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August 2, 2020
#मधुकर कहिन - फ्रेंडशिप डे विशेष ,
तेरे जैसा यार कहाँ
सत्ता अगर चली तो चली गई ... चली गई तो स्वीकार करो
सत्ता का खेल अजीब और अभूतपूर्व
कभी हम भूतपूर्व तो कभी तुम भूतपूर्व
नरेश राघानी
यह शब्द थे स्वर्गीय अमर सिंह के । 27 जनवरी 1956 में जन्में अमर सिंह जो भारत के राजनैतिक इतिहास के एक कालखंड में राजनीति के चाणक्य माने जाते थे। वह अमर सिंह जिनका फिल्मी सितारों और राजनेताओं से बहुत गरीबी राब्ता रहा। अमर सिंह जो सिर्फ अपने दोस्तों की वजह से थे और उनके दोस्त उनकी वजह से। अमर सिंह जैसे लोग बहुत कम हुए हैं। आज अमर सिंह हमारे बीच में नहीं है , लेकिन अमर सिंह जैसे कूटनीतिक और राजनीतिक कौशल और राजनैतिक समझ वाला व्यक्ति शायद फिर कभी नहीं आएगा। जिसके साथ रहे उसके साथ रहे। और जब तक साथ रहे तब तक अपने उस मित्र की भुजा बने रहे । और वह बुझा तब तक नहीं कटती जब तक उस मित्र ने खुद ना काट दी हो। यह चरित्र था आमर सिंह का । राजनीति में अक्सर ऐसे लोग बहुत लंबा नहीं टिक पाते हैं। वही अमर सिंह के साथ हुआ। परंतु फिर भी अमर सिंह ने अपने रिश्ता निभाने की कुब्बत के चलते बड़े से बड़े राजनेता और अभिनेता कि जिंदगी में अपनी अलग जगह बनाई । चाहे वो अमिताभ बच्चन या फिर मुलायम सिंह यादव । जयाप्रदा हो या कोई भी अन्य करीबी दोस्त। जो भी उनके साथ खड़ा हुआ, उसने अमर सिंह के साथ होने की ताकत महसूस की , और अमर सिंह के चले जाने के बाद उस ताकत की कमी भी।
1996 में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह ने उन्हें समाजवादी पार्टी का सदस्य बनाया। उसके बाद मुलायम सिंह ने भी अमर सिंह की दोस्ती की वह ताकत महसूस की। जब अमर सिंह की मित्रता महानायक अमिताभ बच्चन के परिवार से हुई, तब अमर सिंह ने दोस्ती की मिसाल कायम कर दी। जब बच्चन परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था और अमिताभ बच्चन की कंपनी एबीसीएल दिवालिया होने के कगार पर आई तब , अमर सिंह ने अपने मित्र मुलायम सिंह की मदद से बच्चन परिवार को इस आर्थिक संकट से उबारा। वहीं कुछ समय बाद जब समाजवादी पार्टी के भीतर चले अंतर्द्वंद के परिणाम स्वरूप अमर सिंह को सपा से निकाल दिया गया। तब बच्चन परिवार ने भी अमर सिंह का साथ छोड़ दिया। 2004 तक अमर सिंह दिल्ली में मजबूत पकड़ बना चुके थे। और 2008 में देश के केंद्र में बनी यूपीए सरकार सिविल न्यूक्लियर डील के चलते संकट में फंस गई थी। उस राजनैतिक संकट में भी अमर सिंह ने संकटमोचन की भूमिका निभाई और यूपीए की सरकार गिरने से बचाई थी।
कुछ समय बाद 2016 में अमर सिंह की सपा में वापसी हुई । परंतु तब तक समाजवादी पार्टी की कमान लगभग पूरी तरह मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश यादव के हाथ में आ चुकी थी। अपने ही पुराने मित्र के बेटे के साथ अमर सिंह की नई बनी। इसी वजह से 2017 में उन्हें फिर सपा से निकाला गया। इसी तरह के गंभीर उतार चढ़ाव देखते हुए अमर सिंह ने अपनी जिंदगी की पारी खेली । और 2020 में पूरी तरह से अस्वस्थ होने की वजह से जब वह अस्पताल में भर्ती थे। तब पुराने मित्र अमिताभ बच्चन नेअमर सिंह के पिता की पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया। जिस पर अमर सिंह ने एक बार फिर दोस्ती में कुछ भी कर गुजरने के जज्बे को दिखाते हुए , सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो बनाया। और बच्चन से माफी मांगी। और कहा - जब अमिताभ बच्चन ने आज मेरे पिताश्री को याद किया है तो मैं भी यह स्वीकार करता हूं कि रिश्ते बिगड़ते वक़्त मैंने भी ज्यादा कटुता दिखा दी । जिसके लिए मैं उनसे क्षमा माँगता हूँ।
ऐसा संवेदनशील और दोस्ती के जज्बे को जीवन मानने वाले अमर सिंह ... आज फ्रेंडशिप डे पर वाकई याद करने योग्य है। ईश्वर उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें। और हम सबको अमर सिंह जैसी दोस्ती निभाने की शक्ति और सद्बुद्धि प्रदान करें।
जय श्री कृष्ण
नरेश राघानी
प्रधान संपादक
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