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January 23, 2026
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत त्रिदिवसीय प्रदर्शनी एवं सह-व्यापार मेले का हुआ भव्य शुभारंभ
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने की विश्वकर्मा कारीगरों के उत्पादों की खरीददारी
आमजन से मेले के भ्रमण का किया आह्वान
अजमेर, 23 जनवरी। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत अजमेर के अरबन हाट में आयोजित त्रिदिवसीय प्रदर्शनी एवं सह-व्यापार मेले का भव्य शुभारंभ विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी द्वारा शुक्रवार को किया गया। उन्होंने विभिन्न विश्वकर्मा कारीगरों की स्टॉलों का निरीक्षण कर उनके द्वारा निर्मित हस्तशिल्प, औजार, परिधान एवं अन्य उत्पादों की खरीददारी कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा आमजन से इस मेले का अधिकाधिक भ्रमण कर स्थानीय पारंपरिक उत्पादों एवं सेवाओं को अपनाने का आह्वान किया।
विधानसभा अध्यक्ष श्री देवनानी ने कहा कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना देश के यशस्वी प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच का प्रतिफल है। इसके माध्यम से भारत के परंपरागत उद्योगों, कारीगरों एवं सृजनशील शक्ति को आत्मनिर्भर बनाकर सशक्त किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परंपरा को प्रगति से जोड़ा जाए और राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक, सृजनात्मक एवं हस्तशिल्प परंपराओं को आधुनिक बाजार से जोड़कर आर्थिक उन्नति का माध्यम बनाया जाए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे दिवाली पर मिट्टी के दीपक हमारी संस्कृति से भावनात्मक जुड़ाव रखते हैं, उसी प्रकार स्थानीय उत्पादों को व्यवहार में लाकर अपनाने से ही हमारी परंपरा जीवित और सशक्त बनेगी।
श्री देवनानी ने कहा कि प्रधानमंत्री की विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप समाज का अंतिम व्यक्ति भी आत्मनिर्भर बने। इसके लिए इस योजना के अंतर्गत 18 श्रेणियों के पारंपरिक कामगारों एवं श्रमिकों को कम ब्याज दर पर ऋण, आधुनिक टूल किट, प्रशिक्षण और उनके उत्पादों के लिए विपणन की व्यवस्था की जा रही है। इससे वे अपने हुनर के माध्यम से बाजार से जुड़कर आय में वृद्धि कर सकेंगे। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कहा कि ऋण प्रदान करने के बाद उसका प्रभावी फॉलो-अप किया जाए। इससे ये कारीगर सफल उद्यमी और आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो सकेंगे।
उन्होंने कहा कि आज रेडीमेड कपड़ों के दौर में सिलाई-कढ़ाई जैसे पारंपरिक व्यवसायों को भी आधुनिक बाजार व्यवस्था से जोड़ा जाना चाहिए। इससे कारीगरों का हुनर बड़े पैमाने पर उपभोक्ताओं तक पहुंचे और वे प्रतिस्पर्धी वातावरण में भी आगे बढ़ सकें। सुभाष चंद्र बोस की जयंती का उल्लेख करते हुए श्री देवनानी ने कहा कि आर्थिक आजादी ही सच्ची स्वतंत्रता का आधार है और बसंत पंचमी के पावन पर्व पर मां सरस्वती की कृपा से ज्ञान, कला और कौशल के माध्यम से ही भारत समृद्धि एवं उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होगा।
जिला अध्यक्ष एवं योजना के समन्वयक श्री रमेश सोनी ने कहा कि भारत का हस्तनिर्मित शिल्प और कारीगरी विश्वभर में विख्यात रही है तथा प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से इन पारंपरिक शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाकर विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से विश्वकर्मा कामगारों के लिए अलग से बाजार विकसित करने तथा ऐसे मेले-प्रदर्शनियों को वर्ष भर आयोजित करने की आवश्यकता बताई।
तीन दिवसीय इस प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से जुड़ी 18 श्रेणियों के कारीगरों की स्टॉलें लगाई गई हैं। इनमें लुहार, बढ़ई, दर्जी, नाई, फूल विक्रेता, अस्त्रकार सहित अनेक पारंपरिक पेशों से जुड़े विश्वकर्मा कारीगर अपने उत्पाद एवं सेवाएं प्रदर्शित कर रहे हैं। यह प्रदर्शनी 25 जनवरी तक प्रातः 11 बजे से सायं 9 बजे तक आमजन के लिए खुली रहेगी। जहां प्रतिदिन सांस्कृतिक संध्या, विभिन्न प्रतियोगिताएं तथा योजना से जुड़े लाभों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।
एमएसएमई जयपुर कार्यालय के सहायक निदेशक एवं प्रदर्शनी प्रभारी श्री संजय चौधरी ने बताया कि इस मेले का उद्देश्य विश्वकर्मा कारीगरों को नई पहचान दिलाकर उनके उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ना है। इससे वे अपने कौशल के माध्यम से सतत आय अर्जित कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण, प्रमाण पत्र, आधुनिक टूल किट तथा तीन लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराकर कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
इस अवसर पर महाप्रबंधक जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र श्री धर्मेन्द्र शर्मा, अग्रणी बैंक प्रबंधक श्री संजय कुमार सिंह, एमएसएमई जयपुर कार्यालय के सहायक निदेशक श्री संजय चौधरी, श्री मधुकर शर्मा, श्री बलराम मीणा सहित बड़ी संख्या में विश्वकर्मा कारीगर एवं आमजन उपस्थित रहे।
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