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October 2, 2020
अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस
अहिंसा एक वस्त्र नहीं जिसे जब चाहा धारण कर लिया यह एक भाव है जो मनुष्य के हृदय में बसता है,
इस वाक्य के साथ हम बढ़ते हैं आज के अपने टॉपिक पर
2 अक्टूबर यानी भारत के राष्ट्रपिता और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी का जन्मदिन
इस वर्ष पूरे विश्व में महात्मा गांधी की 151 वी जयंती मनाई जा रही है ,जिसे पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है
आइए जानते हैं | 2 अक्टूबर इतिहास को विस्तार से
अहिंसा परमो धर्मा
जिस के मार्ग पर चलकर महात्मा गांधी ने भारत की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पूरे विश्व को संदेश दिया कि कोई भी लड़ाई हिंसा से नहीं बल्कि अहिंसा से भी जीती जा सकती है
,महात्मा गांधी ने कहा था कि युद्ध की तरफ जाना किसी समस्या का हल नहीं है शांति के मार्ग पर ही समस्या का समाधान मिलता है ,
उन्होंने क्रोध और घमंड को अहिंसा का सबसे बड़ा शत्रु बताया
आज के वक्त में अहिंसा बस किताबी पन्नों में दफन हो गई है ,जबकि इसकी जरूरत आज ही सबसे ज्यादा है
,जरूरी नहीं है कि किसी को शारीरिक चोट पहुंचाना हिंसा है, किसी को मानसिक तनाव देना भी हिंसा के दायरे में आता है
बापू के जन्मदिन को अहिंसा की नीति के जरिए विश्व भर में शांति संदेश को बढ़ावा देने के लिए और महात्मा गांधी के योगदान को सराहने के लिए अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया
इस सिलसिले में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा रखे गए प्रस्ताव का भरपूर समर्थन किया गया महासभा के कुल 191 सदस्य देशों में से 140 से भी ज्यादा देशों ने इस प्रस्ताव को समर्थन किया
15 जून 2007 को महासभा द्वारा पारित संकल्प में कहा गया कि शिक्षा से जनता के बीच अहिंसा का व्यापक प्रसार किया जाएगा
संकल्प यह भी पुष्टि करता है कि अहिंसा के सिद्धांत की सार्वभौमिक प्रासंगिकता एवं शांति, सहिष्णुता तथा संस्कृति को अहिंसा द्वारा सुरक्षित रखा जाएगा
सत्य अहिंसा का मार्ग जितना कठिन है उसका अंत उतना ही सुगम और आत्मा की शांति पहुंचाने वाला है,
गांधी जी की विचारधारा सत्य और अहिंसा- भगवत गीता, जैन धर्म और बौद्ध धर्म की शिक्षाओं से प्रभावित थी
गांधीजी एक शाकाहारी और हिंदू विचार के अनुयाई थे| वे आध्यात्मिक और व्यवहारिक शुद्धता का पालन करते थे |
उनका मत था कि आंख के बदले आंख नहीं ली जा सकती क्योंकि इससे सारा संसार अंधा हो सकता है|
मतलब हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं दिया जाता क्योंकि हिंसा का जवाब हिंसा से देने से हिंसा और भड़कती है ना कि कम होती
उन्होंने कहा था,
जंग तो खुद ही एक मसला है
जंग मसलों का हल क्या देगी
आज खून और आग बरसेगी
कल भूख और एहसास देगी
सत्य के सच्चे पुजारी गांधी जी का विश्वास था कि लोगों में हिंसा का कारण तनाव और मन में बसने वाला राग द्वेष है, जिन को मन से हटा कर आपस में प्रेम भाईचारा दया और मानवता को बसाया जाए
जिससे दूसरों के साथ साथ आत्म शांति का भी अनुभव हो, गांधीजी सप्ताह में 1 दिन मौन व्रत रखते थे ,उनका विश्वास था कि बोलने पर संयम रखने से आंतरिक शांति मिलती है, उन्होंने अहिंसा के पांच आधार बताएं
सम्मान
समझ
स्वीकृति
प्रशंसा और करुणा इन पांच आधारों को धारण करने से कोई भी व्यक्ति अहिंसा के मार्ग पर चल सकता है ,उन्होंने लोगों से पांच व्रत रखने को भी कहा था जिनमें
चरखा कातना
अस्पृश्यता मिटाना
मादक वस्तुओं का निरोध
और हिंदू मुस्लिम एकता के साथ-साथ स्त्रियों के प्रति समानता का व्यवहार रखना था
महात्मा गांधी ने अपने सत्याग्रह के दौरान लोगों के लिए सार्वभौमिक शिक्षा, महिलाओं के लिए अधिकार,सामुदायिक सौहार्द ;निर्धनता का उन्मूलन; खादी को प्रोत्साहन देना आदि जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई थी
गांधी जी ने सात सामाजिक बुराइयों को भी बताया था ,
जो निम्न प्रकार से हैं
1. सिद्धांतों के बिना राजनीति
परिश्रम के बिना संपत्ति
आत्म चेतना के बिना आनंद
चरित्र के बिना ज्ञान
नैतिकता के बिना व्यापार
मानवता के बिना विज्ञान
और बलिदान के बिना पूजा नहीं हो सकती
गांधी जी के विचारों से प्रभावित होकर गांधी जी को महात्मा की उपाधि रविंद्र नाथ टैगोर ने दी थी जिसका अर्थ है
“ महान आत्मा “
सत्य और अहिंसा के सच्चे पुजारी गांधीजी के अस्तित्व को पूरे संसार ने ग्रहण करने का 2007 से संकल्प लिया है,
अहिंसा एक ऐसा रास्ता है जिसमें कदम कभी नहीं डगमग आते हैं
इसलिए कहा जाता है ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका समाधान अहिंसा के मार्ग पर नहीं मिलता
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