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August 30, 2022
अजमेर शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर पुष्कर की नाग पहाड़ी की तलहटी में स्थित प्राचीन रामदेव बाबा के मंदिर पर भादवा मास की दूज को दूर दराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार मे हाजिरी देकर दर्शन किये इर मनोकामना मांगी। मान्यता है कि इस मंदिर में अजमेर जिले सहित आसपास के जिलों से ओर साल जो भी श्रद्धालु आते हैं उन सभी क मनोकामना होती हैं। वैसे तो यहां साल भर भक्तों की संख्या हजारों में देखी जाती है लेकिन दूज पर बाबा के अवतरण दिवस पर लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचे और बाबा का आशीर्वाद लिया। इस मंदिर की एक और विशेषता है यहां पुजारी नहीं बल्कि भक्तों द्वारा स्वयं प्रसाद चढ़ाया जाता है। इस मंदिर की यह भी मान्यता है कि यहां पर कोई भी श्रद्धालु विश्वास के साथ मन्नत का धागा बांधता है तो उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इस अवसर पर मंदिर समिति तथा पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। मंदिर के पुजारी सत्यनारायण ने बताया कि आज के दिन बाबा का जन्म हुआ था। इसलिये रात 12 बजे बाबा को स्नान और अभिषेक कर रात को ही महाआरती की जाती है और भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाता है, साथ ही भंडारे का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि मंदिर का निर्माण वर्ष 1984 में हुआ था जब भोज नाथ जी महाराज दंडवत करते हुए बाबा के दरबार में हाजिरी देने पहुंचे थे और बाबा ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए थे। इस मंदिर में भूत प्रेत, बीमार, परेशान जो भी आता है वह इस दरबार से सुखी होकर ही जाता है। भक्तजन सैकड़ों किलोमीटर दूर से पैदल यात्रा करते हुए बाबा के दरबार में पहुंचते हैं और मन्नतें मांगते हैं। खुंडियावास में पहुंचने वाले हजारों भक्तों द्वारा नारियल अर्पण किया जाता है जिससे निकली जटाओं से यहां भारी मात्रा में जटा इकट्ठी हो जाती है और लोग इस दृश्य को रुककर देखते हैं, यंहा आने वाला प्रत्येक जातरू अपने हाथ में फूल माला, नारियल और प्रसाद लेकर पहुंचता है और अपने हाथों से ही अर्पण करता है। भादवा की एकम और दूज को यहां विशाल मेला भरता है। दूर-दूर से झूले,चकरी,खेल खिलौने और सामान बेचने वाले लोग यहां पर दुकानें लगाते हैं, बड़ी संख्या में लोग मेले का आनंद लेते हैं।
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