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March 5, 2020
धुकर कहिन 2229
*धन्य है ऐसी सरकार !!!!*
*और धन्य है ऐसा आधार !!!*
*आधार कार्ड अपडेट करवाना न हुआ कोई जंग हो गयी **** *
️ *नरेश राघानी*
*मुझसे जीवन की सबसे बड़ी भूल हो गई जो मैंने आज अपने घर में यह स्वीकार कर लिया कि मैं आधार कार्ड अपडेट करवा दूंगा ।* ऑफिस में पिछले 3 महीने से ऑनलाइन वेबसाइट पर आधार कार्ड अपडेट करने का प्रयास मेरा स्टाफ *लगभग 20 बार* कर चुका है। बावजूद उसके बार-बार यही मेल आता है अपडेट नहीं हुआ। जानकारी चाहने पर यह मालूम हुआ कि आधार कार्ड अपडेट करने की व्यवस्था राज्य सरकार ने कलेक्ट्रेट पर स्थित *अटल सेवा केंद्र पर कर दी है।* वहां जाने पर मालूम पड़ा कि *कम से कम 200 लोगों की लाइन लगी हुई है । और उस लंबी कतार में लोग पानी पी पीकर सरकार की नीतियों को गालियां दे रहे थे।*
ऐसी जबरदस्त *असंतुष्ट भीड़ जिसके चलते बहुत संभावना है कि कभी भी कोई असंतुष्ट चप्पल भीड़ चीरती हुई आकर कभी भी किसी के भी गाल पर पड़ जाए ।*
ऐसे *जानलेवा माहौल* में बेचारा मात्र एक कंप्यूटर ऑपरेटर वहां अकेला बैठा भीड़ से संघर्ष कर रहा था। मैंने थोड़ा आगे बढ़ कर किसी से पूछा कि - *क्या भाई साहब !!! अखिर यहाँ चल क्या रहा है ???* तो वह बोला - *भाई साहब आधार कार्ड अपडेट करने के लिए पूरे कलेक्ट्रेट में केवल एक कंप्यूटर मौजूद है।* *सुनकर मैं दंग रह गया।*
*अब देखिए !!! है न ये सरकारी जादू ???* *तेरह लाख लोगों की जनसंख्या के आधार अपडेट करने हेतु अजमेर जिले में कलेक्ट्रेट कार्यालय, पर मात्र एक कंप्यूटर और एक आदमी ????*
ऐसे में भीड़ के बीच धक्के खा खाकर आधार अपडेट करवाना *एवरेस्ट की चढ़ाई चढ़ने से कम नहीं है ।*
फिर भी यदि कोई लाइन में 2 घंटे लगने के पश्चात, मुश्किल से उस *दुर्लभ और पूजनीय कंप्यूटर* तक पहुंच भी जाता है ?? और तकनीकी खराबी के आगे मजबूर बेचारा एकलौता कर्मचारी यदि यह कह दे कि - *साहब !!! यह नहीं कोई और डॉक्यूमेंट लगेगा । डॉक्यूमेंट लेकर कल फिर आना।* ऐसे में आम आदमी ज्वालामुखी की तरफ फटेगा नहीं तो क्या करेगा बताओ ????
फिर अंततः यह ज्ञान अर्जित करके घर लौट जाना कि *सरकार ने सभी बैंकों को भी तो यह निर्देश दे रखे हैं, कि आप अपने यहां एक व्यक्ति बिठाइए जो आधार अपडेट करने में सरकार के कामकाज का बोझ शेयर कर ले। मन तो करता है कि सिर फोड़ लिया जाए या तो उस एकलौते कर्मचारी का या फिर खुद का।*
परंतु *बैंकों में भी आलम खराब ही है ।* निजी बैंक जैसे *एचडीएफसी ,आईडीबीआई, आईसीआईसीआई, इन बेचारों को तो लोगों को लूटने से ही फुर्सत नहीं है। ऐसे में सरकारी काम में भागीदारी वह भी सद्भावना से बताओ कैसे संभव है ???*
फिर यदि कोई भूला भटका इन बैंकों में आधार कार्ड अपडेट करवाने पहुंच भी जाता है । तो वहां मौजूद कनिष्ठ लिपिक इतनी बदतमीजी से व्यवहार करता है जैसे कोई *आम आदमी पर अहसान कर रहा हो !!!!* थोड़ी मान मनवार कर भी लो तो भी उसके बाद *₹50 आधार कार्ड अपडेशन की फीस* भी देनी पड़ती है।
*जिसके बाद भी आपका आधार अपडेट होकर आ जाये इनकी कोई गारंटी नहीं है।*
डिजिटाइजेशन की तरफ बढ़ रहे हैं इस *देश की डिजिटल पोल वहां खुल जाती है , जब उस काउंटर पर बैठे हुए एक अबोध बालक को प्रक्रिया का पूरा ज्ञान तक नहीं होता है की आखिर करना क्या है ???*
वहां 12वीं पास लोग भी बिठा दिए गए हैं । जिनको मात्र कंप्यूटर थोड़ा बहुत चलाना आता है। *मजे की बात देखिए !!! एक बैंक अधिकारी से संपर्क करने पर उसने मुझे एक लिंक भेज दिया व्हाट्सएप पर, और कहा कि इस लिंक को क्लिक करके आप अपना आधार अपडेट हेतु अपॉइंटमेंट आराम से बुक करवा लीजिए। जहाँ अपॉइंटमेंट मिल जाये उस स्थान पर जाकर अपनी बायोमेट्रिक पहचान दर्ज करवा कर आधार अपडेट करवा लीजिए।*
*मैं भी बड़ा खुश हुआ कि चलो काम हो गया। अब लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। आराम से काम हो जाएगा। सो मैंने वह लिंक क्लिक करके खोला । जब लिंक खोला तो उसमें अजमेर शहर का नाम ही नहीं था।*
*आधार अपडेट हेतु समय मिल तो रहा था परंतु आगरा में* देखकर दिमाग का दही वड़ा हो गया कि अब मैं मेरा आधार अपडेट करवाने के लिए आगरा जाऊँ* *हद हो गई साली !!! किसी बात की*
लेकिन फिर सोचा कि आगरा तो लोग किसी और ही अवस्था में पहुंचते हैं *एक बार को तो विचार आया कि चलो आगरा हो ही आऊँ , और देख आऊँ की ऐसा क्या है आगरा में ??? की वहाँ जाने का विचार मन में आते ही दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप तक पगला कर बड़बड़ाने लगे थे । और स्वामी विवेकानन्द को विवेकामुनान...* *कह कर संबोधित करने लगे । और तो और हमारे समझदार सुलझे हुए प्रधानमंत्री तक आगरा वश उन्हें डोनाल्ड ट्रंप की जगह डोलाण्ड ट्रम्प बुलाने लगते हैं। कमबख़्त ऐसा आधार किस काम का की पागल घोषित होना पड़े*
*ऐसी निकम्मी व्यवस्था को निराधार नहीं कहूं तो और क्या कहूं ???* एक तरफ तो सरकार यह उम्मीद करती है कि यहां आम नागरिक पूरी तरह से अपने कागज मुस्तैदी से बनवा कर रखे। दूसरी तरफ इन कागजों को अपडेट करने के लिए सरकार के पास तेरह लाख लोगों पर केवल एक कर्मचारी है।
*यह व्यवस्था का तेरहवाँ नहीं है तो और क्या है ??? भाई धन्य है !!! ऐसी सरकार , धन्य है ऐसा आधार ।*
जय श्री कृष्ण
नरेश राघानी
9829070307
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