Post Views 741
February 22, 2020
#मधुकर कहिन
*कल भक्तों से घिरे भगवान को आज अकेले बैठा देखा !!!*
*देखकर अच्छा नहीं लगा ...*
✒️ *नरेश राघानी*
सुबह उठकर सैर करने गया तो पड़ौस का शिव मंदिर खाली था। *कल जिस तरह की भीड़ और हंगामा उस शिवालय के आसपास था। आज उस से कई गुना ज्यादा सन्नाटा देखा।* मन में एक सवाल आया। कि *कल देवों के देव महादेव जिस तरह से भक्तों से घिरे हुए थे। आज वह अकेले थे । ऐसा क्यों ???*
शायद इसलिए कि हम लोगों को देवी-देवताओं की ऐसी याद साल में एक बार उनके जन्मदिन पर ही आती है। *बाकी साल के 364 दिन हम उन देवी-देवताओं के आदर्श और उनकी सीख से सैकड़ों मील दूर खड़े दिखाई देते हैं।* कल जो लोग शिवालयों में जाकर जल चढ़ा रहे थे वह सब आज अपने अपने काम में लग गए हैं। *शायद साल के 365 दिनों में से 1 दिन ही हम लोगों ने चुना है कि जिस दिन हम दुनिया के हिस्से का जहर पीकर खामोश रहे। बाकी 364 दिन लोग जहर पीने की बजाय ज़हर उगलते हुए ही दिखाई देते हैं। लोगों को खुशी बांटनें की जगह उनका दिल दुखाने में लगे रहते हैं।*
उस शिवालय के बाहर फैले हुए कचरे की सफाई चल रही थी। और *एक बच्चा उस कचरे के ढेर में से बचा हुआ प्रसाद ढूंढ रहा था।* शायद अपने घर ले जाने के लिए । *शुक्र है कि हिंदुस्तान में कई देवी देवता है। जिसकी वजह से औसतन 12 महीनों में से 1 महीना तो कम से कम , गरीब लोगों को प्रसाद खाने को मिल जाता है। बाकी 364 दिन यह दुनिया दान धर्म से दूर अपने मतलब में व्यस्त रहती है। क्या यह ठीक है ?* कल उस शिवालय में सैकड़ों लीटर दूध शिवलिंग पर चढ़ाया जा रहा था । जो कि बाहर नाली में बह रहा था।और आज यह मंजर !!!
इस तरह से एक ही दिन सैकड़ों लीटर दूध नाली में बहाने से *बेहतर होता कि रोज एक लोटा दूध किसी जरूरतमंद को पिलाया जाए।* मेरे ख्याल में भगवान यह करने से ज्यादा खुश होते। क्योंकि *जब मुझ जैसे अदना और अज्ञानी इंसान को यह अच्छा नहीं लगा। तो पूरे संसार के हिस्से का जहर पीकर लोगों में खुशियां बांटने वाले महादेव को भी शायद आज उनके मंदिर के बाहर यह मंज़र देख कर अच्छा नहीं लगा होगा।*
*शायद यह सोचकर कि वह तो सबके हिस्से का विष पीते हैं और उनके भक्त होकर हम क्या कर रहे हैं ??*
*दुख के सारे पर्वत मधुकर सर पर लिए उठाए*
*विष सारे संसार का पीकर नीलकंठ कहलाये*
जय श्री कृष्ण
नरेश राघानी
9829070307
© Copyright Horizonhind 2025. All rights reserved