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May 27, 2026
पद्मिनी एकादशी पर पुष्कर सरोवर में उमड़ी आस्था, हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी
ज्येष्ठ अधिक मास पद्मिनी एकादशी के अवसर पर बुधवार को विश्व प्रसिद्ध तीर्थराज पुष्कर में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। आस्था के केंद्र पुष्कर सरोवर पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान कर धर्म लाभ अर्जित किया और पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि व मनोकामना पूर्ति की कामना की।
ज्योतिषाचार्य पंडित कैलाशनाथ दाधीच ने बताया कि अधिक मास में आने वाली इस विशेष एकादशी को पद्मिनी एकादशी के साथ-साथ पुरुषोत्तम एकादशी और कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत, दान, जप, तप और पूजा का विशेष महत्व होता है। मंगलवार को भी बड़ी संख्या में धर्मप्रेमियों ने एकादशी के अवसर पर सरोवर में स्नान कर पुण्य अर्जित किया।
पद्मिनी एकादशी के अवसर पर धार्मिक संगठनों और समाजसेवियों द्वारा जगह-जगह प्याऊ लगाई गईं, जहां श्रद्धालुओं के लिए शीतल जल, शर्बत और ठंडे पेय की व्यवस्था की गई। कई स्थानों पर मिट्टी की मटकी और अन्य धार्मिक सामग्री का दान भी किया गया।
वहीं पंडित रविकांत शर्मा ने अधिक मास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अधिक मास प्रत्येक तीन वर्ष के अंतराल में आता है और यह अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में "अधिकस्य अधिकम फलम्" का उल्लेख मिलता है, जिसका अर्थ है कि इस मास में किए गए जप, तप, दान और सेवा कार्यों का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि पद्मिनी एकादशी विशेष रूप से मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी मानी जाती है। यही कारण है कि पुरुषोत्तम मास और पुष्कर सरोवर का महत्व इस दिन और अधिक बढ़ जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा के साथ की गई पूजा और स्नान से भगवान श्रीकृष्ण और पुष्कराज महाराज की कृपा प्राप्त होती है।
दिनभर सरोवर घाटों पर श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रही और पूरा पुष्कर धार्मिक वातावरण में सराबोर नजर आया।
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