For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 101960139
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: अजमेर डेयरी अध्यक्ष श्री रामचन्द्र चौधरी को इण्डियन डेयरी एसोसिएशन फैलोशिप अवार्ड मिलने पर सम्मान के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया गया । |  Ajmer Breaking News: रसद विभाग द्वारा घरेलू एलपीजी सिलेण्डरों के अवैध उपयोग की सूचना पर श्रीनगर  क्षेत्र में घरेलू गैस सिलेण्डरों की धरपकड़ का अभियान चलाया गया। |  Ajmer Breaking News: जिला स्तरीय एनसीओआरडी समिति की बैठक आयोजित |  Ajmer Breaking News: भूमि संसाधन विभाग भारत सरकार के संयुक्त सचिव श्री कुणाल सत्यार्थी ने गुरूवार को विभिन्न स्थानों का निरीक्षण कर सर्वे रिसर्वे के संबंध में जानकारी ली। |  Ajmer Breaking News: पुष्कर में श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन, भक्तिभाव में डूबी पवित्र नगरी |  Ajmer Breaking News: भैरव धाम राजगढ़ पर श्रद्धा और उल्लास के साथ भरा छठ मेला |  Ajmer Breaking News: सोशल मीडिया पर फेक अकाउंट बनाकर भावना भड़काने और अभद्र कमेंट और पोस्ट डालने वाले के विरुद्ध कार्रवाई की मांग, |  Ajmer Breaking News: भारत सरकार द्वारा पारित वित्त विधेयक 2025 के भाग 4 में पेंशन संशोधित कानून के विरोध मे पेशनर्स एसोसिएशन राजस्थान के कर्मचारियों ने किया विरोध प्रदर्शन, |  Ajmer Breaking News: जिला कलक्टर श्री लोक बन्धु ने परिपक्व हुई राज्य बीमा पॉलिसी का किया पेमेंट इनिशिएट |  Ajmer Breaking News: ब्यावर में गैस रिसाव की दुखान्तिका, मंत्री श्री अविनाश गहलोत ने घायलों की जानी कुशलक्षेम | 
madhukarkhin

#मधुकर कहिन: मुन्नी बदनाम हुई .... डार्लिंग तेरे लिए

Post Views 931

August 11, 2020

#मधुकर कहिन 
मुन्नी बदनाम हुई .... डार्लिंग तेरे लिए 
 सचिन तो लौट आये लेकिन उनके पीछे उनके बदनाम समर्थकों का अब क्या होगा 


✒️ नरेश राघानी 

 राजनीत में जो होता है आज होता है ... कोई कल नहीं होता 
 सामने जो कुछ दिखाई देता है उसका ... धरातल नहीं होता 

 आखिर जादूगर की जीत हुई। भाई  नेता हो तो अशोक गहलोत जैसा हो वरना ना हो । ठीक उसी तरह जिस तरह से मूछें हो तो नत्थू लाल जैसी हो वरना ना हो । 

 राजस्थान में कांग्रेस के इस संघर्ष ने यह साबित कर दिया की पूरी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में कोई वाकई चाणक्य है और राजनीतिक समझ रखता है , तो वह अशोक गहलोत ही है। गहलोत ने सिद्ध कर दिया कि वह जादूगर है। फिर जिस व्यक्ति पर कांग्रेस इतना भरोसा करती हो कि दूसरे प्रदेशों में राजनैतिक रोगों का इलाज करने के लिए भी गहलोत को ही भेजा जाता रहा है । तो ऐसा नेता अपने ही स्टेट में ऐसी दुर्घटना भला कैसे हो जाने देता बातें चाहे कुछ भी कर लो लेकिन यह निश्चित तौर पर जादूगर की जीत है। 

 सचिन पायलट और उनकी पूरी टीम को शुरू से ही अधपका और अध कच्चा खाने की आदत है। लेकिन हमेशा ही जल्दी में रहे पायलट को शायद अब समझ आ जाये कि राजनीति में इतनी जल्दबाजी और हर किसी पर इतना भरोसा अच्छा नहीं होता। 
 लेकिन चलो ... अच्छा है  की असफल तख्तापलट का यह अनुभव भी पायलट को उम्र के हिसाब से जल्दी मिल गया। यह अनुभव आगे काम ही आएगा । 

 यह घटनाक्रम अशोक गहलोत और कांग्रेस आलाकमान के लिए भी सबक है। और वह सबक यह है कि लोगों को इतनी जल्दी सर पर मत बिठाइए। युवा युवा के चक्कर में राहुल गांधी और सचिन पायलट जैसे अपिरपक्व और जल्दबाज नेताओं को सीधा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब मत दिखाइए। मुझे कांग्रेस के एक सीनियर नेता ऑस्कर फर्नांडिस की एक लाइन आज भी याद है। वह कहते थे पहले योग्यता हासिल करो फिर कोई उम्मीद पालो।
 फर्स्ट डिज़र्व एंड देन डिमांड । लेकिन यह बात शायद पायलट जैसे युवाओं को अब समझ आ जाये।

