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October 1, 2020
कृषि बिल चर्चाओं में
हाल ही में संसद में पारित हुए कृषि बिलों को लेकर विपक्ष ने संसद में काफी हंगामा किया है साथ ही विपक्ष ने इस कृषि बिल को पूंजीपतियों का हितैषी बताया है, इसी को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में किसानों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है ,किसानों के इस नए कृषि बिल को किसान विरोधी बिल बताया जा रहा है ,
आइए समझते हैं क्या है नया कृषि बिल
सरकार ने कृषि संबंधित तीन विधायक पारित किए थे , जिनमें आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में संशोधन से जुड़ा हुआ पहला विधेयक है, वहीं दो अन्य विधेयकों का संबंध कृषि उपज व व्यापार सुगमता से है
कौन -कौन से है ये तीन विधेयक आइये जानते है
. आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक 2020
कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार संवर्धन एवं सुधार विधेयक 2020
..और तीसरा है मूल्य आश्वासन पर किसान बंदोबस्ती और सुरक्षा समझौता और कृषि सेवा विधेयक 2020
आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक 2020
इसमें लगभग 6 दशक पुराने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में संशोधन हुआ है, जिसके अंतर्गत अनाज दाल तिलहन खाद्य तेल प्याज और आलू जैसी वस्तुओं को आवश्यक वस्तुओं की सूची के दायरे से बाहर किया गया है, इस बिल के तहत इन उत्पादों के लिए कोई स्टाक लिमिट नहीं होगी और ना ही निर्यात पर कोई प्रतिबंध लगेगा इन उत्पादों की खरीद बिक्री और देशभर में आवाजाही पर भी कोई प्रतिबंध नहीं होगा इसके अलावा इस बिल के तहत युद्ध, अकाल ,असाधारण मूल्यवृद्धि और प्राकृतिक आपदा जैसी स्थितियों में इन कृषि खाद्य पदार्थों का विनियमन हो सकेगा
कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार संवर्धन एवं सुविधा विधेयक 2020
इस बिल में किसानों के लिए कृषि उपज के बाधा मुक्त व्यापार के लिए फार्मिंग प्रोड्यूस ,ट्रेड एंड कॉमर्स प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन विधेयक 2020 को संसद के दोनों सदनों से पारित कर दिया गया है
विधेयक में किसानों की उपज का अर्थ है , खाद्य पदार्थ जैसे गेहूं, चावल ,तिलहन, तेल ,सब्जियां फल मसाले और गन्ना | इसमें मुर्गी पालन, सूअर पालन ,बकरी पालन, मत्स्य पालन, और कच्चा कपास, जूट और पशु चारा इसके अंतर्गत शामिल किये गए हैं , इस बिल में अन्तर्राजीय और राज्य के भीतर किसी भी व्यक्ति, कंपनी, संस्थान सहकारी समिति फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन से AFPO को उत्पादों को सीधे खरीदने, लाने ले जाने और स्टोर करने की छूट होगी
एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमिटी (APMC ) एक्ट के तहत राज्य में सरकार की मंडियों के बाहर छूट होगी और इन पर राज्य सरकार कोई शुल्क भी नहीं लगा सकेगी ,
पेमेंट की शर्तें तय करने और विवाद के निपटारे के लिए एसडीएम स्तर के अधिकारी या उसके द्वारा नियुक्त और आर्बिटेशन कमेटी को अधिकृत किया गया है
इस बिल के नियम के अनुसार यदि कोई मामला, विवाद अपीलीय प्राधिकरण और राज्य स्तर पर नहीं निपटता है तो केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव के स्तर पर इसे सुलझाया जा सकता है
और तीसरा बिल है मूल्य आश्वासन पर किसान बंदोबस्ती और सुरक्षा समझौता और कृषि सेवा विधेयक 2020
इस बिल को संसद के दोनों सदनों से पारित कर दिया गया है, इसके तहत कंपनियों के किसानों के साथ कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और कंपनियों या दूसरे संस्थानों के कृषि उत्पादन से जुड़ी सेवाओं के संचालन के प्रावधान किए गए हैं , इसमें लैंड लीजिंग मतलब भूमि को किराये पर लेना का भी प्रावधान है, जिसकी अवधि एक फसल सीजन से लेकर 5 साल तक हो सकती है, विधेयक के तहत पहले से निर्धारित कीमत और गुणवत्ता मानकों के आधार पर फसल खरीद का कॉन्ट्रैक्ट हो सकता है, इसी तरह किसानों को सेवा देने का कॉन्ट्रेक्ट हो सकता है,जिसमें बीज खाद पेस्टिसाइड की बिक्री से लेकर कृषि से जुड़ी तमाम तरह की सेवाएं शामिल हो सकती हैं
इस बिल के तहत प्रसंस्करण करने वाली कंपनियां या सहकारी संस्थाएं किसानों के साथ कॉन्ट्रैक्ट कर सकते हैं
नरेश सोलंकी
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