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September 7, 2026
जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के रोड शो को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। गहलोत ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री को खुद रोड शो करने पड़ रहे हैं, यह सरकार के लिए उपलब्धि नहीं बल्कि उसकी नाकामी का संकेत है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के शहरों में सड़क, सीवरेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर जनता में नाराजगी है।गहलोत रविवार को जयपुर के एक निजी होटल में आयोजित मथुरा दास माथुर क्रिकेट अवार्ड समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने निकाय चुनाव के साथ जातिगत जनगणना, राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA), जयपुर में बन रहे क्रिकेट स्टेडियम और शहरी विकास के मुद्दों पर भी सरकार को घेरा।
‘मुख्यमंत्री को रोड शो करने की नौबत क्यों आई?’
अशोक गहलोत ने सवाल किया कि आखिर स्थानीय निकाय चुनाव के लिए मुख्यमंत्री को इतने बड़े स्तर पर रोड शो करने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने इसे भाजपा सरकार की स्थिति से जोड़ते हुए दावा किया कि जनता पिछले ढाई साल के कामकाज से नाराज है और इसी कारण मुख्यमंत्री को खुद चुनाव प्रचार में उतरना पड़ रहा है। गहलोत ने यह भी दावा किया कि किसी मुख्यमंत्री का इस स्तर पर स्थानीय निकाय चुनाव में रोड शो करना असामान्य है। इस दावे को उन्होंने भाजपा की चिंता से जोड़कर पेश किया।टूटी सड़क और सीवरेज को बनाया मुद्दा
पूर्व मुख्यमंत्री ने शहरी क्षेत्रों की स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई शहरों में टूटी सड़कें, खराब सीवरेज, जलभराव और सफाई जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।
गहलोत का आरोप है कि नगरीय विकास के काम अपेक्षित गति से नहीं हो रहे और अब चुनाव के समय बड़े नेताओं के रोड शो के जरिए जनता का ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और भाजपा सरकार इन्हें चुनावी राजनीति का हिस्सा बताती रही है।
जातिगत जनगणना पर नीयत को लेकर सवाल
गहलोत ने जातिगत जनगणना को लेकर भी सरकार की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर सरकार की नीयत स्पष्ट दिखाई नहीं देती और जिस प्रक्रिया के जरिए इसे आगे बढ़ाने की बात हो रही है, उसमें सुधार की आवश्यकता है। गहलोत ने जातिगत जनगणना को सामाजिक न्याय और सरकारी योजनाओं की बेहतर लक्ष्य-निर्धारण प्रक्रिया से जोड़ते हुए सरकार से स्पष्ट नीति की मांग की।
RCA चुनाव नहीं होने पर सरकार को घेरा
मथुरा दास माथुर क्रिकेट अवार्ड समारोह में गहलोत ने राजस्थान के क्रिकेट प्रशासन पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि करीब पौने तीन साल से राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव नहीं हुए और जयपुर में प्रस्तावित बड़े क्रिकेट स्टेडियम का काम भी रुका हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने राजस्थान के क्रिकेट ढांचे को कमजोर किया है। गहलोत ने कहा कि खेल संस्थाओं में नियमित चुनाव और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास जरूरी है, ताकि राज्य के खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिल सकें।‘हमने प्रशासन शहरों के संग में 12 लाख पट्टे दिए’
अशोक गहलोत ने अपनी सरकार के समय चले ‘प्रशासन शहरों के संग’ अभियान का जिक्र करते हुए दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने करीब 12 लाख पट्टे जारी किए थे। उन्होंने वर्तमान सरकार से सवाल किया कि पिछले ढाई से पौने तीन साल में कितने पट्टे जारी किए गए। गहलोत पहले भी निकाय चुनाव प्रचार के दौरान पट्टों, सड़क, ट्रैफिक, जलभराव और सफाईकर्मी भर्ती को लेकर भजनलाल सरकार से सवाल पूछ चुके हैं।‘दूसरे राज्यों से नेताओं को क्यों बुलाना पड़ रहा?’
गहलोत ने भाजपा के चुनाव प्रचार में राष्ट्रीय नेताओं और दूसरे राज्यों के मंत्रियों की सक्रियता पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि दिल्ली, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से नेताओं को राजस्थान के
स्थानीय निकाय चुनाव में प्रचार के लिए बुलाया जा रहा है। गहलोत ने इसे भाजपा की चुनावी चिंता से जोड़ते हुए कहा कि यदि सरकार अपने कामकाज को लेकर आश्वस्त है तो स्थानीय चुनाव को इतना बड़ा राजनीतिक अभियान बनाने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
भाजपा ने दूसरी ओर इन चुनावों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री सहित राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं को प्रचार अभियान में उतारा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी अलग-अलग नगर निगम क्षेत्रों में रोड शो कर रहे हैं।BJP-कांग्रेस के बीच तेज हुई जुबानी जंग
निकाय चुनाव के अंतिम चरण में अब भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं। कांग्रेस जहां सड़क, सीवर, पट्टे, रोजगार, सफाई व्यवस्था और स्थानीय विकास को आधार बनाकर सरकार को घेर रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस के पिछले कार्यकाल का हिसाब मांगते हुए ‘डबल इंजन’ और ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार के नाम पर वोट मांग रही है।
गहलोत के इन आरोपों के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने भी पलटवार करते हुए कांग्रेस शासनकाल, चुनावी आचार संहिता और सफाईकर्मी भर्ती जैसे मुद्दों पर पूर्व मुख्यमंत्री को घेरा है। अब निकाय चुनाव में मुकाबला केवल स्थानीय प्रत्याशियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों दल इसे राज्य सरकार और पूर्व कांग्रेस सरकार के कामकाज की तुलना में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
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