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March 28, 2025
सीबीएसई बोर्ड के निर्णयों का संयुक्त अभिभावक संघ ने स्वागत किया तो आलोचना भी की....
--- विद्यार्थियों को परीक्षा से वंचित कर अभिभावकों को ही सजा क्यों, डमी स्कूल को संरक्षण दे रहा है सीबीएसई बोर्ड - अभिषेक जैन बिट्टू
--- 5 सालों की मेहनत रंग लाई कक्षाओं में अभिभावकों की भागीदारी, इस निर्णय से पढ़ाई के स्तर में व्यापक सुधार संभव होगा - संयुक्त अभिभावक संघ
जयपुर। गुरुवार को सीबीएसई बोर्ड ने शिक्षा के स्तर में व्यापक सुधार को लेकर दो अहम निर्णय लिए, एक निर्णय में डमी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा से वंचित करने का निर्णय लिया तो दूसरा सीबीएसई से एफिलेटेड स्कूलों की कक्षा और खेल के मैदानों में अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित करने का लिया, जिस पर संयुक्त अभिभावक संघ ने एक निर्णय की आलोचना की तो दूसरे निर्णय का स्वागत किया। संयुक्त अभिभावक संघ लगातार पांच सालों से मांग कर रहा था कि स्कूलों में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाई जाए, जिससे विद्यार्थियों के साथ - साथ अभिभावक भी पढ़ाई के स्तर में व्यापक भूमिका निभाकर अपनी भागीदारी निभा सके जो मेहनत अब रंग लाई।
संयुक्त अभिभावक संघ प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि सीबीएसई बोर्ड ने डमी स्कूल को लेकर केवल विद्यार्थियों को दोषी माना है और अभिभावकों को सजा दी है जबकि बोर्ड का यह निर्णय डमी स्कूल को संरक्षण पहुंचा रहा है। सजा का प्रावधान एक तरफा ना होकर दोनों तरफ होना चाहिए किंतु सीबीएसई बोर्ड के इस निर्णय में केवल विद्यार्थी और अभिभावक को दोषी ठहराया गया है डमी स्कूलों के बढ़ते चलन बोर्ड कोई निर्णय नहीं ले सका, क्योंकि बहुत सारे नामी स्कूल ही डमी स्कूलों का संचालन कर अभिभावकों को उसके लिए प्रेरित कर रहे है और अभिभावक अतिमहत्वाकांक्षा के चलते डमी स्कूल की तरफ जा रहे है। विद्यार्थियों पर अतिमहत्वाकांक्षा थोपने वाले अभिभावकों को सजा मिलनी ही चाहिए किंतु जो स्कूल अभिभावकों को डमी स्कूल के लिए प्रेरित करते है उन पर भी सजा का प्रावधान तय होना चाहिए।
अभिषेक जैन ने कहा कि शुक्रवार को संयुक्त अभिभावक संघ की ओर से सीबीएसई बोर्ड को दो पत्र लिखे गए जिसमें एक आलोचना वाला और दूसरा स्वागत का पत्र दिया गया। विद्यार्थियों के जीवन में अच्छी शिक्षा के लिए जितनी आवश्यकता शिक्षकों की है उतनी ही अभिभावकों की भी है। सीबीएसई बोर्ड में बोर्ड से एफिलेटेड स्कूलों में विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों की भागीदारी देने का जो निर्णय लिया है वह स्वागत योग्य है अब अगर सीबीएसई बोर्ड इस भागीदारी को अनिवार्यता के साथ लागू कर देवे और परीक्षा में विशेष अंक का प्रावधान कर दे तो अभिभावक भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर स्कूलों में विद्यार्थियों के साथ अपनी भागीदारी निभा सकेंगे। ऐसा करने से ना केवल विद्यार्थियों में बदलाव देखने को मिलेगा, बल्कि शिक्षक और अभिभावकों में भी व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा, जिस असर शिक्षा में व्यापार और जरूरी सुधार की तरफ भी देखा जा सकता है।
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