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August 17, 2022
भादवा मास शुक्ल पक्ष की छठ को उब छट का पर्व महिलाओं और युवतियों द्वारा बहुत ही श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में विभिन्न मंदिरों में भगवान के आकर्षक श्रंगार कर विवाहिताओं व युवतियों द्वारा भगवान की पूजा अर्चना की जा रही है। होली दड़ा लक्ष्मी नरसिंह मंदिर में बड़ी संख्या में क्षेत्र की महिलाओं और युवतियों ने भगवान भोले का आकृषक सिंगार किया और भगवान कृष्ण को सुंदर पालने में झूला झुलाया । उन्होंने बताया कि उब छठ का व्रत कठिन व्रत रहता है। जिसमें निर्जला व्रत रखकर पूरे दिन खड़ा रहना पड़ता है। शाम को भगवान का पूजन कर चंद्र भगवान को अर्घ देने के बाद व्रत उपवास खोला जाता है। इसके बाद सभी व्रत धारी महिलाएं भोजन ग्रहण करती हैं। यह व्रत अपने परिवार की सुख समृद्धि अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए किया जाता है। उन्होंने बताया कि यदि मौसम खराब होने पर चंद्र के दर्शन नहीं होते हैं तो सुबह सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर उपवास खोला जाता है। उनका यह विश्वास था कि मौसम कितना ही खराब क्यों ना हो धरती पर व्रत करने वाली महिलाओं और युवतियों का भगवान भी ध्यान रखते हैं और चंद्र भगवान जरूर दर्शन देंगे। लक्ष्मी नरसिंह मंदिर के पुजारी तीर्थराज ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुरूप ऊब छठ का व्रत पति परिवार की दीर्घायु व खुशहाली के लिए रखा जाता है। वहीं दूसरी ओर भगवान बलराम का जन्म आज ही के दिन हुआ था इस कथा का भी प्रचलन है और मंदिरों में बलराम का जन्म दिवस भी मनाया जाता है।
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