For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 121026597
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: अजमेर जिला पुलिस कप्तान हर्षवर्धन अगरवाला ने कार्यभार किया ग्रहण, पदभार ग्रहण करते ही पुलिस अधिकारियों की बैठक लेकर क्राइम कंट्रोल के दिए निर्देश, |  Ajmer Breaking News: जिला पुलिस एवं जिला प्रशासन द्वारा सोमवार सुबह अजमेर सेंट्रल जेल में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। |  Ajmer Breaking News: माहे रमज़ान मुबारक़ की ताक़ रातों में सबसे अफ़ज़ल लैलातुल कद्र की अज़ीम शब है। इस रात सुबह सादिक तक अल्लाह की अपने बन्दों पर सलामती ही सलामती नाज़िल होती है। |  Ajmer Breaking News: गैस संकट से हाल बेहाल, पीएम मोदी देश की जनता से मांगे माफ़ी,हालत नहीं सुधरे तो सरकार का जीना का देंगे हराम,, गैस संकट पर केंद्र सरकार पर जमकर बरसे कांग्रेस नेता और निकाला जमकर गुबार |  Ajmer Breaking News: राजगढ़ स्थित श्री मसाणिया भैरव धाम पर आगामी 19 मार्च से 28 मार्च 2026 तक चैत्र नवरात्रा मेला महोत्सव राजगढ़ धाम पर बड़े ही धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया जायेगा। |  Ajmer Breaking News: अजमेर में बनेगा आयुर्वेद विश्वविद्यालय, सर्किट हाऊस में बनेगा वीआईपी सूट,विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने साझा की विकास योजनाओं की जानकारी ,होली स्नेह मिलन समारोह हुआ आयोजित |  Ajmer Breaking News: पुष्कर में विप्र फाउंडेशन का राष्ट्रीय अधिवेशन, BCIF शोध अभियान शुरू करने की घोषणा |  Ajmer Breaking News: रन फॉर विकसित राजस्थान का हुआ आयोजन युवाओं, विद्यार्थियों और आमजन ने बढ़-चढ़कर लिया भाग, संभागीय आयुक्त एवं जिला कलक्टर ने दिखाई हरी झंडी |  Ajmer Breaking News: केंद्रीय कृषि मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने किया एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) प्रदर्शनी एवं मेले का शुभारम्भ |  Ajmer Breaking News: अजमेर के कृष्णगंज थाना अंतर्गत जी सिने माल के पीछे आनासागर झील में एक युवक की पानी की सतह पर तैरता मिला शव, | 

विशेष: देवी लक्ष्मी जी का महत्व एवं पूजन विधि

Post Views 31

October 30, 2020

धन, संपत्ती, समृद्धि का एक नाम लक्ष्मी भी है। लक्ष्मी जो कि भगवान विष्णु की पत्नी हैं

लक्ष्मी पूजन

धन, संपत्ती, समृद्धि का एक नाम लक्ष्मी भी है। लक्ष्मी जो कि भगवान विष्णु की पत्नी हैं। मान्यता है कि मां लक्ष्मी की कृपा से ही घर में धन, संपत्ती समृद्धि आती है। जिस घर में मां लक्ष्मी का वास नहीं होता वहां दरिद्रता घर कर लेती है। इसलिये मां लक्ष्मी का प्रसन्न होना बहुत जरुरी माना जाता है और उन्हें प्रसन्न करने के लिये की जाती है मां लक्ष्मी की पूजा।  

धन, संपत्ती, समृद्धि का एक नाम लक्ष्मी भी है। लक्ष्मी जो कि भगवान विष्णु की पत्नी हैं। मान्यता है कि मां लक्ष्मी की कृपा से ही घर में धन, संपत्ती समृद्धि आती है। जिस घर में मां लक्ष्मी का वास नहीं होता वहां दरिद्रता घर कर लेती है। इसलिये मां लक्ष्मी का प्रसन्न होना बहुत जरुरी माना जाता है और उन्हें प्रसन्न करने के लिये की जाती है मां लक्ष्मी की पूजा।  

