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January 13, 2023
विश्व के एकमात्र पौराणिक चतुर्मुख ब्रह्मा की पुष्कर स्थित मंदिर मैं बीते 6 सालों से शंकराचार्य की गद्दी को अपने उत्तराधिकारी का इंतजार है। आज से करीब 6 वर्ष पूर्व जगत पिता ब्रह्मा मंदिर के महंत सोमपुरी महाराज की सन 2017 में 11 जनवरी को मौत हो गई थी । जिनकी अंत्येष्टि का कार्यक्रम 12 जनवरी 2017 को आयोजित किया गया था। जिसके बाद से ही शंकराचार्य परंपरा की इस मुख्य गद्दी को अपने उत्तराधिकारी का इंतजार है। महंत के पद को लेकर चले विवाद के चलते आज तक विवाद देवस्थान न्यायालय में विचाराधीन है। जगतपिता ब्रह्मा मंदिर के 1365 वर्ष के इतिहास में पहली बार महंत के गद्दे इतने समय तक खाली है। इन विवादों के बीच मंदिर व्यवस्थाओं का जिम्मा जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में 5 सदस्य अस्थाई प्रबंधन समिति संभाल रही है । प्रबंधन समिति द्वारा समय-समय पर नवाचार करने का प्रयास भी किया जा रहा है । अब यही नवाचार सवालों के घेरे में हैं ।
क्या है जगतपिता ब्रह्मा मंदिर की महंत की गद्दी का विवाद
ब्रह्मा मंदिर के तत्कालीन महंत लहरपुरी महाराज के निधन के बाद उनके उत्तराधिकारी शिष्य महंत सोमपुरी ने मंदिर के 32वें महंत के रूप में गद्दी संभाली थी। सोमपुरी सवा तीन साल तक महंत रहे। उन्होंने अल्प समय के कार्यकाल के दौरान अपना कोई उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया। परिणाम स्वरूप महंत की गद्दी को लेकर दावेदारों मैं घमासान छिड़ गया । महंत की गद्दी के लिए महानिर्वाणी अखाड़े के साथ-साथ पुजारी परिवार समेत कई लोगों ने दावेदारी की। महंत बनने के लिए सोमपुरी के भतीजे दिवलाल पुरी ने तो मुंडन भी करा लिया। वहीं मंदिर के वरिष्ठ पुजारी लक्ष्मीनिवास वशिष्ठ गृहस्थी छोड़ने के लिए तैयार हो गए। एक से अधिक दावेदार होने के कारण फैसला नहीं हो सका। आखिर विवाद देवस्थान कोर्ट में पहुंच गया। कोर्ट में पूर्व महंत लहरपुरी के शिष्य व नथावड़ा गो शाला के महंत योगेंद्र पुरी, सोमपुरी के गुरू भाई सुरेशपुरी, प्रज्ञानपुरी, पुजारी लक्ष्मीनिवास वशिष्ठ, नांद गोशाला के महंत समताराम, अजमेर के शिव ज्योतिषआनंद महाराज, सहित आठ लोगों ने महंत बनने के लिए आठ अलग-अलग दावे पेश किए। जिसका निर्णय 6 साल बीत जाने के बावजूद भी नहीं हो पाया।
अस्थाई प्रबंधन समिति अब लेगी ऑनलाइन दान
जगतपिता ब्रह्मा मंदिर में यूं तो सालाना 15 से 20 लाख रुपए का चढ़ावा मंदिर के दान पात्रों से प्राप्त होता है । जिसके चलते बीते 6 वर्षों में मंदिर के चढ़ावा राशि करोड़ों में पहुंच गई है । जिसका प्रबंधन मंदिर की अस्थाई प्रबंधन समिति संभाल रही है। अस्थाई प्रबंधन समिति अब दान लेने के लिए जल्द ऑनलाइन व्यवस्था शुरू करने जा रही है। जिसके चलते अब श्रद्धालुओं घर बैठे ऑनलाइन मोड के जरिए ब्रह्मा मंदिर में दान दे सकेंगे। जिला कलेक्टर और अस्थाई प्रबंधन समिति के अध्यक्ष आज गुरुवार को ऑनलाइन क्यूआर कोड की लॉन्चिंग भी करने जा रहे हैं । जिसके जरिए दान राशि के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया जा रहा है।
दान ऑनलाइन पर दर्शन ऑफलाइन
जहां देशभर के विभिन्न प्रमुख मंदिरों के दर्शन श्रद्धालु घर बैठे कर रहे हैं। वही विश्व के एकमात्र जगतपिता ब्रह्मा के पोराणिक मंदिर के दर्शन आज भी मंदिर में जाकर ही संभव हो पा रहे हैं।
राज्य सरकार के आदेश और स्थानीय तीर्थ पुरोहित, सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग के बावजूद जगतपिता ब्रह्मा मंदिर के दर्शन ऑनलाइन करना अब तक संभव नहीं हो पाया है। इतना ही नहीं बीते 1 वर्षों से जगतपिता ब्रह्मा मंदिर में दर्शन का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं के लिए लगाई गई एलईडी स्क्रीन बंद पड़ी है। ऐसे में अस्थाई प्रबंधन समिति द्वारा किए जा रहे हैं नवाचार अब सवालों के घेरे में है ।
अस्थाई प्रबंधन समिति के सचिव ने दी सफाई
ब्रह्मा मंदिर की अस्थाई प्रबंधन समिति के सचिव सुखाराम पिंडेल ने बताया कि ऑनलाइन दान राशि लेने को आज क्यूआर कोड का विमोचन कर नवाचारों की शुरुआत की गई है। जल्द ही मंदिर के दर्शन को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा । इतना ही नहीं जगतपिता ब्रह्मा मंदिर और कस्बे के मुख्य स्थलों पर पांच बड़ी एलईडी के माध्यम से श्रद्धालुओं को दर्शन करवाया जाएगा। उपखंड अधिकारी सुखाराम पिंडेल ने बताया कि विकास कार्यों की कड़ी में जल्द ही दिव्यांग जनों के लिए लिफ्ट का कार्य भी शुरू करवाया जाएगा। जिसके लिए कई दानदाता सामने आए हैं।
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