Post Views 21
November 4, 2022
धार्मिक मान्यता के अनुसार देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु 4 महीने की निद्रा के बाद जागृत हुए, इसी के साथ शादी ब्याह और मांगलिक कार्यों का हुआ शुभारम्भ
देवउठनी एकादशी पर शुक्रवार से देश सहित अजमेर में शादी ब्याह व मांगलिक कार्यों का हुआ शुभारंभ, कई स्थानों पर भगवान विष्णु के प्रतीक सालिग्राम का विवाह तुलसी के साथ करवाया संपन्न
अजमेर शहर के कई इलाकों में देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के प्रतीक सालिग्राम का विवाह माता तुलसी के साथ संपन्न कराया गया। कार्तिक माहत्म्य के अनुसार दैत्य जलंधर की पत्नी का नाम वृंदा था जो की सतीव्रता थी। इस कारण दैत्य जलंधर का भगवान शिव और इंद्र भी वध नहीं कर पा रहे थे। जब भगवान विष्णु जलंधर के रूप में वृंदा के पास पहुंचे और उनका सतीत्व नष्ट कर दिया इसके बाद जलंधर का वध हुआ। मगर इस पर वृंदा ने भगवान विष्णु को पत्थर बनने का श्राप दे दिया। तब भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि उनके पाषाण रूप सालिग्राम से उनका विवाह किया जाएगा, जो कि गुणकारी फलकारी होगा। तब से ही सालिग्राम और तुलसी के विवाह की परंपरा चली आ रही है। वृंदा का अर्थ तुलसी होता है। अत्याधिक तुलसी होने के कारण ही वृंदावन को वृंदावन कहा जाता है। जिन परिवारों में शुक्रवार को सालिग्राम और तुलसी का विवाह हुआ वहां गत दिनों से ही गणेश निमंत्रण, मंगल गीत और वैवाहिक परंपरा निभाई जा रही थी। इसी कड़ी में कुंदन नगर निवासी प्रमोद गौड़ ने बताया कि ग्यारस के पावन पर्व पर मेयो कॉलेज शिव मंदिर से भगवान सालिग्राम की बारात गाजे बाजों के साथ कुंदन नगर पहुंची जहां तोरण की रस्म के बाद भगवान सालिग्राम का तुलसी माता के साथ विधि-विधान से विवाह संपन्न कराया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved