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December 26, 2020
तेरा तन डोले ,मेरा मन डोले, मेरे दिल का गया क़रार रे,अब कौन बजाए बाँसुरिया
शादी जवानी में हो जाए तो अच्छा , बुढापे की शादी किस काम की--गूढा जी के महावाक्य से काँग्रेसयियों की विकलता हुई ज़ाहिर
माकन लिए जा रहे हैं फीड -बैक : कांग्रेसी थक गए देते देते
अजमेर में राजेश टण्डन खुल कर दे रहे हैं फीड बैक
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
कांग्रेसी अति उत्साह में हैं। गहलोत जी की सत्ता दो साल की हो गयी है। वे कह रहे हैं कि उनके 2 साल कामयाब रहे ।भाजपा कह रही है कि उनके जैसे तैसे 2 साल पूरे हुए आगे नहीं होंगे। गहलोत कह रहे हैं कि उनका कार्यकाल पूरा 5 साल चलेगा। भाजपा कह रही है कि गहलोत सरकार के बुरे दिन जल्द ही आने वाले हैं ।
गहलोत के पास कोई ऐसी ख़ास वजह नहीं जिससे वे दावा कर सकें कि उनकी सरकार के रास्ते में आगे कोई रोड़े नहीं आएंगे। भाजपा के पास भी कोई ऐसा तर्क नहीं कि वे जिसके दम पर सिद्ध कर सकें कि गहलोत सरकार गिर ही जाएगी।
फिलहाल अजय माकन राज्य के दौरे पर हैं ।जम कर फीडबैक ले रहे हैं। सचिन और गहलोत की बाड़े बंदी के बाद आई दरार को भरने का काम अजय माकन को सौंपा गया है। दरार कितनी भर सकी है , दुनिया जानती है। माकन जी नहीं जानते।जानने के लिए वे कई महीनों से बराबर फीडबैक लिए जा रहे हैं। शायद ही कोई ऐसा नेता राजस्थान में बचा हो जिसने माकन जी को दिल खोल कर अपनी फीड बैक न दिया हो ।कईयों की तो ज़ुबान ही छिल गयी होगी।
माकन जी छुट भैया नेता से लेकर बड़े से बड़े नेताओं तक की फ़ीड बैक फ्रंट से ले चुके हैं और अभी तक थम नहीं रहे। लिए ही जा रहे हैं। और कितना फीडबैक लेंगे उनकी कैपेसिटी कितनी है मुझे नहीं मालूम! मगर लगातार फीडबैक लेते रहने का रिकॉर्ड वे जरूर तोड़ चुके हैं ।
सचिन पायलट ने तो उन्हें इतना फीडबैक दे दिया है कि वे देते देते थक चुके हैं ।उन्होंने अब फीडबैक की जगह मीट -बैक कार्यक्रम शुरु कर दिया है ।अशोक गहलोत ने जहां अपनी रोग प्रतिरोधक शक्ति की कमजोरी का हवाला देकर लोगों के बीच जाना बंद कर दिया है वहीं सचिन पायलट कोरोना नेगेटिव होने के बाद से, राज्य भर में घूम घूम कर अपना जनाधार टटोल रहे हैं ।कांग्रेसियों में वे अपने समर्थन को बढ़ा रहे हैं ।यह आने वाले समय का संकेत हैं। उसकी तैयारी है। उन्हें पता है कि उनका भविष्य क्या है।मुख्यमंत्री बनना तय मानकर वे अपना जनाधार पुख्ता किए जा रहे हैं।
उधर ललित माकन का फीडबैक अभी भी बैकग्राउंड में ही है ।जो लोग सोच रहे हैं कि माकन की घोषणाओं का पिटारा खुलेगा, वे बेकल उत्साही हो चुके हैं ।लॉटरी की सारी टिकिटें बिक चुकी हैं। लॉटरी के दावेदार तैयार बैठे हैं ।कई बड़े नेता तो अपने आप को सत्ता का आगामी बाहुबलि मानकर तैयार बैठा है।
