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June 5, 2017
जयपुर- जिले की आमेर तहसील की बीलुपर ग्राम पंचायत पर शनिवार को आयोजित राजस्व लोक अदालतः न्याय आपके द्वार अभियान का शिविर ग्रामीणों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया। शिविर में खाता विभाजन, इन्द्राज दुरूस्ती, पत्थरगढ़ी, तकासमा और सीमाज्ञान जैसे कई राजस्व प्रकरणों का मौके पर समाधान करते हुए लोगों को राहत प्रदान की गई। उपखण्ड अधिकारी बलदेव धोजक, तहसीलदार रतन कौर तथा सरपंच नीता कंवर ने शिविर में लाभांवितों को दस्तावेज सौंपे तो उनके चेहरे पर खुशी झलक रही थीं। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने भी प्रकरणों के निस्तारण के लिए राज्य सरकार के इस महत्वाकांक्षी अभियान की तारीफ की। शिविर में ग्राम पंचायत बीलपुर के सुंदरपुरा और सुंदर का बास सहित आस पास के लोगों के प्रकरणों की सुनवाई हुई। 21 खातेदारों के संयुक्त खाते का विभाजन ग्राम लाम्या मेवाल में 11.55 हैक्टेयर भूमि के 27 खसरो पर काबिज 21 संयुक्त खातेदारों को लम्बे अरसे से यह पता नहीं था कि इस भूमि पर कौनसा हिस्सा उनका है। बीलपुर में आयोजित राजस्व लोक अदालत के दौरान उपखण्ड अधिकारी बलदेव धोजक ने इस प्रकरण में सुनवाई करते हुए रिकार्ड में दर्ज विवरण के अनुसार बंटवारा करते हुए वाद प्रस्तुत करने वाले भाईयो हरिनारायण एवं बोदूराम गुर्जर के प्रकरण का मौक पर निस्तारण कर दिया। करीब पांच वर्षों से लम्बित इस प्रकरण में बंटवारा नहीं होने के कारण हरिनारायण और बोदूराम सहित अन्य 19 खातेदारों को अपनी ही भूमि के बेचान या उस पर पक्के निर्माण का हक हासिल नहीं था, क्योंकि 27 खसरो में से कौनसा रकबा किसके हिस्से में है यह ज्ञात नहीं था। लेकिन बीलपुर में आयोजित राजस्व लोक अदालत शिविर में इस संयुक्त खाते का विभाजन करते हुए वाद प्रस्तुत करने वाले भाईयो सहित सभी खातेदारों का हिस्सा निर्धारित कर दिया गया। लौटा मदनलाल के मन का चैन बीलपुर के मदनलाल पुत्र देवीसहाय का संवत 2008 में प्रथम सेटलमेंट के दौरान रिकार्ड में गलत खसरा दर्ज हो गया था, जिसकाकालांतर में इसका दुरूस्तीकरण करा लिया। लेकिन इस गलत दर्ज रिकार्ड वाले दस्तावेजों के आधार पर प्रहलाद कुमार रघु ने राजस्व अदालत में वाद प्रस्तुत कर दिया। प्रहलाद कुमार ने मदनलाल की भूमि के समीप 3.75 बीघा जमीन ही क्रय की थी, लेकिन वह गलती वाले दस्तावेजों का हवाला देकर करीब एक बीघा भूमि पर का कब्जा लेना चाहता था। इस वाद के कारण मदनलाल को अपने वास्तविक हक को साबित करने के लिए परेशानी हो रही थी। मदनलाल ने उपखण्ड अधिकारी, आमेर के न्यायालय में चार वर्ष पहले प्रतिवाद प्रस्तुत कर न्याय की गुहार लगाई। बीलपुर के शिविर में उपखण्ड अधिकारी ने प्रहलाद कुमार के वाद को खारिज करते हुए मदनलाल को न्याय प्रदान किया। इस निर्णय के खुश मदनलाल ने बताया कि ‘‘आज उसका सिरदर्द खत्म हो गया। इस वाद के कारण उसे काफी समय तक मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा। मगर आज इस न्यायसंगत फैसले से मुझे मन का चैन मिल गया है।‘‘ जमाबंदी में दुरूस्ती से ‘धापादेवी‘ को राहत धापादेवी ने वर्ष 1998 में भगवाना से 1.03 हैक्टेयर जमीन खरीदी थी। यह उसके नाम रिकार्ड में दर्ज हो गई, मगर संवत 2071 से 2074 की चौसाला जमाबंदी में इसका इन्द्राज नहीं हो पाया। इसके कारण उसने धारा 136 के तहत राजस्व अदालत में कानाराम, हनुमान सहाय, बंशीधर और गणेश के खिलाफ वाद प्रस्तुत कर रखा था। इस 1.03 हैक्टेयर भूमि के आधा हिस्सा इन चार लोगों का था तथा आधे भाग का मालिकाना हक भगवाना पुत्र बालिया का था। वर्ष 1997 में इन चार लोगों ने अपना हिस्सा भी भगवाना को रजिस्टर्ड सेल डीड से बेच दिया, जिसने 1998 में यह भूमि धापा देवी को बेच दी। लेकिन चौसाला जमाबंदी में इन्द्राज नहीं होने के कारण धापादेवी ने आमेर के उपखण्ड अधिकारी के न्यायलय में इन्द्राज दुरूस्ती के लिए वाद प्रस्तुत किया। जिस पर सुनवाई करते हुए बीलपुर के शिविर में उपखण्ड अधिकारी ने शुद्धीकरण कर चौसाला जमाबंदी में भी धापादेवी का नाम दर्ज करने के आदेश देकर उसे राहत प्रदान की।रिकार्ड में रामस्वरूप की जाति दुरूस्त बीलपुर के रामस्वरूप स्वामी की राजस्व रिकार्ड में कई वर्षों से जाति अहीर दर्ज थी, जिसके कारण राजस्व सम्बंधी मामलों में लाभ लेने में उसे परेशानी थी। पुलिस में नौकरी कर रहे रामस्वरूप भी बीलपुर के शिविर में पहुंचे और जाति की दुरूस्ती के लिए आवेदन किया, जिसका निस्तारण करते हुए शिविर में राजस्व रिकार्ड को दुरूस्त करते हुए सही जाति दर्ज की गई।
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