For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 152837323
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: तेज रफ्तार कार ने दो पुलिसकर्मियों को मारी जोरदार टक्कर, ASI की हालत नाजुक |  Ajmer Breaking News: अजमेर सेंट्रल जेल में बंद कैदियों से जेलर के मोबाइल फोन से वीडियो कॉल कराने का मामला,जेल प्रशासन में खलबली, |  Ajmer Breaking News: अजमेर संस्कृति स्कूल में MUN 4.0 का आगाज, छह स्कूलों के विद्यार्थियों सहित संस्कृति स्कूल के विद्यार्थी भी भी दिखाएंगे अपने प्रतिभा का हुनर |  Ajmer Breaking News: 800 से अधिक साधकों के साथ पुष्कर अरण्य तीर्थ प्रदक्षिणा का भव्य आगाज, 24 कोसी पदयात्रा और 84 कोसी रथयात्रा रवाना,  |  Ajmer Breaking News: दरगाह थाने के पुलिसकर्मियों को टक्कर मारने वाले कार चालक की पहचान, पुलिस ने स्कॉर्पियो को किया जब्त, चालक से पूछताछ जारी,  |  Ajmer Breaking News: अजमेर पुलिस की साइबर अपराधियों पर बड़ी कार्रवाई, 42 ठिकानों पर दबिश देकर 24 आरोपी किए गिरफ्तार |  Ajmer Breaking News: कृष्णगंज थाना अंतर्गत छतरी योजना में गत 6 जुलाई 2026 को हुई सेंधमारी की घटना का पुलिस ने खुलासा करते हुए वांछित चोर को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल कर दी ली है। |  Ajmer Breaking News: तहसील स्तरीय आवंटन समिति एवं तहसील स्तरीय खाद्य सुरक्षा एवं सतर्कता समिति की बैठक शुक्रवार को आयोजित की गई। |  Ajmer Breaking News: रेलवे अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग, पेंशनर्स ने किया प्रदर्शन, रेलवे अस्पताल मे व्यवस्था सुधार की रखी मांग  |  Ajmer Breaking News: जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में कार्यरत प्राइवेट कंप्यूटर ऑपरेटरों ने 2 महीने से वेतन नहीं मिलने के विरोध में प्रदर्शन किया जताई नाराजगी | 

विशेष: श्री गोवर्धन कथा ,महत्व एवं पूजन विधि

Post Views 61

October 30, 2020

इस दिन गाय की पूजा करने से सभी पाप उतर जाते हैं और मोक्ष प्राप्त होता है।

 गोर्वधन पूजा 
 

कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन पूजा  (Govardhan Puja) की जाती है। हिन्दू मान्यतानुसार महाभारत काल में इसी दिन भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी। तभी से यह परंपरा कायम है। साल 2020 में गोवर्धन पूजा 15 नवंबर को की जाएगी। 


पूजन विधि 


इस दिन भगवान को तरह−तरह के व्यंजनों के भोग लगाये जाते हैं और उनके प्रसाद का लंगर लगाया जाता है। इस दिन गाय−बैल आदि पशुओं को स्नान कराकर फूलमाला, धूप, चंदन आदि से उनका पूजन किया जाता है। गायों को मिठाई खिलाकर उनकी आरती उतारी जाती है तथा प्रदक्षिणा की जाती है। गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर जल, मौली, रोली चावल लगाकर पूजा करते हैं तथा परिक्रमा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन गाय की पूजा करने से सभी पाप उतर जाते हैं और मोक्ष प्राप्त होता है।


गोवर्धन पूजा कथा 


एक बार की बात है इंद्र को अपनी शक्तियों पर घमंड हो गया। तब भगवान कृष्ण ने उनके घमंड को चूर करने के लिए एक लीला रची। इसमें उन्होंने सभी ब्रजवासियों और अपनी माता को एक पूजा की तैयारी करते हुए देखा तो, यशोदा मां से पूछने लगे, मईया आप सब किसकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं तब माता ने उन्हें बताया कि वह इन्द्रदेव की पूजा की तैयारी कर रही हैं
फिर भगवान कृष्ण ने पूछा मैइया हम सब इंद्र की पूजा क्यों करते है? तब मईया ने बताया कि इंद्र वर्षा करते हैं और उसी से हमें अन्न और हमारी गाय के घास मिलता है। यह सुनकर कृष्ण जी ने तुरंत कहा  मैइया हमारी गाय तो अन्न गोवर्धन पर्वत पर चरती है, तो हमारे लिए वही पूजनीय होना चाहिए। इंद्र देव तो घमंडी हैं वह कभी दर्शन नहीं देते हैं। 
कृष्ण की बात मानते हुए सभी ब्रजवासियों ने इन्द्रदेव के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इस पर क्रोधित होकर भगवान इंद्र ने मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। वर्षा को बाढ़ का रूप लेते देख सभी  ब्रज के निवासी भगवान कृष्ण को कोसने लगें। तब कृष्ण जी ने वर्षा से लोगों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कानी उंगली पर उठा लिया। 
इसके बाद सब को अपने गाय सहित पर्वत के नीचे शरण लेने को कहा। इससे इंद्र देव और अधिक क्रोधित हो गए तथा वर्षा की गति और तेज कर दी। इन्द्र का अभिमान चूर करने के लिए तब श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियंत्रित करने को और शेषनाग से मेंड़ बनाकर पर्वत की ओर पानी आने से रोकने को कहा। 
इंद्र देव लगातार रात- दिन मूसलाधार वर्षा करते रहे। काफी समय बीत जाने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि कृष्ण कोई साधारण मनुष्य नहीं हैं। तब वह ब्रह्मा जी के पास गए तब उन्हें ज्ञात हुआ की श्रीकृष्ण कोई और नहीं स्वयं श्री हरि विष्णु के अवतार हैं। इतना सुनते ही वह श्री कृष्ण के पास जाकर उनसे क्षमा याचना करने लगें। इसके बाद देवराज इन्द्र ने कृष्ण की पूजा की और उन्हें भोग लगाया। तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा कायम है। मान्यता है कि इस दिन गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं। 
 


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved