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क़लमकार: ये जो गाईड़ लाइन मुख्यमंत्री ने कल जारी की मैंने एक माह पहले जारी कर दी थी

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March 22, 2021

कोरोना की चैन नहीं टूटी तो हमारी कमर का टूटना तय

ये जो गाईड़ लाइन मुख्यमंत्री ने कल जारी की मैंने एक माह पहले जारी कर दी थी



कोरोना की चैन नहीं टूटी तो हमारी कमर का टूटना तय



सिर्फ़ पुलिस कप्तान जगदीश चन्द्र चुस्त ,शेष प्रशासन सुस्त



कोरोना की तेज़ गति से लॉक डाउन जून तक लगभग तय



सुरेन्द्र चतुर्वेदी




वही होता जा रहा है न! जो मैंने एक महीने पहले लिख दिया था।एक एक बात वही हो रही है जो अपने ब्लॉग्स में, मैं लिखता रहा।तब पब्लिक समझ रही थी मुझे पागल कुत्ते ने काट लिया है।कोरोना को लेकर मेरी बनियान कुछ ज़ियादा ही फटती है।फटती सिर्फ़ वही नहीं है जो कपड़े की बनी होती है।सेहत भी फट जाती है जब कोरोना किसी के जिस्म को खोखला करने के लिए न चाहते हुए भी प्रवेश कर लेता है।




मैं पिछले पूरे एक साल से कोरोना को लेकर अपने 200 ब्लॉग्स के ज़रिए लोगोँ की अंतरात्मा को जीवंत करने के लिए आँसू बहाता रहा ।कहता रहा कि मेरे बापों! जाग जाओ।



मैं पिछले एक महीने से पब्लिक से कहता रहा कि या तो जाग जाओ या फिर से लॉक डाउनसहने को तैयार हो जाओ ।पब्लिक नहीं मानी



मैंने जिला प्रशासन से कहा सख्ती बरतो। बस स्टैंड, टैक्सी स्टैंड , रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट के बाहर जांच अनिवार्य कर दो। जिला प्रशासन ने मेरी बात नहीं मानी



चिकित्सा विभाग से मैंने कहा कि सैंपलिंग बढ़ाओ, क्वेरेंनटाईन सेंटर्स बनाओ ।विभाग के अधिकारियों के कान पर जूं नहीं रेंगी और अब जब कोरोना ने अपना भयावह रूप दिखाना शुरू कर दिया है तब मुख्यमंत्री नई गाइडलाइन जारी कर रहे हैं ।



ये गाइडलाइन जो कल जारी हुई 1 महीने पहले मैंने जारी कर दी थी।सरकार की तरफ से भी ये एक महीने पहले ही जारी हो जानी चाहिए थी।




अजमेर ज़िले में सिर्फ़ और सिर्फ़ पुलिस विभाग अपनी नैतिक ड्यूटी पूरी निष्ठा से निभा रहा है। ज़िम्मेदार पुलिस कप्तान जगदीश चंद शर्मा को मैं नमन करता हूँ कि उन्होंने जो आदेश पिछले सप्ताह जारी किए उनका विभाग सख़्ती से पालन कर रहा है और वे बराबर उसपर निगरानी भी रख रहे हैं।




मैंने पुलिस कप्तान से पिछले ब्लॉग में एक आग्रह किया था कि वे बताएं , उनके कोरोना सख़्ती वाले आदेश का स्टेटस क्या है 



हर थानाधिकारी को गाईडलाइन पालन करने के लिए जो ज़ुर्माना लगाने का को पाबंद किया गया था उसका क्या हुआ




जिला कप्तान ने मेरे ब्लॉग के जवाब में मुझे व्हाट्सएप पर आदेश के बाद हर दिन की रिपोर्ट भेज दी। ढाई लाख से ज़ियादा का जुर्माना वसूला गया ।



काश ! पुलिस कप्तान की तर्ज पर ज़िला प्रशासन के तमाम अधिकारी भी मुस्तैद हो जाएँ! काश! चिकित्सा विभाग सेम्पलिंग के काम में तेज़ी ले आए ।



अजमेर राज्य के उन आठ शहरों में शामिल है जहां रात का कर्फ्यू लगाया गया है ।क्या रात का कर्फ्यू ही काफी है



रात के 11 बजे बाद ,जब आदमी अपने घर पर ही होता है तब क्या वह बीवी बच्चों से दूरी बना कर कर्फ़्यू का पालन करे रात के साथ-साथ दिन में भी सख्ती बरती जानी चाहिए।



