For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 134087476
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: एसपी कार्यालय में न्याय की फरियाद लेकर पहुंचे युवक ने परिवार के जुल्मों और बांदरसिंदरी थाना पुलिस की कार्यप्रणाली से परेशान होकर क्या कीटनाशक का किया सेवन, |  Ajmer Breaking News: दरगाह बाजार इलाके में युवक पर चाकू से जानलेवा हमला, ₹5000 और आईफोन छीनकर बदमाश हुए फरार |  Ajmer Breaking News: अजमेर में पकड़े गए नेपाली चरस तस्करों से पीसी रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में कई बड़े खुलासे हुए हैं। |  Ajmer Breaking News: खाटू श्याम मंदिर कमेटी के नाम रजिस्टर्ड फॉर्च्यूनर ने मचाया कहर, ओवर स्पीड में पुष्कर घाटी में कार ने तीन बाइक को मारी टक्कर, |  Ajmer Breaking News: होकरा में भड़का जमीन विवाद: एडीए टीम पर पथराव, जेसीबी-वाहन क्षतिग्रस्त, अब गिरफ्तारी की तैयारी |  Ajmer Breaking News: साप्ताहिक समन्वय बैठक आयोजित, जिला कलक्टर ने जन समस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के दिए निर्देश |  Ajmer Breaking News: विधानसभा अध्यक्ष ने प्रतिभावान विद्यार्थियों का बढ़ाया उत्साह, शिक्षा के लिए दिया प्रोत्साहन,300 जरूरतमंद प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मिली प्रोत्साहन राशि |  Ajmer Breaking News: अलवर गेट थाना अंतर्गत सोमवार सुबह 6:30 बजे बिहारीगंज अंबिका नगर में घर के बाहर खड़ी महिला से चेन स्नेचिंग की वारदात, |  Ajmer Breaking News: सिविल लाइन थाना पुलिस ने अवैध मादक पदार्थ चरस के साथ पकड़े गए नेपाल के दो आरोपियों को आज न्यायालय में किया पेश, |  Ajmer Breaking News:  पुष्कर तहसील के होकरा गांव में अब पुश्तैनी मकानों और किसानों की जमीन को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। | 

विशेष: नरक चौदस या नर्क चतुर्दशी की कथा , महत्व एवं पूजन विधि

Post Views 21

October 30, 2020

नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली भी कहते हैं।

 नरक चौदस 


यह त्यौहार नरक चौदस या नर्क चतुर्दशी या नर्का पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल तेल लगाकर अपामार्ग (चिचड़ी) की पत्तियाँ जल में डालकर स्नान करने से नरक से मुक्ति मिलती है। विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो स्वर्ग को प्राप्त करते हैं।

शाम को दीपदान की प्रथा है जिसे यमराज के लिए किया जाता है। दीपावली को एक दिन का पर्व कहना न्योचित नहीं होगा। इस पर्व का जो महत्व और महात्मय है उस दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण पर्व व हिन्दुओं का त्यौहार है। यह पांच पर्वों की श्रृंखला के मध्य में रहने वाला त्यौहार है जैसे मंत्री समुदाय के बीच राजा। दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस फिर नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली फिर दीपावली और गोधन पूजा, भाईदूज।


नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली भी कहते हैं। इसे छोटी दीपावली इसलिए कहा जाता है क्योंकि दीपावली से एक दिन पहले, रात के वक्त उसी प्रकार दीए की रोशनी से रात के तिमिर को प्रकाश पुंज से दूर भगा दिया जाता है जैसे दीपावली की रात को। इस रात दीए जलाने की प्रथा के संदर्भ में कई पौराणिक कथाएं और लोकमान्यताएं हैं।

नरक चतुर्दशी की  कथा

  रन्ति देव नामक एक पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा थे। उन्होंने अनजाने में भी कोई पाप नहीं किया था लेकिन जब मृत्यु का समय आया तो उनके सामने यमदूत आ खड़े हुए। यमदूत को सामने देख राजा अचंभित हुए और बोले मैंने तो कभी कोई पाप कर्म नहीं किया फिर आप लोग मुझे लेने क्यों आए हो क्योंकि आपके यहां आने का मतलब है कि मुझे नर्क जाना होगा। आप मुझ पर कृपा करें और बताएं कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है। पुण्यात्मा राजा की अनुनय भरी वाणी सुनकर यमदूत ने कहा हे राजन् एक बार आपके द्वार से एक भूखा ब्राह्मण लौट गया यह उसी पापकर्म का फल है।

दूतों की इस प्रकार कहने पर राजा ने यमदूतों से कहा कि मैं आपसे विनती करता हूं कि मुझे वर्ष का और समय दे दे। यमदूतों ने राजा को एक वर्ष की मोहलत दे दी। राजा अपनी परेशानी लेकर ऋषियों के पास पहुंचा और उन्हें सब वृतान्त कहकर उनसे पूछा कि कृपया इस पाप से मुक्ति का क्या उपाय है। ऋषि बोले हे राजन् आप कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्रह्मणों को भोजन करवा कर उनसे अनके प्रति हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें।

राजा ने वैसा ही किया जैसा ऋषियों ने उन्हें बताया। इस प्रकार राजा पाप मुक्त हुए और उन्हें विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ। उस दिन से पाप और नर्क से मुक्ति हेतु भूलोक में कार्तिक चतुर्दशी के दिन का व्रत प्रचलित है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल लगाकर और पानी में चिरचिरी के पत्ते डालकर उससे स्नान करने का बड़ा महात्मय है। स्नान के पश्चात विष्णु मंदिर और कृष्ण मंदिर में भगवान का दर्शन करना अत्यंत पुण्यदायक कहा गया है। इससे पाप कटता है और रूप सौन्दर्य की प्राप्ति होती है।

ऐसी मान्यता है कि सभी प्रकार के नरक से मुक्त कराने का कार्य यम करते हैं। इसलिए, नरक चतुर्दशी की रात को यम के नाम का दीया जलाया जाता है। साथ ही घर से निकाल कर एक दीए को कूड़े के ढेर पर भी रखा जाता है। कूड़े के ढेर पर दीया रखने से आशय घर से गंदगी को हटाना है।




© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved