अजमेर न्यूज़: अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले में यूं तो राजस्थान की संस्कृति के विभिन्न रंग देखने को मिल रहे हैं, लेकिन इस बार रेतीले धोरों की कला को भी पहचान अब मिलने लगी है.
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November 4, 2022
मेला प्रशासन ने इस बार मशहूर सेंड आर्टिस्ट अजय रावत के सहयोग से सेंड आर्ट फेस्टिवल का आयोजन
अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले में यूं तो राजस्थान की संस्कृति के विभिन्न रंग देखने को मिल रहे हैं, लेकिन इस बार रेतीले धोरों की कला को भी पहचान अब मिलने लगी है
जिसका परिणाम है कि देशी-विदेशी पर्यटक इस कला से अभिभूत होकर दृश्यों को कैमरे में कैद कर अपने यादों में सजा रहे हैं, मेला प्रशासन ने इस बार मशहूर सेंड आर्टिस्ट अजय रावत के सहयोग से सेंड आर्ट फेस्टिवल का आयोजन किया है, जिसको देखने पर्यटक मेला ग्राउंड और फेस्टिवल स्थल पर पहुंच रहे हैं, रेत के महीन कणों से बालू मिट्टी लेती है आकार राजस्थान की सुनहरी माटी ने यूं तो कई कला और कलाकारों को जन्म दिया है, कला की बात की करे, तो मरुधरा के लोक गीत-संगीत, चित्रकला, भवन निर्माण शैली, आभूषण निर्माण कला, मढ़ना आदि देश ही नहीं सात समुद्र पार विदेशों तक अपनी धमक और गूंज का लोहा मनवा चुके है, लेकिन आज के दौर में रेतीले धोरों की गोद में पोषित हो रही कला इन्हीं धीरों में एक लंबे अरसे से धूल फांक रही थी. राजस्थान की बालू रेत के महीन कणों से भावात्मक चित्रण को साकार रूप देती रेत कला शैली, जिसे पुष्कर के ग्रामीण अंचल में पले-बड़े अजय रावत ने कई वर्षों से बिना किसी सरकारी मदद के जीवित रखने के प्रयासों में जुटे है. पुष्कर में सैंड आर्ट फेस्टिवल का आयोजन पुष्कर के निकट ग्राम गनेहड़ा के पास जन्मे अजय रावत बीते 8 वर्षों से रेतीले धोरों की इस कला को अपने संघर्ष और उत्साह की बदौलत जिंदा रखे हुए हैं. विभिन्न त्योहारों, राष्ट्रीय पर्वों और समसामयिक घटनाओं ओर आयोजनों को लेकर अपनी रेत कला शैली के जरिए सकारात्मक संदेश भी देते आए है. गत 6 वर्षों से अजय पुष्कर के अंतराष्ट्रीय पशु मेले में अपने खर्चे से रेत राष्ट्रीय रेत कला उत्सव प्रदर्शनी का आयोजन करते है. इस वर्ष पुष्कर मेले में 1 नवंबर से 8 नवंबर तक सैंड आर्ट फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है. इतना ही नहीं देश भर से अन्य रेत कलाकृति के कलाकारों को इस मेले में बुलवाकर इसे राष्ट्रीय स्वरूप देने का प्रयास भी करते आए है, जिससे देशभर से आए पर्यटक को धोरों की संस्कृति का एक नूतन स्वरूप देखने को मिलता है. अजय रावत बताते हैं कि इस वर्ष राष्ट्रीय रेत कला उत्सव में 12 कलाकृतियों का निर्माण किया गया है.जिनमें देशभर के ऐतिहासिक इमारतों, राष्ट्रीय नायकों के चित्रण के साथ-साथ राजस्थान के पहनावे और लोक संस्कृति को दर्शाया गया है. अजय रावत ने बताया कि इसके पीछे उनका उद्देश्य राजस्थान में नूतन स्वरूप ले रही, इस रेत कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले. साथ ही पुष्कर तीर्थ की छवि के अनुसार आने वाले पर्यटकों का पुष्कर के प्रति लगाव बना रहे. देशी-विदेशी पर्यटकों को भा रही है बालू रेत की यह कला पुष्कर कस्बे के मेला ग्राउंड के पास कपालेश्वर तिराहे पर करीब 500 मीटर से ही सैंड आर्ट फेस्टिवल का गुब्बारा पर्यटकों की नजरों में आ जाता है, जिसे देखकर पर्यटक फेस्टिवल स्थल तक पहुंचते हैं|