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May 12, 2026
अजमेर। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के नाम से फर्जी डिग्री और अंकतालिकाएं तैयार करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी वीरेंद्र सिंह को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से गिरफ्तार किया है। आरोपी को सोमवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्याम सुंदर बिश्नोई ने बताया कि वीरेंद्र सिंह की पिछले छह महीनों से तलाश की जा रही थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार अपना मोबाइल फोन बंद रखकर फरार चल रहा था। एसओजी की टीम उसकी गतिविधियों और संभावित लोकेशन पर लगातार नजर बनाए हुए थी। तकनीकी सूचनाओं और निगरानी के आधार पर 10 मई को आखिरकार उसे गाजियाबाद से दबोच लिया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार (चित्तौड़गढ़) के नाम से फर्जी डिग्री और अंकतालिकाएं तैयार करने वाले नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। जांच एजेंसी को आशंका है कि यह गिरोह राजस्थान के अलावा दिल्ली-एनसीआर और अन्य राज्यों तक फैला हुआ है।
एसओजी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए किन तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल किया गया और अब तक कितने अभ्यर्थियों को नकली प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए गए। अधिकारियों का मानना है कि आरोपी से पूछताछ में कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
एसओजी की ओर से मामले की पैरवी कर रहे विशिष्ट लोक अभियोजक शशि प्रकाश इंदौरिया ने अदालत को बताया कि आरोपी से गाजियाबाद, दिल्ली और अन्य स्थानों पर जाकर विस्तृत पूछताछ और अनुसंधान किया जाना आवश्यक है। इस पर अदालत ने पुलिस रिमांड मंजूर कर लिया।
गौरतलब है कि यह मामला तब सामने आया था जब राजस्थान लोक सेवा आयोग की स्कूल लेक्चरर भर्ती परीक्षा-2022 में शामिल दो महिला अभ्यर्थियों ब्रह्मा कुमारी और कमला कुमारी की डिग्रियां फर्जी पाई गई थीं। इसके बाद आयोग ने सिविल लाइंस थाने में अलग-अलग मुकदमे दर्ज करवाए थे।
जांच के दौरान एसओजी अब तक ब्रह्मा कुमारी, कमला कुमारी, सरकारी शिक्षक दलपत सिंह, डॉ. सुरेश बिश्नोई और पूर्व डीन ध्वज कीर्ति शर्मा समेत करीब एक दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
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