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January 17, 2020
नमस्कार होराइजन हिन्द रहस्य में इस बार हम लेकर आए है मोस्ट हुन्तेद प्लेस भानगढ़ की कहानी
भानगढ़ किला सत्रहवीं शताब्दी में बनवाया गया था। इस किले का निर्माण मान सिंह के छोटे भाई राजा माधो सिंह ने करावाया था। राजा माधो सिंह उस समय अकबर के सेना में जनरल के पद पर तैनात थे। उस समय भानगड़ की जनसंख्या तकरीबन 10,000 थी। भानगढ़ अल्वार जिले में स्थित एक शानदार किला है जो कि बहुत ही विशाल आकार में तैयार किया गया है।
चारो तरफ से पहाड़ों से घिरे इस किले में बेहतरीन शिल्पकलाओ का प्रयोग किया गया है। इसके अलावा इस किले में भगवान शिव, हनुमान आदी के बेहतरीन और अति प्राचिन मंदिर विध्यमान है। इस किले में कुल पांच द्वार हैं और साथ साथ एक मुख्य दीवार है। इस किले में दृण और मजबूत पत्थरों का प्रयोग किया गया है जो अति प्राचिन काल से अपने यथा स्थिती में पड़े हुये हैं।
फिलहाल इस किले की देख रेख भारत सरकार द्वारा की जाती है। किले के चारों तरफ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम मौजूद रहती हैं। पुरातत्व विभाग द्वारा सूर्यास्त के बाद इस क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति के रूकने की मनाही है।
भानगढ़, नाम सुनते ही दिल में दहशत की घंटियां बजने लगती हैं। आखिर भानगढ़ का रहस्य क्या है? क्या यहां वाकई भूतों का बसेरा है या फिर सिर्फ सुनी सुनाई बातें? क्या वाकई रात में यहां आने वाला वापस नहीं जाता? भानगढ़ राजस्थान के अलवर जिले में है, बड़ी तादाद में लोग यहां घूमने के लिए आते हैं लेकिन रात होने से पहले ही वापस चले जाते हैं। आस पास के लोग कहते हैं कि रात के वक्त यहां पर पायल की आवाजें सुनाई देती हैं और घुंघरुओं की गूंज भी। इस किले का निर्माण 15वीं या 16वीं शताब्दी में हुआ। ये किला भूतिया कैसे बना इस बारे में कई कहानियां सुनाई जाती हैं।
इस किले का निर्माण आमेर के राजा भगवानदास ने कराया था। भानगढ़ राजा मानसिंह के भाई माधोसिंह की राजधानी रहा। मानसिंह को अकबर का बहुत करीबी माना जाता था। भानगढ़ से पांच किलोमीटर दूर है सोमसागर तालाब, जिसके किनारे से एक पत्थर मिला था। इस पत्थर से पता चला कि माधो सिंह अकबर के दरबार में दीवान थे। सोमेश्वर मंदिर और गोपीनाथ मंदिर की कुछ नक्काशियां अच्छी हैं। मान्यताओं के अनुसार एक दुष्ट जादूगर ने श्राप दिया था जिसके कारण यहां सब खत्म हो गया।
ऐसा कहा जाता है कि भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती बहुत सुंदर थी और इसी सुंदरता पर एक तांत्रिक भी फिदा था। जिस दूकान से राजकुमारी के लिए इत्र जाता था, वह उस दूकान में गया और उस बोतल पर जादू कर दिया जो राजकुमारी के लिए भेजी जाने वाली थी। राजकुमारी को बोतल मिली तो सही लेकिन एक पत्थर पर गिरकर टूट गई। जादूगर ने ऐसा जादू किया था कि इत्र लगाने वाला उसे (जादूगर को) प्यार करने लगे। अब इत्र पत्थर को लगा था तो पत्थर ही जादूगर से प्यार में उसकी ओर चल पड़ा। पत्थर ने जादूगर को कुचल दिया लेकिन मरने से पहले उसने भानगढ़ की बर्बादी का श्राप दे दिया। कुछ वक्त के बाद एक युद्ध हुआ जिसमें भानगढ़ तबाह हो गया और यहां रहने वाले सभी लोग मारे गए।
एक और कहानी के मुताबिक यहां एक साधु रहते थे और महल के निर्माण के वक्त उन्होंने चेतावनी दी थी कि महल की ऊंचाई कम रखी जाए ताकि परछाई उनके पास तक ना आए। लेकिन बनाने वाले ने इस बात का ध्यान नहीं रखा और अपनी मर्जी से महल को बनाया। साधु ने गुस्से में श्राप दिया जिससे भानगढ़ तबाह हो गया। एक तीसरी कहानी के मुताबिक 1720 में भानगढ़ इसलिए उजड़ने लगा था क्योंकि यहां पानी की कमी थी। 1783 में एक अकाल पड़ा जिसने यहां रिहाइश को खत्म कर दिया और भानगढ़ पूरी तरह से उजड़ गया।
क्या सचमुच भूतिया है भानगढ़?
ये वो सवाल है जिसका कोई जवाब किसी के पास नहीं है। मानने वाले मानते हैं और जो नहीं मानते वो इसे कल्पना करार देते हैं। किवदंतियों पर भरोसा करें तो महल श्रापित है और आत्माओं का यहां वास है लेकिन जो नहीं मानते वो इसे वहम कहते हैं। सच चाहे जो हो लेकिन भानगढ़ को गूगल पर काफी सर्च किया जाता है और बड़ी तादाद में लोग यहां आते हैं।
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