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September 7, 2026
जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के बीच एक नई राजनीतिक तस्वीर उभरकर सामने आई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने रविवार रात जयपुर में एक मंच साझा किया और भाजपा-कांग्रेस के अलावा तीसरे राजनीतिक विकल्प को मजबूत करने का संदेश दिया। संयुक्त सभा जयपुर के भट्टा बस्ती क्षेत्र में वार्ड 146 से AIMIM प्रत्याशी फिरोज बानो के समर्थन में आयोजित हुई। दोनों नेताओं के साथ आने को केवल निकाय चुनाव की रणनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा। उनके बयानों से यह संकेत मिला कि भविष्य में विधानसभा चुनाव तक भी राजनीतिक सहयोग की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं। हालांकि अभी दोनों दलों के बीच किसी विस्तृत औपचारिक गठबंधन की शर्तें सार्वजनिक नहीं हुई हैं।
ओवैसी बोले- राजस्थान को चाहिए तीसरा राजनीतिक विकल्प
असदुद्दीन ओवैसी ने सभा में कहा कि राजस्थान की राजनीति लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस के बीच सिमटी हुई है और अब जनता के सामने तीसरा विकल्प खड़ा करने का समय आ गया है।
उन्होंने जहां RLP के प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, वहां उनके समर्थन की अपील भी की। इस संयुक्त मंच को राजस्थान में AIMIM और RLP के संभावित राजनीतिक तालमेल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ओवैसी ने भाजपा पर धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और शिक्षा, सरकारी स्कूलों, महिला सुरक्षा तथा मूलभूत नागरिक सुविधाओं जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा।
बेनीवाल बोले- जयपुर से नई राजनीति की शुरुआत
हनुमान बेनीवाल ने ओवैसी के साथ मंच साझा करते हुए इसे राजस्थान की राजनीति में नई शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि किसानों, युवाओं, रोजगार, पेपर लीक और अग्निवीर जैसे मुद्दों को लेकर दोनों दल संघर्ष जारी रखेंगे। बेनीवाल ने यह भी संकेत दिया कि यह साथ केवल चुनावी मंच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जनमुद्दों पर भी आगे बढ़ना चाहिए। बेनीवाल ने 6 सितंबर को ओवैसी के साथ जयपुर के भट्टा बस्ती में संयुक्त सभा करने का कार्यक्रम पहले ही सार्वजनिक किया था।
जाट-मुस्लिम समीकरण पर भी नजर
इस संभावित राजनीतिक तालमेल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा जाट और मुस्लिम वोट बैंक के समीकरण की हो रही है। RLP की राजनीतिक ताकत परंपरागत रूप से किसान और जाट बहुल क्षेत्रों में मानी जाती है, जबकि AIMIM मुस्लिम मतदाताओं में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में दोनों दल यदि आगे भी साथ रहते हैं तो यह गठजोड़ कई सीटों पर भाजपा-कांग्रेस के पारंपरिक समीकरणों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है। निकाय चुनाव से पहले AIMIM नेताओं ने भी राजस्थान में भविष्य के तीसरे मोर्चे की संभावना से इनकार नहीं किया था।
वार्ड 146 बना नए सियासी समीकरण का मंच
जयपुर का वार्ड 146 इस नए राजनीतिक समीकरण का केंद्र बन गया है। यहां AIMIM की फिरोज बानो चुनाव मैदान में हैं और उनके समर्थन में आयोजित सभा में ओवैसी और बेनीवाल दोनों की मौजूदगी ने इसे हाई-प्रोफाइल मुकाबले में बदल दिया है। भट्टा बस्ती में हुई संयुक्त सभा को दोनों दलों के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है।
BJP-कांग्रेस की दोध्रुवीय राजनीति को चुनौती देने की कोशिश
राजस्थान की राजनीति लंबे समय से मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच केंद्रित रही है। तीसरे दलों को अलग-अलग चुनावों में सीमित सफलता मिली है। ऐसे में RLP और AIMIM का साथ आना इस दोध्रुवीय राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इसका वास्तविक असर कितना होगा, इसका पहला संकेत निकाय चुनाव के परिणामों से मिलेगा।
विधानसभा चुनाव तक साथ रहने के संकेत
सभा में दोनों नेताओं ने आगे भी राजनीतिक सहयोग की संभावनाएं खुली रखीं। इससे साफ संकेत मिला कि निकाय चुनाव दोनों दलों के लिए एक तरह से प्रयोगशाला साबित हो सकता है। यदि निकाय चुनाव में यह तालमेल प्रभावी साबित होता है तो दोनों दल विधानसभा चुनाव के लिए भी साझा रणनीति पर विचार कर सकते हैं।
पहली परीक्षा निकाय चुनाव
फिलहाल इस नए समीकरण की पहली बड़ी परीक्षा नगरीय निकाय चुनाव ही होंगे। अब नजर इस बात पर रहेगी कि ओवैसी की मुस्लिम मतदाताओं में अपील और बेनीवाल की किसान-जाट राजनीति मिलकर कितनी नई राजनीतिक जमीन तैयार कर पाती है।
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