हाल ही में एक कांग्रेसी नेता और विधायक राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने तो यहां तक कह दिया कि शादी यदि होनी ही है तो जवानी में हो जाए , बुढ़ापे में हुई शादी किस काम की उनका यह कथन बता रहा है कि कांग्रेसी विधायक सत्ता के साथ शादी रचाने और फिर उसका सुख भोगने के लिए कितने उतावले हैं? राजेंद्र सिंह गूढा का कथन मेंरा तन डोले, मेरा मन डोले, मेरे दिल का गया करार रे ,अब कौन बजाए बांसुरिया? वाले गाने जैसा हो गया है ।
गहलोत जी ने 2 साल तक सत्ता से विवाह करके , जिन जिन अतुलित सुखों को भोगा, जिसे गूढा जी शादी जैसा बता रहे हैं, वही सुख राज्य का हर कांग्रेसी नेता अब भोगना चाह रहा है ।
अजय माकन के फीडबैक में उन सब की दमित इच्छाएं शामिल है। माकन जी ने कहा है कि वे जनवरी में अपनी घोषणाओं का पिटारा खोलेंगे। पिटारे में सचिन को क्या मिलेगा? उनके समर्थक क्या प्राप्त करेंगे? फिलहाल फीडबैक कार्यक्रम में ही छुपा हुआ है।
अजमेर के गांधीवादी नेता श्री गोपाल बाहेती, राजा महेंद्र सिंह रलावता , विजय जैन, बीड़ी व्यापारी हेमंत भाटी सहित ऐसी कई महान आत्माएं हैं जो पूरे शहर की ऐतिहासिक भांग बावड़ी में भटक रही हैं।
मसूदा के विधायक राकेश पारीक तो मान कर चल रहे हैं कि उन्हें सचेतक बना ही दिया जाएगा ।सचिन पायलट के किसी भी चिलगोजे को माकन जी ने कुछ बनाया तो उनमें पारीक जी का नाम पहली लिस्ट में होगा ।उनका त्याग वाकई पूजनीय है। जिस समय उनके व्रद्ध और बीमार पिता को उनकी सेवाओं की विशेष ज़रूरत थी ,तब वे सचिन के बाड़े में राजनीति चला रहे थे ।यह कोई मामूली बात नहीं।
अजमेर में शायद ही कोई ऐसा कांग्रेसी नेता हो जो चौड़े दहाडे कांग्रेस की मैली चादर के दाग दिखा रहा हो। इस दृष्टि से बाल ब्रह्म राजेश टण्डन जी का नाम जरूर सम्मान से लिया जा सकता है ।वे वयोवृद्ध मंत्री शांति धारीवाल की क्लास लेने में पीछे रहते हैं न गहलोत जी की।
माकन जी से उनको न कुछ पाने की उम्मीद है न कुछ छीने जाने की।जहाँ तक बात उनके सुनहरे अतीत की है तो उसे माकन जी छीन नहीं सकते।सच को साफ-साफ बोलने का हुनर उन्हें आता है और वह गाहे बगाए अपने दिल की भड़ास निकाल ही देते हैं ।
माकन जी का तीन दिवसीय फीडबैक राजस्थान में शुरू हो गया है। किसान आंदोलन में जान फूंकने के लिए वे तूफानी दौरा कर रहे हैं मगर दौरे के समय वह गहलोत और सचिन की जनाधार की चासनी के तार भी नाप रहे हैं। वैसे तो मुझे अंदाजा है कि अजय माकन जनवरी में भी कांग्रेसियों की ख़ाम ख्याली को विराम नहीं देंगे। कोई महत्वपूर्ण घोषणा नहीं करेंगे ! मगर यदि मेरा अंदाजा गलत हुआ तो भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया जी का अंदाजा सही निकल जाएगा । बाड़े बंदी फिर शुरू हो जाएंगी। कुश्तियां फिर शुरू होंगी और मुझे डर है इस बार सचिन पायलट कहीं अपना जादू , जलवा ना दिखा जाएं
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