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May 31, 2017
रिपोर्ट -भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में आतंकियों और अलगाववादियों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से वित्तीय मदद मिलने के पुख्ता सबूत मिले हैं। एनआईए को अलगाववादी गुटों के कार्यकर्ताओं पूछताछ में इसकी पुष्टि हुई है। सूत्रों के मुताबिक कश्मीर में आतंकी और अलगाववादी गुटों को मिल रही वित्तीय मदद का पाकिस्तान से ई-मेल के जरिये भेजा जा रहा ब्योरा राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) के हाथ लगा है। ई-मेल संदेशों से साफ है कि कश्मीर में पाकिस्तान द्वारा हवाला के जरिये आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन को वित्तीय मदद मिल रही है। हवाला का पूरा हिसाब
ई-मेल से पता चला है कि हवाला से कश्मीर में भेजे जाने वाली वित्तीय मदद कहां और किस मद में खर्च की जानी है। इसका भी पूरा हिसाब रखा जाता है। जरूरत के मुताबिक मांग
वित्तीय मदद मुहैया कराने की इस व्यवस्था के तहत अलागाववादी पाकिस्तान में सक्रिय संगठनों से जरूरत के मुताबिक पैसे मांगते हैं। मांगी गयी राशि की आईएसआई से मंजूरी लेने के लिए कश्मीर में सक्रिय संगठनों को प्रत्येक इलाके में अलगाववादियों और आतंकियों की संख्या, शिक्षा और उम्र का भी ब्योरा देना होता है। और क्या है ई-मेल में
ई-मेल संदेश में अलगावादी गुटों द्वारा आईएसआई को इलाके में संगठन के लिए काम करने वाले विवाहित और अविवाहित कार्यकर्ताओं की संख्या, फरार और जेल में बंद आतंकियों की सूची और इनके परिजनों का ब्योरा दिया गया है। आईएसआई से मंजूर राशि
एक अन्य ई-मेल संदेश में आईएसआई द्वारा कश्मीर में सक्रिय 30 विवाहित आतंकियों को प्रति व्यक्ति दस हजार रुपये की दर से 3 लाख रुपये की राशि जारी करने की मंजूरी दी गई है। 37 अविवाहित आतंकियों को 2.96 लाख रुपये जारी करते हुए प्रति व्यक्ति 8 हजार रुपये और फरार 23 आतंकवादियों के परिजनों को एक-एक हजार रुपये मंजूर किए गए हैं। संपत्ति में निवेश की जांच सूत्रों के मुताबिक हवाला के जरिये फंडिंग पर नजर रखे जाने के बाद सक्रिय गुटों को श्रीनगर और आसपास में संपत्ति के कारोबार में निवेश करने के निर्देश देने का भी खुलासा हुआ है। इसके बाद एनआईए ने अलगावादियों के संपत्ति में निवेश की पड़ताल शुरू कर दी है।
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