Post Views 921
May 31, 2017
नई दिल्ली - भारत मेक इन इंडिया पॉलिसी के तहत सिर्फ औद्योगिक विकास को ध्यान में रखकर ही आगे नहीं बढ़ रहा है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में भी अपनी ताकत में इजाफा कर रहा है। हालांकि अभी तक हमारे 70 फीसद सैन्य उपकरण रूसी मूल के हैं और अब हम अधिक सह-उत्पादन और संयुक्त उपक्रमों और भारत में रक्षा वस्तुओं के अधिक उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सैन्य तैयारियों को लेकर रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कोई भी देश केवल अन्य देशों से हथियार खरीद कर या आयात करके हर बार युद्ध नहीं जीत सकता। किसी देश की सुरक्षा तैयारियां तब तक पूरी नहीं होंगी, जब तक वह सिर्फ आयात पर ही निर्भर रहेगा।टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, रक्षा क्षेत्र की सरकारी कंपनियों के एक अवॉर्ड कार्यक्रम में जेटली ने भारत को हथियार निर्माण का गढ़ बनने की अपनी क्षमता प्रदर्शित करने की जरूरत पर जोर दिया। सरकार ने रक्षा उत्पादन में देश के निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाने के लिए स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप पॉलिसी को हाल ही में हरी झंडी दी है। इस पॉलिसी के तहत प्राइवेट सेक्टर की चुनिंदा कंपनियां मेक इन इंडिया के दायरे में लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर, सबमरीन और टैंक जैसे बख्तरबंद वाहनों की मैन्युफैक्चिरंग के लिए वैश्विक हथियार कंपनियों के साथ भागीदारी कर पाएंगी।रक्षा मंत्री ने कहा, सुरक्षा जरूरतें इस बात से तय होती हैं कि आपके पड़ोसी कैसे हैं और स्वाभाविक तौर पर भूराजनैतिक दृष्टि से इलाके में अजीब परिस्थितियों के मद्देनजर हमारी तैयारी ही सर्वोत्तम प्रतिरोधक है। जहां तक बात हमारे क्षेत्र की है, यही शांति की गारंटी है। अर्थव्यवस्था की ओर इशारा करते हुए जेटली ने कहा कि यह पिछले तीन वर्षों में प्रभावशाली वृद्धि दर्ज कर रहा है। उन्होंने कहा, हमें आजाद हुए लगभग सात दशक पूरे हो चुके हैं। पिछले तीन वर्षों से हमारी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी है। हमें सबसे तेज़ी से बढ़ रही वैश्विक अर्थव्यवस्था होने का गौरव प्राप्त हुआ है। हम एक विकासशील अर्थव्यवस्था से विकसित अर्थव्यवस्था तक का सफर जल्द पूरा करने की आशा रखते हैं।
© Copyright Horizonhind 2025. All rights reserved