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May 31, 2017
नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट में जजों का काम सिर्फ मामलों का निपटारा करना और फैसला सुनाना है तो आप गलत है। जजों को इसके अलावा कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। जैसे कि फर्नीचरों का रिप्लेसमेंट, सुरक्षा के इंतजाम, वकीलों के लिए चैंबरों का आवंटन और कोर्ट म्यूजियम का ऑपरेशन सुनिश्चित करना जैसे काम उनके ही हिस्से हैं।जजों से बनी ऐसी कमिटियों की संख्या 39 है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को भी इन गतिविधियों पर नजर रखनी पड़ती है।सत्ता में आने के एक महीने के भीतर ही मोदी सरकार ने 50 से ज्यादा ग्रुप्स ऑफ मिनिस्टर्स जीओएमएस और एम्पावर्ड ग्रुप्स ऑफ मिनिस्टर्स ईजीओएमएस को खत्म कर दिया था। फैसले लेने में पारदर्शिता लाने के मकसद से यूपीए सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में इनका गठन किया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में ऐसी कई कमिटियां हैं, जो सालों से काम कर रही हैं।39 में से 6 कमिटियों की अगुआई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जेएस खेहर कर रहे हैं। उनके बाद दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस दीपक मिश्रा भी कई कमिटियों का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके जिम्मे दिल्ली के प्रगति मैदान पर बन रही सुप्रीम कोर्ट की नई इमारत के निर्माण की देखरेख, खरीद फरोख्त पर नजर, स्टाफ के वेलफेयर से जुड़े काम, वकीलों के चैंबर्स का आवंटन आदि है।वहीं जस्टिस चेलामेश्वर पांच कमिटियों की अगुआई कर रहे हैं, जो स्टाफ के चयन से लेकर लाइब्रेरी व सुप्रीम कोर्ट के गेस्ट हाउस की देखरेख आदि का काम देखते हैं। जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस मदन बी लोकुर चार-चार कमिटियों के प्रमुख हैं। वहीं जस्टिस आरके अग्रवाल तीन, जस्टिस एनवी रमन एक जबकि सुप्रीम कोर्ट की इकलौती महिला जज आर भानुमति भी कई कमिटियों का काम देख रही हैं।
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