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June 28, 2022
बाल श्रम की रोकथाम और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जन जागरण अभियान के लिए प्रत्येक वर्ष 12 जून को अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सेव द चिल्ड्रन संस्था द्वारा जिले के विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों, समुदाय के सदस्यों जिनमें बच्चे भी शामिल हैं की उपस्थिति में बाल श्रम के कारणों जोखिमों और दुष्प्रभावों पर चर्चा के लिए एक वर्कशॉप का आयोजन दिशा
आरसीडी में किया गया।
सेव द चिल्ड्रन संस्था के एजाज अहमद ने बताया कि वर्कशॉप में की गई चर्चाओं के बाद एक मांग पत्र तैयार किया गया। जिसे सीएसीएल राजस्थान, सेव द चिल्ड्रन संस्थाओं के संयुक्त तत्वाधान में जिला कलेक्टर को बच्चों द्वारा ही सौंपा गया है। जिला कलेक्टर को बच्चों द्वारा सौंपे गए मांग पत्र में बाल श्रम को समाप्त करने की दिशा में शीघ्र कार्रवाई कर बाल श्रम और बाल मजदूरी से मुक्त हुए बच्चों की शिक्षा पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने जैसे मुद्दों पर कार्रवाई की मांग की गई है।ग्रामीण एवं सामाजिक विभाग के प्रोग्राम डायरेक्टर अभय सिंह ने बताया कि सभी उद्योगों से उत्पादित होने वाले उत्पादों पर बाल श्रम मुक्त होने की सूचना प्रदर्शित की जाए,, सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान उद्योग, होटल, रेस्टोरेंट संचालक अपने प्रतिष्ठानों के बाहर बाल श्रम मुक्त होने की स्वघोषणा प्रदर्शित करें, जिन बच्चों के पास पहचान के दस्तावेज नहीं है उनको भी शिक्षा से जोड़ा जाए ताकि वह बाल श्रम में फिर से लिप्त ना हो, जिला टास्क फोर्स माह में 1 दिन बाजारों में व औद्योगिक इकाइयों में बाल श्रम का निरीक्षण करें और इसकी रिपोर्ट साझा करें, बाल श्रम रोकथाम की कार्रवाई को सहज और सरल बनाया जाए ताकि बाल श्रम की रोकथाम की कार्यवाही ज्यादा लंबी ना हो। जिला स्तर पर बाल श्रम पुनर्वास फंड के तहत बच्चों को बालश्रम से मुक्त होने पर मुआवजा राशि मिले, बाल श्रम संरक्षण कमेटी को सक्रिय करना व समय-समय पर प्रशिक्षण करना भी जरूरी है। कार्यस्थल पर बच्चों के लिए क्रेच की व्यवस्था की जाए। बालश्रम में पाए गए बच्चों के अभिभावकों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाए जाएं जैसी मांगें शामिल हैं।
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