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#मधुकर कहिन: अजमेर के टोपी बाज भूमाफिया कॅरोना की आड़ में पहना रहे हैं नगर निगम को टोपी

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July 12, 2020

प्रशासन की अनदेखी खड़े कर रही है गंभीर सवाल

#मधुकर कहिन
अजमेर के टोपी बाज भूमाफिया कॅरोना की आड़ में पहना रहे हैं नगर निगम को टोपी
प्रशासन की अनदेखी खड़े कर रही है गंभीर सवाल...

✒️ नरेश राघानी

जब से लोकडाउन हुआ है, अजमेर के टोपीबाज भूमाफियाओं के हौसले बुलंदी पर हैं। जैसे ही अनलॉक हुआ वैसे ही टोपीबाज भूमाफिया भी अनलॉक हो गए। शहर का कोई कोना ऐसा नहीं बचा है जहाँ अवैध कब्जा न हो रहा हो। लोग कॅरोना की मार से त्रस्त और भूमाफिया निगम को टोपी पहनने में मस्त है। फिर उस पर यह उच्च अधिकारियों की जो ट्रांसफर लिस्ट आई है , वह सोने पर सुहागा का काम कर रही है । नए आए हुए नगर निगम आयुक्त को पुराने क्रियाकलापों का होश नहीं , और इन टोपी बाजों पर लगाम लगाने का किसी में जोश नहीं। निगम आयुक्त की सुस्ती का फायदा सीधा-सीधा भू माफियाओं को मिल रहा है।

यह बातें बिल्कुल भी मनगढ़ंत नहीं है। आइए आपको एक-एक करके शहर में हो रही ऐसी लॉकडाउन लीला का टेलीकास्ट सुनाता हूँ।
उदाहरण एक - नया बाजार चौपड़ का चेहरा बिगाड़ता हुआ एक ठेले नुमा , मुंह बाए खड़ा नया प्रतिष्ठान, इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। नया बाजार चौपड़ के एक कोने पर किसी जमाने में एक पान की दुकान हुआ करती थी उसके बाद उसमें चाय बिकने लगी । चाय की दुकान मैं बैठा चाय बेचने वाला सालों तक नया बाजार की चाय की प्यास बुझाता रहा । गत 22 तारीख को उस चाय वाले का निधन हो गया , और निधन के कुछ समय पहले ही भू माफियाओं ने उससे वह छोटी से दुकान का कब्जा ले लिया । अब चाय तो बहुत थोड़ी जगह में बैठकर बनाई जा सकती थी। लेकिन जिसने यह कब्जा लिया उसका ख्वाब तीन मंजिला शोरूम बनाने का था। जो कि बिना नगर निगम से नक्शा पास कराए धड़ल्ले से बनना जारी है। नया बाजार चौपड़ पर बीचो बीच खड़े होकर बड़े आराम से उस शोरूम की स्थिति देखी जा सकती है । जो कि अन्य दुकानों से कम से कम 8 से 10 फुट बाहर है। और नया बाजार चौपड़ के सौंदर्य की बारह बजा रहा है। कहने वाले कहते हैं कि यह शोरूम बनाने वाला बहुत ही प्रभावशाली व्यक्ति है। जिसके तार सीधे राजस्थान सरकार के वरिष्ठ मंत्री शांति धारीवाल से जुड़े हैं। अब शांति धारीवाल के दबदबे के नीचे जब पूरा प्रदेश ही दब जाता है तो ,एक नगर निगम आयुक्त की औकात ही क्या है,  वहां एक दुकानदार के मूँह से जब यह बात सुनी तो बहुत शर्म आई। यह सोच कर कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान जैसे वीर की धरती पर न अधिकारियों में दम है , न नेताओं में। और बाकी बचे को कुछ लोगों का दम धनाढ्य भू माफियाओं ने अपने धन के नीचे घुट गया है। इन सबके बीच सबसे ज्यादा नुकसान अगर किसी को हो रहा है तो वह है नया बाजार चौपड़ को। जो कि इस ठेले नुमा बाहर निकले हुए अतिक्रमित प्रतिष्ठान की वजह से बदसूरत बन गया है । अपने यह समझ में नहीं आता कि नगर निगम के कर्मचारियों ने क्यूँ आंखें मूंद रखी है । या फिर उनके पास आंखें हैं ही नहीं। उस पर धन का चश्मा चढ़ा हुआ नजर आता है। जिसकी वजह से वह आंखें बंद करके शहर के सौंदर्यीकरण की बैंड बजते हुए खामोशी से देख रहे हैं ।

