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July 11, 2022
शहर के सूरजपोल गेट बाहर स्थिति बाँकेबिहारी मन्दि में आषाढ़ शुक्ला द्वितीया को जगन्नाथ धाम पूरी की तर्ज पर नन्दीघोष रथ पर सवार होकर भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा से साथ अपनी मौसी के घर पधारे महाप्रभु जगन्नाथजी का दस दिवसीय रथ यात्रा महोत्सव धूमधाम से आयोजित हुआ। महोत्सव के तहत प्रतिदिन भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा अर्चना एवं भजन कार्यक्रम में विभिन्न भजन मंडल के गायक कलाकारों ने भाव भक्ति से परिपूर्ण भजनो की प्रस्तुति दी। जगन्नाथ रथ यात्रा प्रमुख विजय तंवर ने बताया कि जगन्नाथजी श्रीहरी विष्णु भगवान के कृष्ण अवतार का ही स्वरूप है। अत: जगन्नाथ प्रभु का रथयात्रा महोत्सव के तहत विष्णु भगवान के अवतार मत्स्य अवतार,कछप्प अवतार,वराह अवतार,नृसिंग अवतार,वामन अवतार परशुुराम अवतार एवं राम स्वरूप में नयनाभिराम श्रृंगार किया गया। जगन्नाथ को भात जगत पसारे हाथ.. पूरी जगन्नाथ धाम की तरह ही रथयात्रा महोत्सव में प्रतिदिन चावल से निर्मित विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया गया। बाँके बिहारी मंदिर के अध्यक्ष माणक ड़ाणी ने बताया कि रथयात्रा महोत्सव के अंतिम दिन आषाढ़ शुक्ला देवशयनी एकादशी को आर्ट ऑफ लिविंग ग्रुप के नरेश झंवर ने निकुंज में विराजे घनश्याम राधे राधे.. दुनिया से जो हारावो आया तेरे द्वार.. हर कदम पर सांवरिया तेरा साथ चाहिये.. श्याम तेरे भरोसे मेरा परिवार है.. के भजनो की प्रस्तुति दी। आरती चतुर्भुजों जगनन्नाथ कंठशोभित कौस्तुभ... भक्तों द्वारा सस्वर शंखनाद एवं करतल ध्वनि से सामूहिक आरती उतारी गई एवं प्रसाद वितरण के साथ समापन हुआ। कार्यक्रम में अनेक भक्तो ने गाजे बाजे एवं महाप्रभुजी की जय जयकार के साथ ही पुष्पवर्षा के साथ जगन्नाथजी, बलभद्रजी एवं सुभद्राजी ने अपने निजधाम सांवरिया सेठ मन्दिर की और प्रस्थान किया, बाँके बिहारी मंदिर में उपस्थित भक्तो ने भाव भीनी विदाई देते हुये महाप्रभू जी अगले वर्ष पुन: पधारने एवं सर्वत्र शांति की कामना की।
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