 कांग्रेस युवाओं को मौका देने के चक्कर में पूरे देश भर में इस जल्दबाजी सिंड्रोम का शिकार हो रही है। क्योंकि आला नेताओं में न तो समझ है वक़्त की नजाकत भापनें की , न ही सोच है कि इन नए पनपते युवाओं का आखिर करना क्या है   शीर्ष नेतृत्व की इस अयोग्यता का लाभ सीधा सीधा भाजपा को पिछले 10 साल से मिल रहा है। 
ऐसा नहीं है कि भाजपा में युवाओं को मौका नहीं दिया जा रहा है। वहां पर भी युवाओं को मौका दिया जाता है लेकिन उचित स्तर तक परिपक्वता हासिल करने के बाद और योग्यता देख कर। कांग्रेस की तरह बस चमचागिरी और परिवारवाद के आधार पर नही जहाँ इन युवा नेताओं की ज़िद के पीछे हर तरफ तख्तापलट की बाढ़ आ गई है। जिस प्रदेश में उठा कर देखिए जैसे  वरिष्ठ नेताओं को निपटाने का आंदोलन सा चल रहा है। और इस आंदोलन को राहुल गांधी की यूथ गैंग का समर्थन हासिल है। ये लोग यह नहीं देखते की कल का आया हुआ आदमी कितना परिपक्व है। बस यदि युवा है और उनका चमचा है तो ठीक है। इस रोज़ रोज़ की बंदर उछाल से इस देश में सेकुलरिज्म का झंडा कमज़ोर हाथों में आ गया है। जिन हाथों की न तो पकड़ मजबूत है , न ही दूरदर्शी समझ। 

 जिस तरफ देखिए बस चिकने चेहरे , अंग्रेज़ी बोली और इंग्लिश ब्रांड की कोटियाँ पहने हुए ओवर पॉलिश्ड लोग नेता बने फिर रहे हैं। जिनको लगता है अंग्रेजी बोलना और खूबसूरत दिखना ही सब कुछ है। इससे यह लोगों को आकर्षित तो बहुत जल्दी कर लेते है। लेकिन जब उनके कमजोर कंधों पर कोई जिम्मेदारी या  उम्मीद रखी जाती है । तो उनके समर्थकों को मूँह की खानी पड़ती है। बिल्कुल ऐसा ही कुछ हुआ है सचिन पायलट के समर्थकों के साथ। पूरे प्रदेश भर में पायलट की जिद के पीछे पायलट की खुद की कुर्सी तो गई ।  जो अपने समर्थकों को ही मुसीबत में डाल दे ऐसा नेता किस काम का 
               क्या ऐसी गैर जिम्मेदाराना सोच लेकर पायलट जैसे युवा लोग मुख्यमंत्री बनने का सपना देखते हैं  फिर यदि मुख्यमंत्री बन भी जाते तो क्या जनता की उम्मीदों को भी ऐसा पलीता लगाते 

 सुना है समझौते के दौरान भी पायलट ने अपनी बात रखते हुए यह कहा कि - मुझे मुख्यमंत्री पद की लालसा नहीं है परंतु अशोक गहलोत का नेतृत्व ठीक नहीं है। जिस पर आलाकमान ने साफ-साफ कह दिया कि - राजस्थान में फिलहाल तो नेतृत्व नहीं बदलेगा। इसके अलावा अन्य शर्तें जो रखी गई ,उन पर विचार करके निकट भविष्य में कुछ परवर्तन करने का आश्वासन दिया गया है। 

 खैर  पिछले लगभग 1 महीने से हो रहे इस तमाशे को देखकर तो यही लगता है कि - यदि पायलट को यही करना था तो यह सब तो वह एक महीना पहले भी दिल्ली में बंद कमरे मे बैठकर कर सकते थे । फिर प्रदेश की जनता को ऐसी गंभीर करोना महामारी के दौरान सरकार की अस्थिरता देकर उन्हें क्या हासिल हो गया  कुछ भी हासिल हुआ हो लेकिन उसकी गंभीर कीमत तो राजस्थान की जनता ने अपनी जान से चुकाई है। सो यह जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर है। 

 इस 1 महीने ने पायलट को जितना राजनीति में सिखाया है। उतना शायद अपने पूरे राजनीतिक जीवन में पायलट ने नहीं सीखा होगा । अभी भी वक्त है ... कम उम्र में इतना तजुर्बा हासिल करने के बाद भी यदि वह इस अनुभव का लोकहित में  सही इस्तेमाल करेंगे तो बेहतर होगा। बाकी पार्टी में तो वह लौट कर आ ही गए हैं। 

 जय श्री कृष्ण 

 नरेश राघानी 
 प्रधान संपादक 
www.horizonhind.com
9829070307


© Copyright Horizonhind 2025. All rights reserved