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#मधुकर कहिन: तुम कितने सिंधिया रोकोगे ? घर घर से सिंधिया निकलेगा .. 

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March 11, 2020

#मधुकर कहिन

 *तुम कितने सिंधिया रोकोगे ?*

*घर घर से सिंधिया निकलेगा ..* 


     ️ *नरेश राघानी* 


18 साल अपना अमूल्य जीवन लगा देने के बाद , *पैतृक पृष्ठभूमि से ग्वालियर राजपरिवार के दिवंगत महाराज माधवराव सिंधिया के पुत्र , ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आखिरकार कांग्रेस का मोह छोड़ ही दिया।*


 यह पल वाकई *कांग्रेस हेतु आत्म विश्लेषण के पल है।* कांग्रेस को अब तो यह सोचना ही होगा कि - *आखिर कब तक एक ही परिवार के सहारे , सैकड़ों कार्यकर्ताओं की भावनाओं और योग्यताओं को ताक पर रखकर कांग्रेस जिंदा रह पाएगी ?* 


कांग्रेस दरअसल अब पहले जैसी रही ही नहीं है। परिवारवाद के गंभीर डंक वश असंतुष्टी की शिकार कांग्रेस अब अपने लक्ष्य से भटक गयी है। *वैसे भी यह सनातन सत्य है कि अगर किसी संगठन का निर्माण एक विशेष लक्ष्य के लिए किया गया है तो  , वह लक्ष्य पूरा होने के बाद भी यदि व संगठन अपनी गतिविधियां जारी रखता है। तो उसके भीतर सत्ता और अधिकार हेतु छीन झपट शुरू हो जाती है। इस छीनाझपटी में जो कामयाब होते हैं। वह संतुष्ट हो जाते हैं। परंतु जो नाकामयाब होते हैं वह फिर किसी भी हद तक जाते हैं, अधिकार प्राप्ति हेतु। बस यही हाल कांग्रेस का होने जा रहा है।*


 जहाँ गांधी परिवार अपने आप को किसी भी कीमत पर कांग्रेस का  उत्तराधिकारी बनाए रखने में लगा रहता है।  *जब शीर्ष नेतृत्व की सोच ही ऐसी है। तो बाकी जो अनुसरण करने वाले हैं उनसे आप किसी और विचार की उम्मीद कैसे कर सकते हैं ???  दूसरी पीढ़ी के नेता जैसे अशोक गहलोत दिग्विजय सिंह ,कमलनाथ, मुकुल वासनिक इत्यादि इत्यादि भी यह सोचते हैं कि - जब गांधी परिवार ही अपना एकाधिकार नहीं त्याग रहा है, और वर्षों से हमने इस परिवार के एकाधिकार को ढोया है। तो आने वाली पीढ़ी को इतनी आसानी से कैसे जगह दे दे भाई ??? उनको भी थोड़ा बहुत तो संघर्ष करने दो। सो ये लोग भी सत्ता और अधिकार की छीन झपट में लगे हैं।*


  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को शायद यह सब बहुत पहले ही दिखाई देने लगा था। तभी ,आजादी का आंदोलन खत्म होने के बाद ही महात्मा गांधी ने कह दिया था कि - *यह कांग्रेस संगठन अब यहीं समाप्त कर दो। क्योंकि यह जिस लक्ष्य हेतु बनाया गया था वह पूरा हो चुका हैं । परंतु लोगों ने राष्ट्रपिता की बात नहीं मानी। और आज 70 सएआल बाद गांधीजी की बात सत्य साबित होती नजर आ रही है और कांग्रेस खुद खाली होने के कगार पर खड़ी है।* 


परंतु इससे जो सबसे बड़ा नुकसान इस देश को हो रहा है। वह नुकसान यह नहीं है कि कांग्रेस खाली हो रही है। नुकसान यह है कि *सेक्युलरिज़्म की सोच का झंडा गलत हाथों में आकर रह गया है। जिसके परिणाम स्वरुप यह विचार धीरे-धीरे भारतवर्ष में अस्त होता हुआ दिखाई दे रहा है।* 


 *ऐसे तो और पार्टियां भी है, जो सेक्युलरिज्म की सोच रखती हैं । लेकिन विशेष तौर पर कांग्रेस को इसलिए लोगों का प्यार ज्यादा मिलता रहा , क्योंकि कांग्रेस का इतिहास देश को स्वतंत्रता दिलाने से जुड़ा है ।*


 परंतु उसी कांग्रेस का यह हाल देख कर आज अचंभा बिल्कुल नहीं हो रहा है। *क्योंकि यह तो होना ही था !!!  आखिर कब तक लोग अपनी जिंदगियां और जीवन भर कमाई हुई इज्जत एक ऐसी पार्टी के लिए दांव पर लगा कर रखेंगे , जिसके पास एक मजबूत लीडर नहीं है।* 


अभी होली से एक दिन पहले ही कुछ भाजपा से जुड़े मित्र मेरे घर आए। मैंने कहा - *यार !!! इतनी परेशानी है इस मुल्क में ??? मौजूदा केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की वजह से लोग इतने परेशान हैं कि पूछो मत फिर भी आखिर कांग्रेस को कोई वोट देना पसंद क्यों नहीं करता ???* 


वह बोले -  *मधुकर जी !!!!  हम सब जानते हैं कि बहुत परेशानी है। हमें भी लोगों को समझाने में बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र सरकार की नीतियां काफी हद तक समझाइश के लिहाज से जटिल है। लेकिन कम से कम राहुल गांधी स्वीकार नहीं है। जब भाजपा के लोगों तक को यह अहसास है कि माहौल पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में नही है । ऐसे में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व सत्ता का लोभ त्याग कर क्यों कांग्रेस की युवा ऊर्जा को ठिकाने लगाने पर तुला है ??* जिसमें वाकई शक्ति है कि कांग्रेस की डगमगाती नैया को पार लगा सकती है। 


 ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ना की वजह से जो नुकसान कांग्रेस को हुआ है, या जो नुकसान आगे और भी होने जा रहा है , *यह पतन का मात्र पहला चरण है।  यदि कांग्रेस अपने काम करने के तरीके में और अपनी सोच में अब कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं लाती है , तो वह ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे कई और युवा सिंधियाओं का सामना करने हेतु तैयारी कर ले। क्योंकि यदि सही वक्त पर सही हाथों में ताकत नहीं दी जाएगी तो ताक़त खुद अपना रास्ता बना लेगी। क्योंकि ताक़त अपनी जगह अवश्य बनाती है । किसी के भी रोकने से कुछ नहीं होता ....*


 *और हां !!! किसी से छुपा नहीं है की मधुकर पत्रकारिता करने से पहले क्या करता था ???  सो यह बात एक मर चुके कांग्रेस कार्यकर्ता की हैसियत से कहूँगा तो शायद कोई समझ सके ...* 


 *तुम कितने सिंधिया रोकोगे ... घर घर से सिंधिया निकलेगा* 


 *जय श्री कृष्ण* 


नरेश राघानी 

9829070307


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