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January 21, 2026
उदयपुर - चार साल से फरार, 25 हजार रुपए का इनामी और राजस्थान के टॉप-10 वांछित तस्करों में शामिल कुख्यात कंवरलाल आखिरकार पुलिस के जाल में फंस गया। इलाज कराने के इरादे से उदयपुर पहुंचे इस शातिर तस्कर को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने निजी हॉस्पिटल से गिरफ्तार कर लिया। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि कंवरलाल एक डील पर जाते समय एक्सीडेंट में घायल हो गया था और पैरों में गंभीर चोट के चलते इलाज के लिए उदयपुर आने वाला है। इसके बाद ANTF ने शहर के सभी बड़े हॉस्पिटलों पर निगरानी शुरू कर दी। जैसे ही आरोपी जेपी हॉस्पिटल में इलाज के लिए पहुंचा, पहले से तैनात टीम ने उसे दबोच लिया। आरोपी गिरफ्तारी के वक्त खुद को सुरक्षित समझ रहा था, लेकिन पुलिस पहले ही उसकी हर चाल भांप चुकी थी।
45 वर्षीय कंवरलाल पुत्र ओंकारलाल पूरे मारवाड़ और मेवाड़ इलाके में अफीम और डोडा चूरा तस्करी का मुख्य सूत्रधार था। वह मध्यप्रदेश–राजस्थान के सीमावर्ती जिलों से मादक पदार्थ लाकर अपने ठिकानों पर जमा करता और फिर नेटवर्क के ज़रिये सप्लाई करता था। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने भाई और भतीजों को भी इस अवैध धंधे में शामिल कर लिया था। फरारी के दौरान पिछले चार साल से वही उसके लिए सौदे तय कर रहे थे और कमीशन पर काम कर रहे थे। पकड़े जाने के डर से कंवरलाल मोबाइल फोन नहीं रखता था। ग्राहकों से वह कभी खुद को दिनेश तो कभी रमेश बताता था। उसके ठिकाने भी पूरी तरह गुप्त थे, ताकि पुलिस उस तक न पहुंच सके।
कंवरलाल ने 8वीं कक्षा में फेल होने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। पिता ने खेती में लगाया, लेकिन मन नहीं लगा। फिर एसटीडी बूथ खोला, मगर कम कमाई देखकर महाराष्ट्र चला गया और होटलों में वेटर का काम करने लगा।
वहीं उसने नशा कारोबारियों की चमक-दमक देखी और लालच में आकर गांव लौटते ही नशे की दुनिया में उतर गया। पैसा आने लगा तो परिवार का समर्थन भी मिलने लगा। पुलिस अब आरोपी से उसके नेटवर्क, सप्लाई चैन और अन्य सहयोगियों को लेकर पूछताछ कर रही है। ANTF का कहना है कि इस गिरफ्तारी से पूरे इलाके के नशा तंत्र को बड़ा झटका लगा है।
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