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July 6, 2020
# मधुकर कहिन
इतने कोरोना पॉजिटिव मरीज नहीं है अजमेर में जितने लोग खुद को कॅरोना योद्धा घोषित कर घूम रहे हैं
✒️ नरेश राघानी
जब से कोरोना लोगों की जिंदगी में आया है, उसने बहुत कुछ बदल दिया है । रहने का ढंग, मिलने का ढंग, खाने पीने का ढंग ,घूमने फिरने का ढंग, रिश्ते निभाने का ढंग और नेतागिरी करने का ढंग भी। भाई !! नेतागिरी कैसे भूल जाएंगे ?? नेतागिरी में जो बड़ा बदलाव आया है,वह यह है कि नेतागिरी करने वाले लोग , सिर्फ बुरी तरह ही नहीं बल्कि गंभीर हदों तक, सम्मानित होने के रोग से पीड़ित हो चुके हैं।
जिसको घर में कोई नहीं पूछता , वह घर के बाहर खड़ा हो जाता है और कूद कूद कर सोशल मीडिया पर खुद को कॅरोना सेवक घिषित करने में जुट जाता है। ताकि समाजसेवी संगठनों और लोगों की नजर में आ जाए और कोई ना कोई उनको पकड़ कर कोरोना वारियर अथवा कॅरोना योद्धा का सम्मान प्रदान कर दे।
यह बीमारी दरअसल अजमेर में एचडीएफसी बैंक ने शुरू की । अब एचडीएफसी बैंक तो बैंक ठहरा। उसने अपने ग्राहकों को खुश करने के लिए उनकी अकाउंट की तस्वीरें लगा लगा कर सबको कॅरोना योद्धा घोषित कर दिया। जिसे देखकर ही आईडिया बाकी लोगों के मन में भी आ गया।
हमारे अखबार होराइजन हिंद ने भी इस तकनीक को लोगों से जुड़ने का नजरिया मान कर लोगों को सम्मानित करना शुरू किया । परंतु होराइजन हिंद की सिलेक्शन टीम ने इस पर गंभीर रूप से मेहनत की है। और लगभग हर सम्मानित होने वाले की कहानी सुनकर उसकी ढंग से पड़ताल की है। 300 से ज्यादा लोगों में से मुश्किल से 20 लोगों को ही सम्मानित किया है ।
लेकिन जिस तरह से यह रोग इन दिनों आम समाजसेवी संगठनों में व्याप्त हो गया है। उसे देखकर लगता है कि हर चौथा आदमी एसपी , कलेक्टर अथवा चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से नजदीकी बढ़ाने हेतु इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। बहुत बड़ा समाजसेवक वर्ग तो जो हाथ में आ जाए उसी को कॅरोना योद्धा का तमगा पहना रहा है । कई तथाकथित समाजसेवी संगठनों ने तो इसे प्रशासनिक अधिकारियों की खुशामद का हथियार बना लिया है ।
अब !!! समाजसेवी संगठनों ने ऐसा करना शुरू कर दिया तो .... राजनीतिक दल भला पीछे कैसे हट सकते थे ? कुछ दिन पहले कांग्रेसी भी अपने दल बल के साथ पहुंच गई जेएलएन अस्पताल और वहॉं काम कर रहे हैं कुछ स्वास्थ्य कर्मियों का सम्मान करने लगे। जैसे कि बाकी अनगिनत कर्तव्यनिष्ठ सेवाकर्मी जो कि कांग्रेसियों की गिनती में नहीं आ पाए और सम्मानित नहीं हो पाए ... वह तो वहाँ पर भुट्टे ही भून रहे थे शायद ...
आखिर कांग्रेस होती कौन हैं ??? यह निर्धारण करने वाले की कौन सेवा कर रहा है या कौन नहीं कर रहा है। क्यूँ किसी भी कांग्रेसी को वहां मौजूद वार्ड बॉय सफाई कर्मचारी और छोटे लोग नहीं दिखाई दिए ?? जो वाकई अपनी जान पर खेलकर करोना संक्रमित मरीजों का मल मूत्र साफ करते हैं । या फिर उनके कपड़े बदल में मदद करते हैं। खुद के बच्चों से दूर रहकर अपना घर बार छोड़कर सारा दिन कोविड-19 संक्रमित वार्ड में रहते हैं।
मात्र वहाँ मौजूद बड़े चिकित्सकों और सीएमएचओ कार्यालय के कर्मचारियों का सम्मान कर देना क्या उन सच्चे सेवकों के अपमान नहीं था ? उन करोना योद्धाओं की भीड़ में यदि आप गौर फरमाएंगे। तो बड़े गिनती के लोग ऐसे हैं जो वाकई इस सम्मान के योग्य है।
खैर !! अब तो इस सम्मानित होने के संक्रमण का यह हाल हो गया है कि , यदि आप सारे संगठनो और सारे राजनीतिक पार्टियों द्वारा सम्मानित होने वाले लोगों की सूची बनाएंगे। तो वह सूची 2000 के पार जाएगी । जबकि अजमेर में 500 के आसपास ही कोरोना पॉजिटिव केस है, जो अब तक सामने आए हैं। सीधा सीधा मतलब यह हुआ कि - अजमेर में इतने कॅरोना संक्रमित मरीज सामने नहीं आये है, जितने कॅरोना योद्धा तमगा लगाए घूम रहे हैं ।
कुछ तथाकथित कॅरोना योद्धा तो ऐसे भी हैं , जिन्हें आपको स्पष्ट रूप से मैं दिखा सकता हूं खुद ही सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते हुए। छोटे-मोटे राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने तो जैसे अपने जीवन का मिशन ही यह सम्मान पाना बना रखा है।
अपुन के तो यह समझ नहीं आता कि - यह सम्मान संक्रमित लोग पता नहीं किस से कौन सा युद्ध लड़ रहे हैं ??? शायद उनको खुद को भी मालूम नहीं होगा।
लेकिन नहीं साहब !!! कॅरोना योद्धा घोषित होने के बाद ऐसे लोग अपने सीने की चौड़ाई में जो वृद्धि महसूस करते हैं ...
वह चौड़ाई बिल्कुल इन सम्मान पशुओं को -
हम चौड़े बाज़ार संकरे वाली फीलिंग का अनुभव करवाती होगी।
यदि यह सब इसी तरह चलता रहा तो ,वह दिन दूर नहीं है, कि लोग अपनी गाड़ी की नंबर प्लेट पर जिस तरह से पूर्व विधायक या पूर्व सांसद का तमगा लगाकर घूमते हैं ,और भी कई राजनीतिक पदों के तमगे लिखवा कर रोब झड़ते फिरते हैं। बिल्कुल उसी तर्ज पर आने वाले समय में लोग अपनी गाड़ी की प्लेट पर पूर्व कॅरोना योद्धा लगाकर घूमेंगे।
जय श्री कृष्ण
नरेश राघानी
प्रधान संपादक
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