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September 20, 2026
हिंदी में बोलता दिखाया मुख्यमंत्री का फर्जी वीडियो, WhatsApp नंबर पर संपर्क करने को कहा, रजिस्ट्रेशन-प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 10 हजार रुपए से रकम मांगने का आरोप, मोबाइल-SIM और CPU जब्त
अलवर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए किसी बड़े राजनीतिक चेहरे की हूबहू शक्ल और आवाज तैयार कर लोगों से साइबर ठगी करने का गंभीर मामला सामने आया है। तमिलनाडु क्राइम ब्रांच-CID की साइबर क्राइम विंग ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का कथित AI डीपफेक वीडियो बनाकर लोगों को आर्थिक सहायता का झांसा देने के मामले में राजस्थान के अलवर जिले से 28 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान शयाबू/सायबू खान के रूप में हुई है, जो अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के बुटोली गांव का रहने वाला बताया गया है। पुलिस ने उसे 12 सितंबर को राजस्थान पुलिस की सहायता से गिरफ्तार किया।पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो प्रसारित किए जा रहे थे जिनमें मुख्यमंत्री विजय की तस्वीर और हाव-भाव का इस्तेमाल किया गया, लेकिन आवाज AI की मदद से बदलकर हिंदी में तैयार की गई थी। वीडियो देखने पर ऐसा प्रतीत होता था जैसे मुख्यमंत्री स्वयं आर्थिक रूप से जरूरतमंद लोगों को शिक्षा, इलाज, व्यवसाय या अन्य आवश्यकताओं के लिए आर्थिक मदद देने की बात कर रहे हों। इसके बाद वीडियो में लोगों को एक WhatsApp नंबर पर संपर्क करने के लिए कहा जाता था।
ऐसे बिछाया जाता था ठगी का जाल
जांच एजेंसियों के अनुसार डीपफेक वीडियो का उद्देश्य लोगों को यह विश्वास दिलाना था कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री या उनके नाम से जुड़ी कोई संस्था आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। सहायता पाने के इच्छुक लोगों को WhatsApp नंबर पर संपर्क करने के लिए कहा जाता था। इसके बाद कथित तौर पर रजिस्ट्रेशन, सत्यापन, प्रोसेसिंग फीस या दूसरी औपचारिकताओं के नाम पर रुपये मांगे जाते थे। इंदौर में सामने आई इसी तरह की शिकायतों में पीड़ितों से 10 हजार से 60 हजार रुपए तक मांगे जाने की जानकारी पुलिस को मिली थी। तमिलनाडु CB-CID का कहना है कि इस तरह के वीडियो के जरिए मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों के लोगों को निशाना बनाया गया। एक पीड़ित तक डिजिटल ट्रेल के जरिए पहुंचकर उसका बयान भी दर्ज किया गया, जिसे पुलिस ने जांच में महत्वपूर्ण माना। हालांकि कितने लोगों से कुल कितनी रकम ठगी गई, इसकी अंतिम आधिकारिक संख्या अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
साइबर पेट्रोलिंग में पकड़ा गया फर्जी वीडियो
यह मामला 1 सितंबर को तमिलनाडु CB-CID की नियमित साइबर पेट्रोलिंग के दौरान सामने आया। सोशल मीडिया, खासतौर पर Facebook पर मुख्यमंत्री विजय के नाम और चेहरे वाले संदिग्ध वीडियो देखे गए। जांच करने पर पुलिस को संदेह हुआ कि ये असली वीडियो नहीं बल्कि AI की मदद से तैयार किए गए डीपफेक हैं। इसके बाद मामला दर्ज कर वीडियो, सोशल मीडिया अकाउंट, WhatsApp नंबर और अन्य डिजिटल फुटप्रिंट की तकनीकी जांच शुरू की गई। जांच के दौरान डिजिटल कड़ियां राजस्थान तक पहुंचीं। तमिलनाडु पुलिस की टीम अलवर आई और स्थानीय पुलिस की मदद से लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र में आरोपी का पता लगाया। 12 सितंबर को कार्रवाई करते हुए शयाबू खान को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से मोबाइल फोन, SIM कार्ड और एक CPU सहित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं। पुलिस का दावा है कि इनमें मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।