 लक्ष्मी

​​​​​​​
देवी लक्ष्मी को धन और सम्रद्धि की देवी कहा जाता है। सनातन धर्म के विष्णु पुराण में बताया गया है कि लक्ष्मी जी भृगु और ख्वाती की पुत्री हैं और स्वर्ग में यह वास करती थी। समुद्रमंथन के समय लक्ष्मी जी की महिमा का व्याख्यान वेदों में बताया गया है। लक्ष्मी जी ने विष्णु जी को अपने पति के रुप में वरण किया जिससे इनकी शक्तियां और प्रबल हुई मानी जाती हैं।
लक्ष्मी का अभिषेक दो हाथी करते हैं। वह कमल के आसन पर विराजमान है। लक्ष्मी जी के पूजन में कमल का विशेष महत्त्व बताया गया है। क्योकि यह फूल कोमलता का प्रतीक है इसलिए माँ लक्ष्मी जी की पूजा में इसका स्थान आता है। लक्ष्मी जी के चार हाथ बताये गये हैं। वे एक लक्ष्य और चार प्रकृतियों (दूरदर्शिता, दृढ़ संकल्प, श्रमशीलता एवं व्यवस्था शक्ति) के प्रतीक हैं और माँ लक्ष्मी जी सभी हाथों से अपने भक्तों पर आशीर्वाद की वर्षा करती हैं। इनका वाहन उल्लू को बताया गया है जो निर्भीकता का सूचक है।
माँ लक्ष्मी जी की मुख्य पूजा तो वैसे दिवाली पर की जाती है किन्तु लक्ष्मी पूजा निरंतर करना, और भी ज्यादा फलदायक माना जाता है।

लक्ष्मी पूजन के लिये सामग्री


मां लक्ष्मी की पूजा के लिये सामग्री अपने सामर्थ्य के अनुसार जुटा सकते हैं। मां लक्ष्मी को जो वस्तुएं प्रिय हैं उनमें लाल, गुलाबी या फिर पीले रंग का रेशमी वस्त्र लिया जा सकता है। कमल और गुलाब के फूल भी मां को बहुत प्रिय हैं। फल के रुप में श्री फल, सीताफल, बेर, अनार और सिंघाड़े भी मां को पसंद हैं। अनाज में चावल घर में बनी शुद्ध मिठाई, हलवा, शिरा का नैवेद्य उपयुक्त है। दिया जलाने के लिये गाय का घी, मूंगफली या तिल्ली का तेल इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा पूजन में रोली, कुमकुम, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, चौकी, कलश, मां लक्ष्मी व भगवान श्री गणेश जी की प्रतिमा या चित्र, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, दीपक, रुई, मौली, नारियल, शहद, दही गंगाजल, गुड़, धनियां, जौ, गेंहू, दुर्वा, चंदन, सिंदूर, सुगंध के लिये केवड़ा, गुलाब अथवा चंदन के इत्र ले सकते हैं।


पूजा की विधि


सबसे पहले पूजा के जलपात्र से थोड़ा जल लेकर मूर्तियों के ऊपर छिड़कें इससे मूर्तियों का पवित्रकरण हो जायेगा, इसके पश्चात स्वयं को, पूजा सामग्री एवं अपने आसन को भी पवित्र करें। पवित्रीकरण के दौरान इस  मंत्र का जाप करें-

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।

इसके बाद मन को एकाग्र व प्रभु में ध्यान लगाने के लिये प्राणायाम करें या आंखें बंद कर मन को स्थिर कर तीन बार गहरी सांस लें। पूजा के आरंभ में स्वस्तिवाचन किया जाता है इसके लिये हाथ में पुष्प, अक्षत और जल लेकर स्वतिन: इंद्र आदि वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए ईश्वर को प्रणाम किया जाता है। किसी भी पूजा को करने में संकल्प प्रधान होता है इसलिये इसके बाद संकल्प करें।
संकल्प के लिये हाथ में अक्षत, पुष्प और जल लें साथ में कुछ द्रव्य यानि पैसे भी लें अब हाथ में लेकर संकल्प मंत्र का जाप करते हुए संकल्प किजिये कि मैं अमुक व्यक्ति, अमुक स्थान एवं समय एवं अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं, जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हो।
संकल्प लेने के बाद भगवान श्री गणेश व मां गौरी की पूजा करें। इसके बाद कलश पूजें। हाथ में थोड़ा जल लेकर आह्वान व पूजन मंत्रों का उच्चारण करें फिर पूजा सामग्री चढायें। फिर नवग्रहों की पूजा करें, इसके लिये हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर नवग्रह स्तोत्र बोलें। तत्पश्चात भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन करें। माताओं की पूजा के बाद रक्षाबंधन करें। रक्षाबंधन के लिये मौलि लेकर भगवान गणपति पर चढाइये फिर अपने हाथ में बंधवा लीजिये और तिलक लगा लें। इसके बाद महालक्ष्मी की पूजा करें।

 दीपावली के अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा के बाद दीपक पूजन करें इसके लिये तिल के तेल के सात, ग्यारह, इक्कीस अथवा ज्यादा दीपक प्रज्जवलित कर एक थाली में रखकर पूजा करें।
दीपक पूजन के बाद घर की महिलायें अपने हाथ से सोने-चांदी के समस्त आभूषण इत्यादि को मां लक्ष्मी को अर्पित कर दें। अगले दिन स्नान के बाद विधि-विधान से पूजा के बाद आभूषण एवं सुहाग की अन्य सामग्री जो अर्पित की थी उसे मां लक्ष्मी का प्रसाद समझकर स्वयं प्रयोग करें। मान्यता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है।


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved