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August 3, 2020
#मधुकर कहिन - रक्षा सूत्र विशेष
रक्षा सूत्र तो रक्षा सूत्र है , कोई भी किसी को भी बांध सकता है
नरेश राघानी
आज रक्षाबंधन का त्यौहार है । यह त्यौहार वैसे तो भाई और बहन के रिश्ते से बंधा है। जिसका सीधा सीधा संबंध रक्षासूत्र से है। जिसके तहत रक्षा की उम्मीद और रक्षा करने के वचन की प्रसंगिकता है। यदि यह रक्षा सूत्र है ... और इसका संबंध रक्षा की उम्मीद से है । तो फिर यह सूत्र कोई भी रक्षा अभिलाषी किसी को भी रक्षा की उम्मीद से बांध सकता है।
जैसे ...
सबसे पहले अपनी कहता हूँ। मैं कई सालों से जयपुर रोड स्थित भैरव धाम मंदिर में भैरू जी की मूर्ति को राखी बांधता हूं। इस उम्मीद के साथ कि कलयुग में अगर कभी कोई मुसीबत आन पड़े तो भैरू जी मेरी रक्षा करें।
ऐसे ही कुछ अन्य सजीव उदाहरणों पर बात करें ...
अजमेर की बात करें तो दक्षिण विधायक अनीता भदेल उत्तर के विधायक वासुदेव देवनानी को राखी बांध सकती है । और सुनिश्चित कर सकती हैं कि उनका आने वाला राजनीतिक परिदृश्य सुरक्षित रहे और देवनानी उनकी राजनीतिक संकटों से रक्षा करें।
इसके अलावा ऐसा रक्षासूत्र भाटी बंधुओं में से छोटे भाई चाहे तो अपने बड़े को बाँध सकते हैं। क्योंकि राजनैतिक जीवन में पायलट त्रासदी के पश्चात उन्हें बहुत अकेला और असुरक्षित महसूस हो रहा होगा। ऐसे में अपने बड़े भाई की याद आये यह लाजमी है।
किशनगढ़ के सुरेश टाक अब तक शायद यह निर्णय नहीं कर पाए हैं कि आखिर राखी बांधनी किसको है भाजपा के वो हैं नहीं , और कांग्रेस के साथ नहीं। बचे पायलट उनका तो खुद ही अब तक कोई ठिकाना नहीं।
मसूदा के राकेश पारीक तो सालों से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के खूंटे को ही राखी बांध रहे थे। फिर जब पायलट को बांधी तो उनके दिन फिर गए। लेकिन अब वह वापस लौट कर यदि गहलोत को राखी बांधने भी चाहेंगें तो शायद उनकी दाल न गले।
भाजपा के भीतर व्याप्त युवाओं की फौज चाहे तो अपने बड़े भाई भंवर सिंह पलाड़ा को राखी बाँध सकती है। जो कि अपने सभी अनुजों को रक्षा का वचन देकर बखूबी निभाने में सक्षम हैं।
बात शहर भर के कांग्रेसियों की , तो पायलट त्रासदी के बाद शहर भर के भटकते हुए कांग्रेसी चाहें तो डॉ बाहेती को राखी बांध सकते हैं। क्योंकि जब तक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत है, तब तक डॉ बाहेती हैं । ऐसे में शहर भर के कांग्रेसियों की राजनैतिक नैया का एक ही खेवन हार है। जिसके हाथों में रहकर सब के राजनीतिक हितों की रक्षा हो सकती है।
लेकिन यदि कोई कांग्रेसी वाकई अपना भविष्य सुरक्षित रखना चाहता है और दिल्ली तक राज करना चाहता है तो उसे समझदारी से राजा बॉस अर्थात डॉ जयपाल को रक्षासूत्र बांध कर भाई बनाना चाहिए। ताकि राजा बॉस के राज में उनका राज कायम रहे।
फिर राजस्थान की कॉन्ग्रेस और मुख्य मंत्री अशोक गहलोत चाहे तो रक्षा सूत्र सचिन पायलट और अपने विधायक भाइयों की कलाई पर भी बांध सकते है।और उम्मीद कर सकते हैं कि उनके सभी विधायक रूपी छोटे भाई और सचिन पायलट राजनीतिक संकटों से उनकी रक्षा करें।
और आखिर में बची जनता जनता चाहे तो उन चिकित्सकों,नर्सिंग कर्मियों , प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस कर्मियों को राखी बांध सकती है जो करोना काल में अपनी जान दाव पर लगा कर सबके स्वास्थ्य की रक्षा कर रहे हैं।
एक बार फिर तहे दिल से मधुकर कहिन के पाठकों को रक्षा बंधन के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।
जय श्री कृष्ण
नरेश राघानी
प्रधान संपादक
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