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October 23, 2022
रेतीले धोरों की रंग बिरंगी संस्कृति का परिचायक पुष्कर पशु मेला देश ही नहीं विदेश तक आकर्षण का मुख्य केंद्र है। पुष्कर पशु मेला पर्यटन के साथ-साथ पशुपालक और स्थानीय व्यवसायियों के लिए आय का मुख्य साधन सालों से बना हुआ है। गायों में लम्पी और घोड़ों में ग्लैण्डर रोग के चलते इस वर्ष पुष्कर पशु मेले को रद्द कर दिया गया है। जिससे पशु प्रेमियों और पालको में खासा नाराजगी देखी जा रही है । इन सबके बीच पशु मेलो की शान कहे जाने वाले रेगिस्तान के जहाज ऊंट अब मेलों में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने को मजबूर है। एक तरफ जहां सुविधाओं के तमाम सरकारी दावे किए जाते हैं तो वहीं दूसरी ओर मौजूदा हालात और एक दशक के सरकारी आंकड़े तमाम दावों को जमीन दिखा रहे हैं । पशु मेले का आयोजन नहीं होने के चलते एक तरफ जहां पशु प्रेमी निराश हैं। तो वही इसके व्यवसाय से जुड़े समाज में रोष व्याप्त है।
लगातार घट रही है पुष्कर पशु मेले में उठो की संख्या
यह पहला वाक्य नहीं है जब प्रशासन ने पुष्कर मेला रद्द किया है। इससे पूर्व वर्ष 2020 में कोरोना वायरस से बचाव के लिए मेले के आयोजन को रद्द कर दिया गया था । जिसके बाद सन 2021 के आयोजन की अनुमति तत्कालीन शासन सचिव डॉ. आरुषि मलिक ने शर्तों के साथ जिला कलेक्टर को दी थी। पुष्कर मेलों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो सन 2001 में 15 हजार 460 उठो की आवक हुई । तो वही 2019 में मात्र 3 हजार 298 उठो की आवक दर्ज की गई । 2020 में आयोजन रद्द होने के बात शर्तों के साथ आयोजित हुए 2021 में ऊंटों की संख्या मात्र 2 हजार 340 ही रह गई। लगातार घट रहे आंकड़ों से यह साफ हो जाता है कि विकास की दौड़ में रेगिस्तान का जहाज ऊंट समय के साथ अपनी रफ्तार होता नजर आ रहा है। पुष्कर मेले जैसे बड़े आयोजन के रद्द होने से अब राज्य पशु ऊंट पर संकट मंडराने लगा है। अगर यही हाल रहे तो आने वाले कुछ वर्षों में मेले से उठ गायब हो जाएंगे।
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