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January 21, 2026
कला अंकुर की स्थापना के गौरवषाली तीन दषक ,कार्यक्रम उपलब्धि का आयोजन
नगर की अग्रणी सांस्कृतिक संस्था कला अंकुर ने युवा प्रतिभा प्रोत्साहन के गौरवषाली तीन दषक पर गीत, संगीत, नृत्य व अभिनय से सजा एक कार्यक्रम ‘उपलब्धि’ कला अंकुर अकादमी के वार्षिकोत्सव के रूप में आयोजित किया। यह कार्यक्रम कला अंकुर के स्थापना दिवस 20 जनवरी को सांय 4.30 बजे स्थानीय सूचना केन्द्र सभागार में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम संयोजक डॉ.शान्तनु, श्री उज्ज्वल एवं श्री ललित मिश्रा ने बताया यह कार्यक्रम अकादमी षिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने तैयार एवं प्रस्तुत किया तथा इस कार्यक्रम में पॉष्चात्य संगीतज्ञ श्री पीटर डेविड, शास्त्रीय गायक श्री आनन्द वैद्य एवं कथक नृत्यांगना श्रीमती कुसुम माथुर विषिष्ठ अतिथि थे। कार्यक्रम के प्रायोजक मै. एस.एल.आर. सोलर एवं श्री सुनील सोनी, पूनम होटल, अजमेर थे।
मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन के पष्चात, अध्यक्ष अनिता बाल्दी ने विषिष्ठ अतिथियों, अभिभावकों व कला प्रेमियों का स्वागत किया। इसके तुरन्त बाद सरस्वती वंदना ‘मां सरस्वती शारदे’ पर यष्वी व रूत्वी ने नृत्य प्रस्तुत किया। श्रीमती सोनू माथुर, काव्या, ललित मिश्रा, षिवांगी केलूट, मदुरा, प्रांषु, बाल मुकुंद, मीना शर्मा, नीता थावानी, सम्भावी, गौरांगी, लारण्या, बानी ने कला अंकुर गीत ‘कला अंकुरे तव स्वागतम’ प्रस्तुत किया।
इसके बाद गायन, नृत्य, वादन की लाजवाब प्रस्तुतीयां आरम्भ हुई, जिसमें ‘राग यमन’ संगीत गुरू श्रीमती सोनू माथुर एवं काव्या व विद्यार्थी ललित मिश्रा, डॉ. शान्तनु, षिवांगी केलूट, मदुरा, प्रांषु, बाल मुकुंद, मीना शर्मा, नीता थावानी, सम्भावी, गौरांगी, लारण्या, बानी ने, गीत ‘आपकी नज़रों ने’ मदुरा राजन ने, ‘सायो नारा सायो नारा’ नीता थावानी ने, ‘आने वाला पल’ ललित मिश्रा ने, ‘देखा एक ख़्वाब’ विवेक मोदी व काव्या ने, ‘ओ सजना बरखा बहार’ षिवांगी केलूट ने, ‘चंदन सा बदन’ प्रांषु ने, ‘सा रे के सा रे गामा’ सम्भावी, लारण्या, गौरांगी ने, ‘आने से उसके आए बहार’ बाल मुकु्रद, डॉ.शान्तनु व ललित मिश्रा ने प्रस्तुत किया । कार्यक्रम का मुख्य आर्कषण अकादमी के सभी विद्यार्थियों, षिक्षकों एवं कला अंकुर सदस्यों द्वारा प्रस्तुत देष भक्ति गीतों से सजी गीतमाला थी ।
नृत्य की विद्यार्थियों कनिका, हरउसत्त, यष्वी व रूत्वी ने कथक नृत्य, गीत ‘मैने पायल है’ पर वैदेही, निवैद्य, वान्या, कृषा, पूजिता व प्रांषी ने, गीत ‘पिया तोसे नैना’ पर कथक नृत्य रोषनी, तृप्ति व संजू लता ने, गीत मलंग पर दुर्वी, निर्वि, प्रियांषी व वानी ने प्रस्तुत किये।
गिटार व ऑर्गन के विद्यार्थियों में विवान बोहरा, वैदेही ने ऑर्गन पर पॉष्चात्य धुने एवं गिटार व ऑर्गन पर गीत ‘चुरा लिया है तुमने’ संस्कार गुरू, राषिका, अदिती व रत्ना जी ने प्रस्तुत किया।
पूर्वाध्यक्ष श्री गोपाल खन्ना के अनुसार कार्यक्रम में एक हास्य व व्यंग्य नाटक ‘‘उज्ज्वल भविष्य’’ का मंचन किया गया। इसमें समाज के लिए एक संदेष दिया गया कि पारंम्परिक षिक्षा में दक्षता के अलावा संगीत, नाटक नृत्य जैसी कलाओं में अर्जित कर आजीविका का माध्यम बनाया जा सकता है। इस नाटक का निर्देषन उज्ज्वल मित्रा एवं सह निर्देषन संदीप का था। नाटक में डोली, लवलीन, राहुल, प्रिंस, पिंटू, मनीष, सौरभ एवं हर्षल ने मुख्य भूमिका निभाई।
अकादमी प्राचार्य श्रीमती अंजना बोगावत ने अपने उद्बोधन में कला अंकुर अकादमी की स्थापना व उसके उद्धेष्य के सम्बन्ध में बताया। सह महासचिव श्रीमती रेनु शर्मा ने बताया कि इस अवसर पर सभी विषिष्ठ अतिथियों, प्रायोजकों, अकादमी षिक्षकों आदि को कला अंकुर स्मृति चिन्ह भेंट किये गये।
कला अंकुर के संरक्षक श्री अनिल जैन ने अपने उद्बोधन में गीत, संगीत, नृत्य व अभिनय आदि की जीवन में महत्ता पर प्रकाष डाला। उन्होंने कहा कि आज के इन्टरनेट युग में बालक, बालिकाओं एवं व्यस्कों सभी के लिए गीत, संगीत, नृत्य व अभिनय आदि में भाग लेना महत्वपूर्ण है जो कि व्यक्तित्व विकास, टीम वर्क एवं तनाव नियंत्रण के लिए आवष्यक है।
महासचिव राजीव शर्मा के अनुसार विषिष्ठ अतिथि श्री पीटर डेविड ने अपने सम्बोधन में बताया की आज के परिपेक्ष्य में हिन्दुस्तानी व पॉष्चात्य दोनो तरह के वाद्य संगीत को सीखने की आवष्यकता पर प्रकाष डाला। इसी क्रम में श्री आन्नद वैद्य ने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय व सुगम गायन संगीत की महत्ता पर प्रकाष डाला।
मंच संचालन रवि शर्मा, डॉ. शान्तनु, काव्या, श्वेता जैन एवं काव्यांष ने किया, संगीत संयोजन सतीष दीक्षित, चन्द्रशेखर, सुरेष, नंदकिषोर एवं सुनिल जैन ने किया, साउण्ड श्री देवेष ने संभाला एवं विडीयो संयोजन व फोटोग्राफी श्री चन्द्र भटिया ने की।
अन्त में संस्था महासचिव श्री राजीव शर्मा ने सभी का धन्यवाद किया।
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