अलवर से चेन्नई ले जाया गया आरोपी
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को ट्रांजिट प्रक्रिया के जरिए तमिलनाडु ले जाया गया और अदालत में पेश किया गया। वहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। CB-CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने कथित रूप से पूरा नेटवर्क अकेले संचालित किया या उसके साथ दूसरे लोग भी जुड़े हुए थे। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया है। जांच अभी जारी है, इसलिए आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होगा।
पाकिस्तान से संचालित बताए जा रहे अकाउंट भी जांच में
इस जांच में एक और पहलू सामने आया है। तमिलनाडु CB-CID के अनुसार इसी तरह के मुख्यमंत्री विजय के डीपफेक वीडियो कुछ ऐसे Facebook अकाउंट से भी प्रसारित किए गए जिन्हें पाकिस्तान से संचालित किए जाने का संदेह है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन खातों और राजस्थान से गिरफ्तार आरोपी के बीच कोई संबंध था या ये अलग-अलग गिरोह थे। इस बिंदु पर किसी विदेशी नेटवर्क से आरोपी का सीधा संबंध स्थापित होने की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसी ने केवल संदिग्ध विदेशी अकाउंट और संभावित नेटवर्क की जांच जारी होने की बात कही है।
गरीबों और जरूरतमंदों को बनाया निशाना
कथित ठगी के लिए ऐसे लोगों को लक्षित किया गया जो इलाज, पढ़ाई, रोजगार या व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता चाहते थे। मुख्यमंत्री जैसे सार्वजनिक व्यक्ति का चेहरा सामने होने के कारण वीडियो को असली मानने की संभावना बढ़ जाती थी। इसी भरोसे का फायदा उठाकर लोगों को WhatsApp पर बातचीत के लिए ले जाने और फिर भुगतान मांगने का आरोप है। साइबर अपराध में AI डीपफेक के इस्तेमाल का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें केवल किसी व्यक्ति की तस्वीर का गलत इस्तेमाल नहीं हुआ, बल्कि ऐसा वीडियो बनाया गया जिसमें सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसी बातें कहते हुए दिखाया गया जो उन्होंने वास्तव में नहीं कहीं थीं।
पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वीडियो हटाने को भी कहा
जांच के दौरान तमिलनाडु पुलिस ने Facebook से संबंधित डीपफेक वीडियो हटाने के लिए भी संपर्क किया। साथ ही उन खातों और नंबरों की पहचान की जा रही है जिनके जरिए वीडियो प्रसारित किए गए और लोगों से संपर्क किया गया। पुलिस यह भी जांच रही है कि ठगी से हासिल रकम किन बैंक खातों या डिजिटल माध्यमों में पहुंची।
AI डीपफेक से बढ़ा साइबर फ्रॉड का नया खतरा
यह मामला लोगों के लिए भी चेतावनी है कि किसी मुख्यमंत्री, मंत्री, फिल्म स्टार या दूसरे चर्चित व्यक्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर दिखाई देने मात्र से उसे वास्तविक न मानें। AI तकनीक से अब चेहरे के हाव-भाव, होंठों की गतिविधि और आवाज तक को इस तरह बदला जा सकता है कि सामान्य तौर पर फर्जी और असली वीडियो में अंतर करना कठिन हो जाए। विशेष रूप से ऐसे वीडियो जिनमें सरकारी सहायता, अनुदान, लोन, नौकरी या आर्थिक मदद दिलाने के बदले पहले रजिस्ट्रेशन अथवा प्रोसेसिंग फीस मांगी जाए, उनकी आधिकारिक सरकारी वेबसाइट या सत्यापित हेल्पलाइन से पुष्टि करना जरूरी है। मौजूदा मामले में भी पुलिस का आरोप है कि मुख्यमंत्री के नाम और चेहरे पर भरोसा पैदा कर लोगों को आर्थिक लेन-देन के लिए प्रेरित किया गया।
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