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June 1, 2017
जयपुर- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को सही मायने में साकार कर रहा है राजस्थान का महुवा विधानसभा क्षेत्र। यहां के अस्पताल, विद्यालय और पुलिस थानों सहित अन्य सरकारी कार्यालयों का डिजिटलाइजेशन किया गया है। क्षेत्रीय विधायक ओम प्रकाश हुडला के प्रयासों से किए गए इस कार्य के चौंकाने वाले सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और अन्य जनप्रतिनिधि भी इससे प्रेरणा लेकर अपने क्षेत्र को डिजीटलाइजेशन की ओर तेजी से बढ़ा रहे हैं। डिजिटलाइजेशन की इस महत्वाकांक्षी पहल से महुवा विधानसभा क्षेत्र में न केवल सुशासन स्थापित हुआ है, बल्कि अपराध का ग्राफ भी नीचे आया है। सरकारी कार्यालयों में समय पर कर्मचारियों का पहुंचना, परवादियों के साथ कर्मचारियों का मधुर व्यवहार, कार्य का समयबद्ध निस्तारण, अस्पतालाओं में सुदृढ़ चिकित्सा व्यवस्था, विद्यालयों में बढ़ता नामांकन इसी का परिणाम है। उल्लेखनीय है कि महुवा विधायक ओमप्रकाश हुड़ला द्वारा अपने विधायक कोष से तहसील, पंचायत समिति, अटल सेवा केन्द्र, उच्च माध्यमिक विद्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन सीसीटीवी कैमरों को उपखंड अधिकारी के कार्यालय में लगी बड़ी एलसीडी स्क्रीन से जोड़ गया है, जहां प्रत्येक कार्यालय की लाइव मॉनिटरिंग की जाती है। इतना ही नहीं फुटेज के साथ सम्बंधित कार्यालय अधीक्षक के नंबर भी स्क्रीन पर आते हैं, अगर उपखंड अधिकारी उन्हें कोई निर्देश देना चाहें, तो वहां से दे सकते हैं। खुद विधायक ने भी अपने मोबाइल से इन कैमरों को जोड़ रखा है, जिससे वो इन स्थानों की खुद मॉनिटरिंग करते हैं। हुड़ला का कहना है कि यह सब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के दूरदर्शी विजन का ही परिणाम है। आदर्श चिकित्सा केंद्र बनी महुआ सीएचसी विधायक हुड़ला के इस नवाचार ने महुवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को प्रदेश की आदर्श चिकित्सा संस्था बना दिया है। अब यहां समय पर डॉक्टर मिलते हैं, दवाई के लिए लम्बी लाइन नहीं लगती। मरीज को समय पर सही उपचार मिल जाता है और साफ-सफाई ऎसी कि प्राइवेट हॉस्पिटल भी फीके पड़ जाएं। यहां लम्बे अर्र्से से बंद पड़ा ऑपरेशन थियेटर चालू हो चुका है। प्रत्येक वार्ड को वातानुकूलित किया गया है। तीमारदारों के लिए अच्छी सुविधाओं वाली धर्मशाला बन चुकी है। मरीजों को न केवल समय पर दवाई मिलती है बल्कि वार्ड को संक्रमण रहित रखने के लिए प्रत्येक दिन बेडशीट बदली जाती है। इस स्वास्थ्य केन्द्र में प्रवेश से लेकर वार्ड, डॉक्टर रूम, नर्सिंग रूम और गलियारों तक में कैमरे लगे हुए हैं, जिनके माध्यम से केन्द्र अधीक्षक प्रत्येक गतिविधि पर निगरानी रखते हैं। इस नवाचार से न केवल चिकित्सा सुविधाओं में वृद्धि हुई बल्कि अस्पताल प्रांगण से होने वाली वाहन चोरियों की संख्या भी शून्य हो गई है। केन्द्र प्रभारी डॉ. दिनेश मीणा ने बताया कि वर्ष 2013 में जहां ओपीडी में मरीजों की संख्या 55 हजार थी, वह बढ़कर वर्ष 2014 में 85 हजार, वर्ष 2015 में 1 लाख 85 हजार और वर्ष 2016 में 2 लाख 56 हजार हो गई है। अस्पताल से मरीजों के रैफरल केसज में भारी कमी आई है। वर्ष 2013-14 में यहां से रेफर किए गए मरीजों की संख्या 1600 थी, जो वर्ष 2016 में मात्र 80 रह गई है। वर्ष 2013 में अस्पताल प्रांगण से 385 वाहन चोरियां हुई थी, जो अब शून्य हो गई हैं।
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