#मधुकर कहिन: ये आम सभा है ? या मछली बाज़ार ??
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February 11, 2020
#मधुकर कहिन 2225
पार्षद चंद्रेश सांखला को फिर निकाला नगर निगम की आमसभा से ।
पार्षद नीरज जैन ने कहा कि - उन्हें शर्म महसूस हुई आज सुबह का अखबार पढ़ कर

️नरेश राघानी
आज अजमेर नगर निगम की आमसभा का दूसरा दिन था। आम सभा को देखकर विवेक ओबेरॉय की दम फिल्म की एक लाइन याद आ गई। जिसमें हीरो विलेन से कहता है कि
मेरी जरूरतें कम है इसीलिए मेरी आवाज में दम है
यही लाइन लगभग यही लाइन आज नीरज जैन ने अपने ही स्टाइल में कही। नीरज जैन खड़े होकर बोले कि - माननीय महापौर महोदय !!! इस शहर में सैकड़ों ऐसे समारोह स्थल हैं जिन पर हुए निर्माण की ऊंचाई 60 फुट से ज्यादा है। ऐसे समारोह स्थलों पर पेनल्टी लगाने का प्रावधान है। परंतु अफसोस हमने ऐसे समारोह स्थलों से बहुत कम कर वसूली की है । वहीं हमनें शहर में व्याप्त ठेला व्यवसाइयों से ज्यादा कर वसूला है। और वह जो कह रहे है वह बिल्कुल सही है । वह इस बात को खुल कर इसलिए बोल पा रहे हैं क्योंकि उन्होनें आज तक किसी से एक रुपया भी नहीं लिया है। इसीलिए निगम में मौजूद कोई भी व्यक्ति उनके सामने आ कर सच को झुठला नहीं सकता। साथ ही लिफाफा प्रकरण का ज़िक्र करते हुए जैन ने इसकी कड़ी भर्तसना करते हुए कहा कि - मैंने आज तक किसी से कोई लिफाफा नहीं लिया है , न ही कभी लूँगा । लेकिन .... आज सुबह का अखबार जब खोलकर अपने बच्चों के सामने पढ़ा तो मैं बहुत शर्मिंदा हुआ - क्या हम पार्षद गण इतने गिर गए जो बिकते हैं ठेलों पे ???
नीरज जैन की इस बात पर व्यथित होकर कांग्रेस पार्षद श्रवण सिंह टोनी ने खुलकर विरोध किया, और कहां कि - आप फिर वही मुद्दा क्यों उठा रहे हैं ? यदि आप लिफाफे स्वीकार नहीं करते हैं । तो क्या हम करते हैं ? टोनी के विरोध करते ही फिर माहौल गड़बड़ा गया। जिसके बीच बात पुनः चंद्रेश सांखला पर आकर रुक गई । और सभापति धर्मेंद्र गहलोत ने पुनः राजस्थान नगर निगम अधिनियम 2009 की धारा 18 के तहत पार्षद चंद्रेश सांखला को सभागार से बाहर का रास्ता दिखा दिया । साथ ही गहलोत ने राजस्थान नगर निगम अधिनियम 2009 की धारा 12 का हवाला देते हुए, यह स्पष्ट किया कि - सदन में अपनी बात रखते वक्त एक सदस्य को कोई अधिकार नहीं है कि किसी की मानहानि करें, सभी सदस्य कृपा इस का पूरा ख्याल रखें l जब चंद्रेश शाखा के खिलाफ जबरदस्त विरोध शुरू हुआ तब पार्षद वालिया अपनी जगह से उठकर आए और मेयर के समक्ष सांखला के वार्ड में किए गए अवैध निर्माणों और कब्जों की तस्वीरें मेयर को दिखाने लगे। और सख्त कार्रवाई कर, उनकी संपत्ति जप्त कर के निगम की आय बढ़ाने का उपाय समझाने लगे । जिस पर मेयर ने शांतिपूर्वक सब तस्वीरें देखकर उन्हें पुनः अपने स्थान पर बैठ जाने को कहा।
कुल मिलाकर कल और आज की कार्यवाही देखकर निगम का सभागार , सभागार कम और मछली मार्केट जैसा ज्यादा दिखाई दिया । जहां पर कोई भी कुछ भी बोल रहा था और किसी की आवाज साफ सुनाई नहीं दे रही थी। समझ में नहीं आता कि पार्षद गण इस बात को महसूस क्यों नहीं करते कि वह अजमेर के लाखों लोगों द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं। और सदन में ऐसा उग्र व्यवहार उन्हें शोभा नहीं देता है। फिर सदन में मीडिया का मौजूद होना इस बात की तो गारंटी है कि उनका यह सारा व्यवहार उनके वोटरों तक जस का तस पहुंचाया जा रहा है । पार्षद अगर शांत चित्त से बैठकर अपने उग्र व्यवहार की विवेचना करेंगे तो उन्हें शायद यह खुद महसूस हो जाएगा कि उन्होनें अपने वोटर के दिमाग में खुद का क्या संदेश भेजा है ?
मात्र कुछ पार्षदों को छोड़कर जैसे जेके शर्मा , रमेश सोनी जैसे लोग ही कुछ ऐसे लोग थे , जो शांति से बैठकर सदन की कार्यवाही का अवलोकन कर रहे थे। मैं यह नहीं कहता कि सदन में चुपचाप बैठना है । परंतु यदि सदन में सभ्य व्यवहार किया जाए तो शायद ज्यादा अच्छा है। क्योंकि बात रखने का भी एक अच्छा तरीका होता है । जो कि सदन में नहीं दिखाई दिया। एक शायर की दो पंक्तियों से शायद मेरी बात और सही ढंग से आपको समझ आ जाये - वह यह कि
ऐसी वैसी बातों से खामोश रहो तो अच्छा है
या फिर ऐसी बात कहो जो खामोशी से अच्छी हो ...
जय श्री कृष्ण
नरेश राघानी
9829070307