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अजमेर न्यूज़: पुष्कर के नजदीक कानबाय में भगवान श्री कृष्ण ने 5000 वर्ष पूर्व मनाया था अपना जन्मदिन

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August 20, 2022

मंदिर में आज भी मौजूद है क्षीरसागर में शेषनाग पर विराजमान भगवान विष्णु की प्रथम प्रतिमा

भगवान श्री कृष्ण द्वारका जाते समय क्षीरसागर कानबाय में अपने परिवार के सहित रुके और यहां उन्होंने अपना निवास स्थान बनाया। इसके बाद दुर्वासा ऋषि के संकट निवारण के लिए हंस व डिंबक से श्री कृष्ण ने अपने जीवन का सबसे बड़ा युद्ध लड़ा। डिंबक को मारने के लिए श्री कृष्ण को यहां से मथुरा जाना पड़ा। करीब 5000 वर्ष पूर्व जन्माष्टमी पर दुर्वाषा सप्त ऋषियों के साथ श्री कृष्ण का अभिनंदन करने पहुंचे, उसी दिन से यहां लगातार हर वर्ष जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाने लगा। भगवान श्री कृष्ण जब पुष्कर आए थे उस समय कानबाय को अपना निवास स्थान बनाया था और यही उनके ग्वाल बालों, साथियों व गांव के लोगों ने उनका प्रथम बार जन्मदिन मनाया था। मथुरा से द्वारका जाते समय भगवान श्री कृष्ण यहीं रुके और उनके साथ जो लोग आए हुए थे वह भी इसी गांव में ठहरे, जिससे गांव का नाम गोवलियां गोकुल, बांसेली बरसाना, किशनपुरा कृष्णपुरा, नांद नंद गांव, मोतीसर कमल ताल के नाम से प्रचलित हो गया। यह गांव उस समय के बसे हैं और भगवान श्री कृष्ण की मौजूदगी में यहां उन्हीं का जन्मदिन भी मनाया जाता है। पुजारी  दामोदर दास वैष्णव बताते हैं कि इस मंदिर में भगवान विष्णु के साथ महालक्ष्मी की प्रतिमा पहली प्रतिमा है जो धरती पर क्षीरसागर में शेषनाग पर विराजमान भगवान विष्णु की प्रतिमा है। बाल रूप में हनुमान जी साथ में मौजूद है यंहा मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें विभिन्न प्रतियोगिताएं होती है रात को भजन मंडलियों द्वारा रात्रि जागरण होता है पूरी रात यहां धार्मिक अनुष्ठान पूजा पाठ करते हैं और दिन में प्रसाद लेकर व्रत उपवास खोल कर अपने घरों को प्रस्थान करते हैं।


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