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August 19, 2022
कलयुग में पापियों के तारणहार भगवान श्री कृष्ण का जन्मदिन शुक्रवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में शहर भर में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। अजमेर की नगर निगम रामप्रसाद घाट पर बड़ा आयोजन कर रही है। जहां झांकियों का मंचन होगा। कृष्ण और राधा के रूप धरे जाएंगे, रास रचाया जाएगा लेकिन भगवान कृष्ण को सबसे अधिक प्रिय गाय की हालत आज इतनी दयनीय है कि जगह-जगह गायों के मृत शरीर पड़े हैं, बदबू से लोगों का जीना दुश्वार हो रहा है। बावजूद इसके कोई जनप्रतिनिधि, भामाशाह और सरकार इनकी सुध नहीं ले रही। नगर निगम ने पंचशील भैरूवाड़ा स्थित सब्जी मंडी जोकि शुरू ही नहीं हो पाई वहां पर लंपी वायरस डिजीज से ग्रसित लगभग 100 गायों को एक बाड़ा बना कर रखा है और वहां उन्हें नगर निगम की ओर से चारा पानी व उनके समुचित देखभाल व इलाज की व्यवस्था की जा रही है। इस व्यवस्था को संभालने के लिए वहां मौजूद हैं नगर निगम के कांजी हाउस प्रभारी बृजमोहन सेन जब मीडिया वहां पहुंची तो प्रभारी बृजमोहन सेन भी लाचार दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि पर्याप्त संसाधनों, साधनों और आर्थिक मदद के यहां गायों का संभालना काफी मुश्किल हो रहा है। इन्हीं गायों में कुछ लंपी बीमारी से ग्रसित हैं तो कुछ स्वस्थ भी हैं। वही इन गायों के बीच कुछ मृत गाय भी है ऐसे में बड़ी देखभाल की जरूरत है लेकिन कोई भी जनप्रतिनिधि प्रशासन या भामाशाह इनकी सुध लेने नहीं आ रहा। नगर निगम अपने स्तर पर बेहतर से बेहतर करने का कार्य कर रही है लेकिन वह नाकाफी है। मौके पर मीडिया को वी केयर की अध्यक्ष व एनिमल एक्टिविस्ट डॉ मंजू शर्मा भी मिली जिन से बातचीत के दौरान उनकी आंखों से छलकते आंसू गायों की इस बीमारी के दर्द को बयां कर गए कि आखिर उनके इन हालातों की सुध लेने की फुर्सत किसी को क्यों नहीं है। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े मंचों से गौ माता की सेवा के लिए हजारों लाखों रुपए का डोनेशन देने की घोषणा करने वाले आज कहां है। जिस तरह से मनुष्य पर कोविड का कहर बरपा था ठीक उसी तरह गौ माता पर लंपी डिजीज का कहर आया है। उसी तादात में गौ माताओं की मौत हो रही है। लेकिन केंद्र हो या राज्य सरकार या फिर समाज सेवी संस्थाएं उस पैमाने पर गायों की मदद नहीं कर पा रही जिस पैमाने पर कोविड-में इंसानों की मदद की गई थी। पशुओं को बीमारी और क्रूरता से बचाने वाली कथित संस्थाएं भी विदेशी डोनेशन की आड़ में अपना काम चला रही हैं उन्हें हकीकत में गायों की इस परेशानी से कोई सरोकार नहीं।
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