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क़लमकार: शादी का घर छोटा था, इसलिए सुहाग रात मनाई रंगमंच पर

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March 17, 2021

27 में से 24 पिताओं ने प्रगति के गर्भवती होने से पल्ला झाड़ा

शादी का घर छोटा था, इसलिए सुहाग रात मनाई रंगमंच पर



27 में से 24 पिताओं ने प्रगति के गर्भवती होने से पल्ला झाड़ा



गैस एजेंसी सड़कें खोदती रहीं ,निगम के नाहर सिंह बिना परमिशन दिए खुदाई देखते रहे



बृजलता भाभी ! सीट पर कुशन लगाने से क़द नहीं बढ़ेगा,कुर्सी ही ऊँची करवानी पड़ेगी



सुरेन्द्र चतुर्वेदी



शादी हुई । घर छोटा था। बेटे की सुहागरात कहां मनाई जाए? इसके लिए जब कहीं जगह नहीं मिली तो एक रंगमंच को ही मुनासिब समझ लिया गया ।अजमेर डेयरी के राम चन्द्र चौधरी की तर्ज़ पर।



रंगमंच से बेहतर कोई और स्थान हो ही नहीं सकता। हां ,यदि सूचना केंद्र का ओपन एयर थियेटर बनकर तैयार हो जाता तो और बात थी।



नगर निगम में साधारण सभा की बैठक को लेकर यही हुआ।शहर के 80 पार्षदों के साथ महिला पार्षदों के पतियों को भी बैठना था। पत्नियों का हौसला बढ़ाने को ।उनकी सुरक्षा बनाए रखने को।... और भी कई कारण हो सकते हैं।



मेयर बृज लता हाडा के पति प्रिय शील हाड़ा साधारण सभा की बैठक में जवाहर रंगमंच पर काफी देर हाज़िर रहे ।निगम का नवनिर्मित भवन सभा के लिए मुनासिब नहीं था, इसलिए जवाहर रंगमंच पर जी सी के नाटक का मंचन किया गया।



सभा में लोगों की संख्या इसी तरह बढ़ती रही तो कभी पटेल मैदान या जे पी दाधीच के टापू पर भी साधारण सभा का आयोजन होने लगेगा।



सभा के मध्य इतिहास की टांग में फ्रैक्चर हो गया। बढ़ती महंगाई और शहर की सीमाओं के विकास के बावजूद बजट पिछले साल से कम का पारित हुआ। ऐसा तो घर का बजट बनाने पर भी नहीं होता। जब घर के सदस्य बढ़ते हैं तो बजट भी बढ़ता है। 60 से 80 वार्ड हो गए लेकिन बजट नहीं बढ़ा। ताज़्ज़ुब की बात यह रही कि निगम के 27 विभागों के मुखियाओं में से 23 ने तो मुँह ही नहीं खोले।प्रस्ताव ही नहीं।....मगर मेयर साहिबा को बजट तो पेश करना ही था! नहीं करती तो शहर के विकास में निगम किस तरह योगदान दे पाता?




शहर की प्रगति गर्भवती थी। बेचारी प्रगति के पेट में बाँयठे आ रहे थे ।उल्टियां शुरू हो गई थें। चक्कर पहले से ही आ रहे थे। इसलिए सिजेरियन के द्वारा प्रगति के बच्चे का इलायची बाई की ज़मीन पर अवतरित होना बहुत ज़रूरी था।




अस्सी डॉक्टर मौजूद थे रंगमंच पर। प्रगति का ऑपरेशन होना था। महापौर लोगों को सीट पर बैठी नज़र नहीं आ रही थी। उनके नीचे कुशन रखे गए, तब जाकर वे प्रगति की शल्य चिकित्सा देख पायीं।




प्रिय शील हाड़ा के साथ कई पार्षद पति भी धूनी जमाए बैठे नज़र आए ।




राजस्थान में सर्वाधिक वोटों से विजयी ज्ञान सारस्वत और सबसे कम 1 वोट से जीते नीरज जैन भी प्रगति के पेट पर नज़र रखे हुए थे।




