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November 5, 2024
सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर के बहुचर्चित एकल पट्टा प्रकरण में फैसला सुनाते हुए कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल और जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के तीन तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई बहाल कर दी है।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भूयान की बेंच ने इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनमें एकल पट्टा मामले में आपराधिक कार्रवाई को समाप्त कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को निर्देश दिए हैं कि वह मामले की सुनवाई छह महीने में पूरी करके अपना निर्णय दे।
आरटीआई एक्टिविस्ट अशोक पाठक द्वारा दायर की गई विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जारी किया। पाठक ने हाईकोर्ट के दो आदेशों, जो 17 जनवरी 2023 और 15 नवंबर 2022 को दिए गए थे, के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इन आदेशों में हाईकोर्ट ने जेडीए के तत्कालीन एसीएस जीएस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर, और जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई को समाप्त कर दिया था।
29 जून 2011 को जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने गणपति कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर शैलेंद्र गर्ग के नाम पर एकल पट्टा जारी किया था। 2013 में रामशरण सिंह नामक परिवादी ने इस मामले की शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में की थी। इसके बाद तत्कालीन एसीएस जीएस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर, जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी, और शैलेंद्र गर्ग समेत दो अन्य को गिरफ्तार किया गया और एसीबी ने उनके खिलाफ चालान पेश किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जेडीए ने 25 मई 2013 को एकल पट्टा निरस्त कर दिया। हालांकि, इस प्रकरण में एसीबी ने समय-समय पर तीन क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत कीं, जिनमें आरोपियों को क्लीन चिट दी गई। हाईकोर्ट ने 17 जनवरी 2023 को अपने आदेश में एसीबी द्वारा आरोपियों के खिलाफ दायर चार्जशीट को वापस लेने के निर्णय को सही ठहराया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अब हाईकोर्ट के दोनों आदेशों को रद्द कर दिया है।
विधायक शांति धारीवाल को भी इस मामले में झटका लगा है। परिवादी ने उन्हें आरोपी बनाने का प्रार्थना पत्र एसीबी कोर्ट में प्रस्तुत किया था, जिसे लेकर धारीवाल ने हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने 15 नवंबर 2022 को धारीवाल को राहत देते हुए उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई समाप्त कर दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को भी रद्द कर दिया है, जिससे धारीवाल के खिलाफ फिर से सुनवाई शुरू हो सकती है।
गहलोत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अप्रैल 2024 में प्रस्तुत एफिडेविट में धारीवाल समेत सभी आरोपियों को क्लीन चिट दी थी। हालांकि, कुछ समय बाद सरकार ने यू-टर्न लेते हुए नया एफिडेविट पेश किया, जिसमें कहा गया कि तीन अधिकारियों और शांति धारीवाल के खिलाफ आपराधिक मामला बनता है। यह यू-टर्न और सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश, राज्य के प्रशासन और राजनीतिक क्षेत्र में हलचल मचा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद मामले में शामिल सभी पक्षों पर पुनः आपराधिक सुनवाई होगी। हाईकोर्ट को निर्देशित किया गया है कि वह छह महीने के भीतर मामले की सुनवाई पूरी करके अपना फैसला सुनाए।