मेलों ,रैलियों, आंदोलनों , त्योहारों, राजनीतिक सभाओं या अन्य बहानों से एकत्रित होने वाली भीड़ पर भी सख्ती से रोक लगाना बहुत ज़रूरी है।



ख़ास तौर से पुष्कर और अजमेर के दरगाह क्षेत्र में जहां रात दिन सर्वाधिक हलचल रहती है ,वहां पुलिस और स्थानीय प्रशासन को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।



मित्रों ! मैं पिछले 1 माह से आप की चरण वंदना कर रहा था ।काश! आप मेरी बातों का पालन करते रहते! कोरोना की चेन तोड़ने के लिए आत्मानुशासन का इस्तेमाल करते रहते!



आने वाला समय ठीक वैसा ही है जैसा पिछले साल था। पिछले साल अब तक लॉकडाउन लगा दिया गया था ।इस बार जून के बाद लॉकडाउन के हालात आएंगे ।सरकार कितना भी बचना चाहे मगर उसका बचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा।



लॉक डाउन का लगाए जाना लगभग तय लग रहा है।बेहतर है पब्लिक अभी से खुद अपने आप पर लॉक डाउन लागू कर ले। सरकार की हेल्थ गाइड लाइन से ज्यादा ज़रूरी है जनता अपनी खुद की गाइड लाइन तैयार करे और उसे निभाए ।



राजस्थान से बाहर की यात्रा पर ख़ुद रोक लगा दे। निकलना बेहद ज़रूरी हो तब ही घर से बाहर निकला जाए ।बिना मास्क लगाए घर से निकलना एकदम बंद कर दिया जाए। बार-बार हाथों को सेनेटाइज किया जाता रहे ।घर आते ही जूते चप्पल घर के बाहर खोल दिए जाएँ।सीधे बाथरूम में जाकर हाथ पैर साबुन से धोएं जाएँ।पूजा स्थलों में ना जा कर घर पर ही पूजा पाठ हो ! बाज़ारों में खरीदारी सोच समझकर की जाए! दुकानों पर भीड़ लगाने से बेहतर है दूरियों के साथ खड़ा हुआ जाए! मॉल्स में जिस तरह की भीड़ देखी जा रही है उसे देख कर मुझे लग रहा है कि यही हाल रहने पर जिला प्रशासन को बड़े मॉल्स बंद करवाने पड़ेंगे। मॉल संचालकों को इससे बचने के लिए ज़रूरी दूरी के नियमों का पालन निर्धारित करना चाहिए ।



प्राथमिक स्कूल सरकार ने पहले से ही बंद करवा रखे हैं ।अब उच्च प्राथमिक स्कूलों में अपने आने वाले विद्यार्थियों पर भी ध्यान देना बहुत ज़रूरी है ।मैं यह नहीं कहता कि स्कूल बंद करवा दिए जाएं मगर स्कूल में नई गाइडलाइन का पालन बहुत ज़रूरी है ।



अभिभावक यदि बच्चों के स्कूल में गाईड़ लाइन्स की कोई कमी नहीं पाते तब ही स्कूल भेजें ।पब्लिक स्कूल तो हेल्थ गाइड लाइन का बहुत ध्यान दे रहे हैं मगर सरकारी स्कूलों में ऐसा नहीं हो पा रहा ।अभिभावकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कक्षाओं को किसी भी हाल में 50% से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ाई न करें। यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है*।।



जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में अभी 22 मरीज़ भर्ती हैं। इनकी संख्या बढ़ेगी ।यदि आपको किसी रोग के कारण ऑपरेशन के लिए कहा गया है तो उसे नजरअंदाज़ करें ।बेहद ज़रूरी होने पर ही ऑपरेशन करवाएं। यदि शल्यक्रिया टाली जा सकती है तो उसे टालें।



गर्मी आ रही है।काढ़े का प्रयोग बहुत ज्यादा न करें। कूलर और एयर कंडीशन वाले माहौल से बचें ।आंधी आने पर धूल से बचें ।धूल से एलर्जी हो सकती है जिसके परिणाम महंगे पड़ सकते हैं।



मित्रों ! मैं आपका दुश्मन नहीं! आपको जो भी करने को कहता हूं अपना समझ कर कहता हूँ फिर भी आप यदि मुझे अन्यथा लेते हैं तो आप जाने! मेरा आपके जीने मरने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला ! आप जीते रहें, स्वस्थ प्रसन्न रहें!बस, यही मेरी कामना है।


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