दीपदान कर पूजा -अर्चना और यथा शक्ति दान - पुण्य करते है । अलसुबह से शुरू हुआ स्नान का दौर दिनभर जारी रहाता है। पुराणो में वर्णित पुष्कर के धार्मिक महत्व के अनुसार कार्तिक माह में हर वर्ष कार्तिक एकादशी से पूर्णिमा तक पांच दिनों तक तैतीस करोड़ देवी -देवता पवित्र सरोवर में वास करते है । इन्ही मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए न केवल कार्तिक माह के इन पांच दिनों में बल्कि पुरे कार्तिक माह में देश ओर दुनिया के लाखों श्रदालु पवित्र सरोवर में आस्था की डुबकी लगाते है । पदम् पुराण के अनुसार सृष्टि के रचियता जगत-पिता ब्रह्मा ने इस पवित्र सरोवर के बीच माता गायत्री के साथ कार्तिक एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक यज्ञ किया था। इस यज्ञ के दौरान धरती पर 33 करोड़ देवी-देवता पुष्कर में ही मौजूद रहते है। सतयुग काल से ही इन पांच दिनों का ख़ासा महत्व माना जाता है। इन पांच दिनों में पवित्र सरोवर में स्नान करने से पाँचों तीर्थों का पुण्य प्राप्त होता है। इसलिए इसे पंचतीर्थ स्नान भी कहा जाता है ।
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