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October 2, 2026
आपसी तुलना करना बच्चों के विकास में बाधक – डॉ. चरण सिंह जिलौवा
निःशुल्क विशाल ऑक्यूपेशनल थेरेपी कैंप में 200 से अधिक दिव्यांग बच्चों एवं अभिभावकों ने लिया लाभ
अजमेर, 2 अक्टूबर 2026 राजस्थान महिला कल्याण मण्डल, चाचियावास द्वारा संचालित अद्वैत अर्ली इंटरवेंशन सेंटर, पंचशील नगर, अजमेर में दिव्यांग बच्चों के लिए निःशुल्क विशाल ऑक्यूपेशनल थेरेपी कैंप का आयोजन किया गया। कैंप में अजमेर जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आए 200 से अधिक दिव्यांग बच्चों एवं उनके अभिभावकों ने विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं थेरेपिस्टों से परामर्श एवं आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय, अजमेर के मनोचिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. चरण सिंह जिलौवा रहे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि AVVNL के मुरारी लाल मीणा मुख्य इंजिनियर ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. चरण सिंह जिलौवा, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट डॉ. कुमुद शर्मा (दिल्ली-NCR), संस्था की मुख्य कार्यकारी श्रीमती क्षमा आर. कौशिक, निदेशक श्री राकेश कुमार कौशिक एवं अतिरिक्त निदेशक श्री तरुण शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर किया।
मुख्य अतिथि डॉ. चरण सिंह जिलौवा ने अपने संबोधन में कहा कि दिव्यांग बच्चों के विकास एवं उनकी कार्यात्मक क्षमताओं को बेहतर बनाने में विभिन्न प्रकार की थेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होने कहा कि आपसी तुलना करना बच्चों के विकास में बाधक होता है। अतः अभिभावकों को कभी भी दूसरों बच्चों से अपने बच्चों की तुलना नहीं करनी चाहिए। दिव्यांगता की जितनी जल्दी पहचान हो और उतनी ही जल्दी आवश्यक थेरेपी एवं हस्तक्षेप शुरू किया जाए, बच्चे के विकास एवं कार्यक्षमता पर दिव्यांगता के प्रभाव को कम करने में उतनी ही अधिक सहायता मिल सकती है। उन्होंने राजस्थान महिला कल्याण मण्डल द्वारा दिव्यांग बच्चों एवं उनके परिवारों के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सेवाएं बच्चों एवं अभिभावकों के लिए उपयोगी हैं।
कैंप के दौरान दिल्ली-NCR की प्रसिद्ध ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट डॉ. कुमुद शर्मा ने बच्चों का ऑक्यूपेशनल थेरेपी संबंधी आकलन कर अभिभावकों को दैनिक जीवन की गतिविधियों, हाथों की कार्यक्षमता, लिखने-पकड़ने, बैठने, संतुलन, समन्वय एवं स्वतंत्रता बढ़ाने से संबंधित आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।
कैंप में विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा अपनी सेवाएं प्रदान की गईं। इनमें फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. वंदना सिंह, डॉ. समीक्षा राठौड़, डॉ. कृष्ण कुमार बाकोलिया, डॉ. गुलनाज बानो, डॉ. हर्ष माथुर, साइक्लोजिस्ट युक्ता दवे एवं आरती सिंह तथा स्पीच थेरेपिस्ट शानू कंवरिया एवं मंजु शर्मा शामिल रहे। विशेषज्ञों द्वारा बच्चों की विभिन्न आवश्यकताओं के अनुसार परामर्श, आकलन एवं आगे की थेरेपी के लिए मार्गदर्शन दिया गया।
संस्था की मुख्य कार्यकारी श्रीमती क्षमा आर. कौशिक ने बताया कि दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को अक्सर सही जानकारी एवं विशेषज्ञ मार्गदर्शन के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए राजस्थान महिला कल्याण मण्डल द्वारा एक ही स्थान पर विभिन्न विशेषज्ञों को उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया, ताकि बच्चों एवं उनके अभिभावकों को उनकी आवश्यकता के अनुसार ऑक्यूपेशनल थेरेपी, फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श मिल सके।
संस्था के निदेशक श्री राकेश कुमार कौशिक ने बताया कि कैंप का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों की समय पर पहचान, उचित आकलन, प्रारंभिक हस्तक्षेप, नियमित थेरेपी एवं अभिभावकों को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि बच्चे की क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए समय पर शुरू किया गया हस्तक्षेप उसके दैनिक जीवन में अधिक स्वतंत्रता एवं बेहतर सहभागिता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कैंप में सेरेब्रल पाल्सी, ऑटिज्म, विकासात्मक विलंब, बोलने एवं संवाद से संबंधित कठिनाइयों, चलने-फिरने एवं शारीरिक गतिविधियों में परेशानी, व्यवहार संबंधी समस्याओं तथा दैनिक जीवन की गतिविधियों में कठिनाई वाले बच्चों एवं अन्य दिव्यांग बच्चों को विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान की गईं। अभिभावकों को बच्चों की नियमित थेरेपी एवं घर पर किए जा सकने वाले अभ्यासों के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया गया।
कार्यक्रम में राजस्थान महिला कल्याण मण्डल के खेरुनिशा शेख, विपुल कवरिया, राजकुमार सुनारीवाल ईश्वर शर्मा सहित, संस्था द्वारा संचालित उम्मीद सेंटर पुष्कर, अद्वैत अर्ली इंटेर्वेंशन सेंटर अजमेर, सीबीआर अजमेर और पुष्कर टीम , समावेश रथ और आरोग्य सारथी (थेरपी ऑन व्हील) कार्यक्रम की टीम ने भाग लिया
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