दूसरा बड़ा उदाहरण है शास्त्री नगर लोहागल रोड पर स्थित सिविल लाइन्स तिराहे के पास एक गजब के अतिक्रमण का। जी हाँ !!! यह एक ग़ज़ब का और अभूतपूर्व अतिक्रमण इसलिए कहा जा सकता है , क्योंकि यह नाले की जमीन ढककर नहीं , बल्कि नाले के अंदर नींव खड़ी करके खड़ा की जा रही एक इमारत है । वैसे ही बरसात के मौसम में पूरे अजमेर में पानी की निकासी की वजह से आनासागर सड़क पर आ जाता है । ऐसे अजमेर में पानी की प्रभावशाली निकासी करने वाले नालों की किस तरह से सत्यानाश की जा रही है .... यह साक्षात रुप से वहां खड़े होकर देखा जा सकता है । यह भवन अपने आप में एक रिकॉर्ड कायम कर रहा है। क्योंकि आज तक नाले के ऊपर पट्टियाँ डालकर अतिक्रमण बहुत देखे गया हैं । नाले के किनारों पर बनाए हुए अतिक्रमण भी देखे गए हैं । ऐसे में पहली बार नाले के अंदर नीव खड़ी करने का कीर्तिमान स्थापित किया जा रहा है। सामने चाय की दुकान पर बैठे लोग अक्सर इस बारे में बातचीत करते हुए दिखाई देते हैं कि - नाले के अंदर कोई बिल्डिंग कैसे खड़ी की जा सकती है.,जब कि जिला कलेक्टर और संभागीय आयुक्त के रोज़ आने जाने का रास्ता भी वही है। अब शास्त्री नगर शहर से इतना भी दूर नहीं है कि जिस पर आते जाते इन उच्च राजकीय अधिकारियों की नजर न पड़ी हो । परंतु फिर वही ... जब अंधा प्रशासन हो तो उस नगर के नगर वासी भी जानबूझकर अंधे हो जाने के लिए बाध्य है। आम नागरिक तो बेचारा रोजी-रोटी और करोना के संकट से ही नहीं उभर पा रहा है । वहीं पर जमीनों की साइंस के बड़े-बड़े साइंस दान शिद्दत से नगर निगम को टोपी पहनाते हुए नजर आ रहे हैं। ऐसे टोपी बाजो से भरा हुआ अजमेर शहर अपने सौंदर्य के साथ होते हुए बलात्कार को देखने के लिए मजबूर है ।
लेकिन ... अपन मजबूर बिल्कुल नहीं है। अपन बिल्कुल मजबूत है, और ठोक के अपनी बात कहते हैं और लिखते हैं।
इस ब्लॉग के साथ इन दोनों आदर्श अतिक्रमणों की फ़ोटो भी आपके अवलोकनार्थ पोस्ट कर रहा हूँ। ज़रूर देखें , और खुद निर्णय करें कि यह सही है क्या 

किसी को भी मेरे इस लेख पर आपत्ति हो तो कृपया मेरे ऑफिस पर जरूर पधारें चाय की चुस्कियों के साथ ☺️नियमों की अनदेखी के सारे सबूत टेबल पर रख दूंगा । और अगर यह लेख पढ़कर किसी अधिकारी का जमीर जाग जाए तो उसका स्वागत है। इस तरह के अतिक्रमण ऐसे जमीर वाले अधिकारियों के लिए अपना सामर्थ्य साबित करने के मौके जैसे हैं। जो कि अजमेर के इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करवा सकता है। इससे आम जनता में यह विश्वास बना रहेगा कि सरकार नाम की भी कोई चीज होती है दुनियाँ में।

यह तो है सीधी और सटीक बात । अब टेढ़ी-मेढ़ी बातों के लिए तो मैदान खुला है। जाओ जिसको जैसी बात करनी है। अपन ने तो अपनी बात कह दी।

जय श्री कृष्ण

नरेश राघानी
प्रधान संपादक
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