नगर निगम में 27 विभाग हैं जो विभाग की गर्भवती प्रगति के लिए जिम्मेदार माने जा सकते हैं। इनमें से मात्र चार अपने आप को प्रगति के मौज़ूदा हालातों के लिए ज़िम्मेदार कहलाने को मौज़ूद थे। बाकी 23 विभागों ने तो विभाग की प्रगति रिपोर्ट में हिस्सा ही नहीं लिया। ऐसा भी नहीं कि इन विभागों ने नगर निगम की प्रगति के ऐश में हिस्सा नहीं लिया हो, मगर जिम्मेदारी से बचने की बुरी आदत के कारण ही उन्होंने पूर्व सूचना के बाद भी अपनी ओर से कोई प्रस्ताव नहीं भेजे।




मैं जानता हूँ कि इन विभागों के महान मुखियाओं के विरुद्ध निगम प्रशासन कोई कार्यवाही नहीं कर पाएगा।



भाभी बृजलता अभी इतनी सशक्त नहीं हुई हैं कि अपने अधीन आने वाले इन विभागों की खिंचाई कर सकें। वैसे मेयर के लिए ये चिंता की ही नहीं शर्म की बात भी है।



सत्ताईस विभागों में से यदि 23 विभाग सोए पड़े हैं बल्कि कहिए मुर्दा पड़े हैं, तो फिर बाक़ी निगम प्रशासन क्या सिर्फ़ शहर को लूटने में ही लगा हुआ है



यूडी टैक्स का वसूलना निजी हाथों में दिया जाना प्रस्तावित है।यह भी नगर निगम के लिए डूब मरने की बात है। लेखा विभाग के दायित्व भी यदि निजी कंपनियों को दे दिए गए तो कौन सा विभाग निगम में जिंदा बचेगा



पार्षद रमेश सोनी वे देवेंद्र सिंह शेखावत दोनों बृजलता जी की पार्टी के ही पार्षद हैं ।अपनी ही पार्टी के पार्षदों ने मेयर साहिबा से यह कहकर उनकी फीत उतार दी कि 10 सालों में सबसे कम बजट का प्रस्तुत होना अधिकारियों की लापरवाही जताता है।



पता चला कि शुद्ध के लिए युद्ध करने के लिए नगर निगम तैयार नहीं है। इनके लिए निगम ने जीरो बजट रखा है। मुझे लगता है कि निगम को अब अशुद्ध के लिए युद्ध का बजट बनाना पड़ेगा। शुद्ध के लिए तो शहर में अब कुछ बचा ही नहीं है। जिस शहर में आदमी और औरत क्या हिजड़े भी शुद्ध नहीं रहे हों। नक़ली हिजड़े भी जब असली हिजड़ों के हक़ मार कर , बधाइयां गाने पहुँच रहे हों, वहीं ! शुद्ध के लिए युद्ध करना कहां ज़रूरी है ?



निगम के पूर्व अधिकारी और बेहद सजग पार्षद गजेंद्र सिंह रलावता ने शहर की सड़कों के खुदाई पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शहर में बिना परमिशन और सड़क कटिंग का अग्रिम पैसा जमा करवाए, पूरे शहर की सड़कें खोद दी गई हैं।यह सच मे निगम के लिए डूब मरने की बात है।



निगम के अधिशासी अभियंता नाहर सिंह को मास्क की जगह पूरे चेहरे पर मुखौटा पहन लेना चाहिए। उन्हें यह कहते शर्म नहीं आई कि अभी तक गैस एजेंसियों को सड़कों की खुदाई करने की अनुमति तक नहीं दी गई है ।जब अनुमति नहीं दी गई है तो शहर की सड़कें खोदने की उनकी हिम्मत कैसे हो गई



मुझे लगता है कि निगम बुरे समय से गुज़रने वाला है। बृजलता भाभी और प्रियशील भैया यदि इसी तरह अपने सीधे होने के गीत गाते रहे और ईमानदारी का मुखौटा पहने रहे तो ये महान अधिकारी उन्हें दांव पर लगा देंगे ।



जिस राशि का बजट पारित हुआ है उससे कर्मचारियों का वेतन निकालना भी भारी पड़ जाएगा ।शहर का विकास नगर निगम द्वारा होता लग नहीं रहा।



इससे तो लिफाफा बांटने वाला गुज़रा ज़माना ही अच्छा था। बेईमानों का राज था मगर शहर का विकास तो हो रहा था ।अब ईमानदारों की फौज़ होने का दावा किया जा रहा है और नामाकूल अधिकारी सामने आ रहे हैं।



देख लो बृजलता भाभी ! कुशन लगाने से आपका क़द एक बार तो ऊँचा हो गया मगर बाद में आपको अपनी कुर्सी ही ऊँची करवानी पड़ेगी।


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