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February 10, 2020
# *मधुकर कहिन 2223*
*बाप बड़ा न भैया , सबसे बड़े कन्हैया*
*अजमेर नगर निगम की आम सभा का यही निकला सार*
✒️नरेश राघानी
आज नगर निगम की आमसभा खासी हंगामेदार रही। *जिस हंगामे के बीच शहर के विकास के मुद्दों पर चर्चा कम ,और महापौर धर्मेंद्र गहलोत तथा भाजपा पार्षद चंद्रेश सांखला के बीच की नोकझोंक और आरोप-प्रत्यारोप पर चर्चा ज्यादा हुई।*
चंद्रेश सांखला ने खुलकर नगर निगम मेयर धर्मेंद्र गहलोत पर उनके खिलाफ षड्यंत्र रच कर मुकदमा दर्ज करवाने के आरोप लगाए । सांखला ने यह भी कहा कि - *उनके मकान के नक्शे पास कराने की फाइल से मेयर और उनके सहयोगियों ने छेड़छाड़ करवाई है। जिसके सबूत सांखला के पास मौजूद हैं।मेयर धर्मेंद्र गहलोत के ही प्रयोजन पर सांखला पर जानबूझ कर एफआईआर दर्ज करवाया गया है। और उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने का प्रयास किया गया है।*
मीडिया से मुखातिब होकर सांखला ने नगर निगम पर लगभग *50 करोड़ के घोटाले का आरोप जड़ दिया है ।* जानकारी देते हुए सांखला ने बताया कि इस आरोप को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा जांच तक करवाई गई है। और इस जांच पर जो आदेश कलेक्ट्रेट कार्यालय के माध्यम से आने हैं वह अभी आना बाकी है।
वहीं मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने भरी सदन में *राजस्थान नगर निगम अधिनियम 2009 की धारा 18 के तहत सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने और सदन को बदनाम करने के आरोपों के चलते सांखला को सदन से निलंबित कर दिया है।* हालांकि खुद भाजपा से ही चुनाव जीतकर आए हुए पार्षद हैं। और मेयर भी भाजपा से ही हैं। परंतु फिर भी *कांग्रेस पार्षदों का सदन में खुलकर चंद्रेश सांखला का विरोध करना और मेयर से सांखला को निलंबित करने की मांग करना बड़ा अजीब दिखाई दिया। राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो आम सभा में खुद अपने ही पार्षद द्वारा लगाए गए आरोप से घिरे मेयर धर्मेंद्र गहलोत की स्थिति का कांग्रेस चाहती तो बहुत आराम से लाभ उठा सकती थी । परंतु कांग्रेस से जुड़े पार्षद सभी एक जुट होकर सांखला का विरोध करने लगे।*
*कांग्रेस के पार्षदों ने आखिर सांखला का विरोध क्यों किया ???*
इसका खुलासा मीडिया को दिए गए अपने बयान में साफ सांखला ने कर दिया है। सांखला ने यह कहा कि - *पार्षदों को मेयर धर्मेंद्र गहलोत की तरफ से वार्डों में सफाई कर्मचारियों की बड़ा कर दिखाई गई गिनती के एवज अतिरिक्त धनराशि का बिल बनवाने के एवज में मेयर और उनके सहयोगियों द्वारा नगद धनराशि के लिफाफे बांटे जाते हैं। जो कि लगभग 99 प्रतिशत पार्षदों को प्राप्त होते है , चाहे वह कांग्रेस का हो या भाजपा का। यह आरोप सांखला ने अप्रत्यक्ष रूप से सभी पार्षदों पर लगाया है। इसिलए भाजपा और कांग्रेस के सभी पार्षद एक जुट होकर सांखला को निलंबित करने की माँग करने लगे थे।*
कार्यवाही के दौरान जब कांग्रेस के पार्षद सांखला और मेयर के बीच हो रहा नोंक झोंक के चलते मुस्करा रहे यह तब मेयर ने मुखर शब्दों में कहा कि - *इस तरफ बैठे लोगों को ज्यादा खुश होने की ज़रूरत नहीं है वह भली भांति समझ रहे हैं कि भाजपा के पार्षद द्वारा ऐसे आरोप लगाए जाने की वजह से आप सभी अंदर ही अंदर बहुत खुश हैं।* जिस पर सदन में हँसी के फव्वारे छूट निकले।
मेयर ने अपने स्थान पर खड़े होकर यह भी कहा कि - जिस व्यक्ति पर उसके खुद के मकान के निर्माण का नक्शा पास करवाने को लेकर मुकदमा दर्ज है वह ब्लॉग लिखकर नगर निगम को नरक निगम कहता है । और सभी सदस्यों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाता है। यह तो ऐसे ही हुआ *जैसे भैंस खुद काली है लेकिन गाय से कह रही हो कि जा तेरी पूंछ काली।* यह कहते हुए मेयर ने राजस्थान नगर निगम अधिनियम 2009 की धारा 18 द्वारा मेयर को प्रदान की गई शक्तियों का हवाला देते हुए पार्षद चंद्रेश सांखला को तुरंत सदन से बाहर निकलने के आदेश दे डाले।
*पैसा भी कितनी कुत्ती चीज है बाबू !!!* कांग्रेस ने 2 दिन तक *तूफानी तैयारी* की, ताकि आने वाली आमसभा में जनहित से जुड़े मुद्दे उठाए जा सकें। और नगर निगम की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े किए जा सके। *लेकिन आम सभा शुरू होते ही जब अपनी ही पार्टी भाजपा के पार्षद चंद्रेश सांखला ने मेयर धर्मेंद्र गहलोत पर गंभीर आरोप लगाए , तब कांग्रेस के पार्षद बजाएं मौके का फायदा उठाकर मेयर का विरोध करने के , उल्टा चंद्रेश सांखला को ही निलंबित करने की मांग को लेकर खड़े हो गए। क्योंकि चंद्रेश ने वर्षों से निगम में व्याप्त भ्रष्ट परिपाटी को खुद स्वीकार कर सारे पार्षद समुदाय की पोल खोल दी।*
*जिसको कोई भी पार्षद पचा नही पाया। सांखला ने मीडिया के समक्ष यह भी स्वीकार किया कि उन्हें खुद भी पैसे का लिफाफा देने की चेष्टा की गई । और उन्होनें शुरुआत में लिया भी है।*
*अब बताओ यार !!! कोई इतना खुलकर कह रहा है कि- भाई !!! मैं भी इस भ्रष्टाचार का हिस्सा था । और अब खम ठोक कर बोल रहा हूं कि यहां पर ऐसे पैसा चलता है। उसके बावजूद भी अगर विरोधी कांग्रेस पार्टी के पार्षद अजमेर नगर निगम को अपनी उंगलियों पर नाचने वाले कृष्ण कन्हैया - मेयर धर्मेंद्र गहलोत के समर्थन में खड़े दिखाई दें । तो इसे आखिर क्या कहेंगे ???*
बहरहाल !!! आज की आम सभा ने चाहे चंद्रेश सांखला को निकाल बाहर कर दिया हो और चंद्रेश सांखला आज अकेले खड़े दिखाई दे रहे हो। और हो सकता है सांखला को अपने इस कृत्य के लिए बहुत बड़ी कीमतें भी चुकानी पढ़ें। *परंतु फिर भी सांखला के आज के बयान ने नगर निगम की कार्यशैली और पार्षदों के चरित्र पर सवालिया निशान जरूर लगा कर आम लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है की ...*
*बाप बड़ा न भैया*
*सबसे बड़े कन्हैया*
जय श्री कृष्ण
नरेश राघानी
9829070307
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