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January 5, 2021
कुंवर राष्ट्रदीप सिंह का जाना तो दुखद है मगर सुखद है जगदीश चंद्र शर्मा का आना
दोनों हैं एक दूसरे की फ़ोटो स्टेट
झुंझुनू दुखी है शर्मा जी के तबादले से :और अजमेर है कुँवर साहब के जाने से
ख़ाकी लिफ़ाफ़े में है सरकारी ओहदा: करे तो कोई क्या
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
अजमेर के पुलिस कप्तान कुंवर राष्ट्रदीप सिंह का तबादला होना जिले के लिए एक दुखद समाचार है ।यूं तो ख़ाकी लिफ़ाफ़े में ही रहता है सरकारी कर्मचारियों का ओहदा कोई एक जगह नहीं टिकता ।कोई टिकैत नहीं होता।
कुंवर राष्ट्रदीप का लंबे समय तक अजमेर में रहना अपनी काबिलियत व सदाशयता की वजह से रहा। पब्लिक के दिलों पर राज करना एक ऐसी वजह है कि उनके कार्यकाल को स्वर्णिम माना जाएगा । कुँवर साहब अपने स्वतंत्र सोच, ईमानदार छवि, दूरदर्शिता, जनहित और संवेदनशील प्रशासन की वजह से हमेशा याद आएंगे। कोरोना काल में उन्होंने जान जोखिम में डालकर जिस तरह कोरोना का मुकाबला किया व जनता से करवाया वह हमेशा लोगों को याद रहेगा।
कुंवर साहब का तबादला सीकर पुलिस अधीक्षक पद पर हुआ है ।उनकी जगह झुंझुनू के एस पी जगदीश चंद्र शर्मा अजमेर आ रहे हैं। मुझे खुशी है कि कुंवर राष्ट्रदीप सिंह और जगदीश शर्मा स्वभाव और कार्यशैली से लगभग एक दूसरे की फोटो स्टेट कॉपी हैं।
शर्मा चाहे जैसलमेर रहे रहे या झुंझुनू ! उन्होंने लोकप्रियता की दृष्टि से कुंवर साहब जैसी ही छवि बनाई कुंवर राष्ट्रदीप सिंह के जाने का दुख अजमेर जिले को लंबे समय तक सालता रहेगा। उनकी कमी सिर्फ पुलिस विभाग को ही नहीं उन लोगों को भी अखरती रहेगी जो उनसे किसी न किसी रूप में जुड़े रहे ।फिर भी जगदीश चंद्र शर्मा संवेदनाओं की दृष्टि से कुँवर साहब के ही पूरक हैं। यह मुझे उनकी कार्यशैली से पता चला है।
कोरोना काल में जिस तरह कुंवर साहब अजमेर में लोकप्रिय हुए उसी तरह जगदीश चंद्र शर्मा झुंझुनू वासियों के दिलों में रहे। वे बराबर जनता को सरकार की गाइडलाइन की पालना करवाते रहे। उन्हें जागरूक करते रहे। उन्होंने अपनी तरफ से भी कई मनोवैज्ञानिक गाइडलाइन जारी कीं। वे कहते रहे कि लोग तीन प्रकार की मूल भूल करते हुए कोरोना के शिकार हो जाते हैं। उन्होंने एक पोस्टर भी जारी किया जिसमें लिखा कि तीन प्रकार की सोच से लोग कोरोना की गिरफ़्त में आ जाते हैं ।पहला सोच ये कि वह मेरा सह कर्मचारी है तो मैं उससे बिना मास्क मिल सकता हूं! दूसरा सोच ये कि वह मेरा दोस्त है मैं उससे बिना मास्क मिल सकता हूं! तीसरा सोच ये कि वह मेरा रिश्तेदार है मै उसे बिना मास्क मिल सकता हूं ! यह तीनों भूल आदमी को कोरोना का शिकार बना देती हैं।
यहां आपको जानकारी दे दूं जगदीश शर्मा लंबित मामलों के आंकड़ों को पसंद नहीं करते। जयपुर रेंज में जब जयपुर रेंज के आई जी सेंगाथिर ने लंबित मामलों के निस्तारण का विशेष अभियान चलाया तो झुंझुनू जिला प्रथम रहा। लंबित मामलों पर कड़ी नज़र रखने वाले जगदीश चंद्र शर्मा से अजमेर के लोग उम्मीद कर सकते हैं कि इन मामलों का ग्राफ तेजी से गिरेगा।
कुंवर साहब की तरह ही जगदीश शर्मा भी मुखबिर तंत्र पर यकीन रखते हैं ।वे जहां अपनी अलग से विश्वस्त लोगों की व्यक्तिगत टीम बनाते हैं वहीं जिले के मुखबिर तंत्र को इतना मजबूत बनाते हैं कि कई बार तो वारदातें घटित होने से पहले ही रोक दी जाती हैं।वे कुँवर साहब की तरह मजबूत पुलिस मित्रों की टीम को भी अपने साथ रखते हैं।
अजमेर की पुलिस मित्र टीम को कुँवर साहब ने बहुत मजबूत किया मगर उसमें अपराध प्रवर्ती के लोग भी शामिल रहे।यद्यपि उनमें से कोई भी कुँवर साहब के होते मनमाना नाज़ायज़ लाभ नहीं उठा पाया।
जगदीश चन्द्र शर्मा की ईमानदारी पर फ़िलहाल मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता क्यों कि मुझे अभी इसकी पुख़्ता जानकारी नहीं।ज़िले के लोग बहुत जल्दी समझ जाएंगे कि उनकी कार्यशैली किन रास्तों पर चलती है।
हाँ, एक बात ज़रूर मैं कह सकता हूँ कि वे पारिवारिक रूप से बेहद संस्कारवान व्यक्ति हैं।उनका परिवार समृद्ध परिवार है।ऐसे संस्कारों में रिश्वतखोरी जैसी बुराई पनप नहीं सकती।ईश्वर का दिया जब सब पास होता है तो आदमी पैसे की भूख में ज़ियादा हाय तौबा नहीं करता।
कुँवर राष्ट्रदीप सिंह जी को में बता दूँ कि सीकर मेरी शिक्षा स्थली रही है और वहाँ की जनता आपका बेताबी से इंतज़ार कर रही है।वहाँ का तेज़ तर्रार मीडिया आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। वहाँ की जनता अजमेर से ज़ियादा जागरूक है।लक्ष्मण गढ़ और रींगस में पार्टीबाज़ी चरम पर है।ऐसे में आपको काम करने का बहुत मज़ा आएगा।
जहाँ तक झुंझुनू से आने वाले जगदीश चन्द्र शर्मा जी का सवाल है उनको में बता दूं कि अजमेर में जहाँ सम्राट पृथ्वीराज जी की गद्दी है वहीं इलायची बाई की भी गद्दी है।यहाँ दोनों ही गद्दियों के अनुयायी हैं।आपको देखना ये होगा कि आपका पाला किससे पड़ रहा है।आपके राजपाठ संभालते ही कई लोग पुष्प गुच्छ लेकर फोटो खिंचवाने आ जाएंगे।फिर पब्लिक में आपके ख़ास होने को प्रचारित कर नाम कमाएंगे।पैसा भी।
शर्मा जी ..!! यह अजमेर है।यहाँ जो होता है वो दिखता नहीं हैं।जो दिखता है वो होता नहीं है।जो होता है वो ग़लत होता है। बेहतर होगा यहां की जन्मपत्री कुँवर साहब से पूछ लें।
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