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#मधुकर कहिन: क्यों न दिव्यांग और विशेष बच्चों को मुख्यधारा में जोड़कर पाला जाए??

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January 10, 2020

#मधुकर कहिन 
क्यों न दिव्यांग और विशेष बच्चों को मुख्यधारा में जोड़कर पाला जाए ?
फ्लाइंग बर्ड्स संस्था के वार्षिक आयोजन में बच्चों का प्रदर्शन देखकर मन में आया विचार 

✒️नरेश राघानी

 आज फ्लाइंग बर्ड्स परिवार की के निमंत्रण पर उनका वार्षिक उत्सव देखने का मौका मिला। इस संस्था की संस्थापिका अंबिका हेड़ा ने मुझे कुछ रोज पहले फोन पर कहा - भैया !!! आपको इस साल के वार्षिक उत्सव में जरूर आना है । क्योंकि इस साल के वार्षिकोत्सव में कुछ ऐसा खास है !! जो आपको बहुत पसंद आएगा।

 आज जब सुबह मैं उस आयोजन में पहुंचा। तब मुझे समझ आया की अंबिका हेड़ा दरअसल क्या कहना चाहती थी ??? आयोजन में फ्लाइंग बर्ड  संस्थान ने शहर भर से बड़ी मेहनत करके दिव्यांग और विशेष बच्चों को एकत्रित किया था। वहां उन बच्चों को ट्रेनिंग देने वाले अध्यापक गन भी मौजूद थे। और उनके माता पिता भी उपस्थित थे ।

 आयोजन में जिस तरह की रंगारंग प्रस्तुतियां बच्चों ने दी वह देखकर मन में एक विचार आया । जो मैंने कार्यक्रम के बाद  अंबिका हेडा के साथ साझा भी किया । वही विचार आज मैं इस ब्लॉग के माध्यम से आपके साथ भी शेयर कर रहा हूँ।

वहाँ बैठा हुआ मैं यह सोच रहा था कि -
 ऊपर वाला भी अजीब जादूगर है यार !!! इतने सुंदर बच्चे ? इतनी प्रतिभावान बच्चे , लोगों का दिल मोह लेने वाले बच्चे ...

लेकिन मानसिक दिव्यांग। इन बच्चों की यहां नाचते गाते देख कर लग ही नहीं रहा की यह बच्चे बाकी आम दुनिया से कहीं पीछे हैं ... या पीछे रह जाएंगे !!! ईश्वर की भी अजब योजना है ...  जब यह बच्चे इतना कुछ कर सकते हैं। इतना अच्छा नाच सकते हैं। इतना अच्छा गा सकते हैं और इतना अच्छा कलाओं का प्रदर्शन कर सकते हैं ?  तो फिर इन बच्चों के लिए यह अलग स्कूल्स क्यों बनाई जाती हैं ?  क्या इन बच्चों को हक नहीं है की मुख्यधारा में जुड़कर सामान्य स्कूलों में बाकी बच्चों के साथ पलकर बड़े हो ??? 

 मैं तो कहता हूं कि सरकारों को इस बात पर विचार करना चाहिए । ऐसे विशेष बच्चों को अगर मुख्यधारा से हटाकर बस उनके ही माहौल में रखा जाएगा तो वह इस माहौल को पार कर के जब दुनिया में आएंगे तो कैसे दुनियाँ उनको स्वीकार करेगी ? क्या उन्हें व्यावहारिक तकलीफ नहीं झेलनी पड़ेगी ? उनका आत्मविश्वास कैसे बढ़ेगा ? यदि उनको शुरुआत से ही मुख्यधारा से अलग हटाकर पाला जा रहा है तो । 

क्यों नहीं सरकारें सभी सामान्य स्कूलों को यह निर्देश पारित करती कि - चाहे कितनी भी बड़ी स्कूल क्यों ना हो, उस स्कूल में चार कक्षाएं आयु अनुसार ऐसी बना दी जाएं जो इस तरह के बच्चों को पढ़ाएं। और इनके भीतर की प्रतिभा को निखारने का काम करें। इससे यह बच्चे बाकी सामान्य बच्चों के बीच उनके साथ जब पलकर बड़े होंगे ? तो उनमें असुरक्षा की भावना बिल्कुल नहीं होगी और ज्यादा आत्मविश्वास भी होगा। और बाकी सामान्य बच्चों में सामाजिक रूप से ऐसे लोगों को स्वीकार करने की करुणा का भाव उत्पन्न होगा।

 यदि हर स्कूल में इस तरह की 4 कक्षाएं शुरू हो जाती है तो इसमें कोई खास बड़ी मेहनत इन स्कूलों को करनी नहीं पड़ेगी। इसका खर्च सरकार देगी। 4 कक्षाएं बनानी है। इन बच्चों का अलग सिलेबस डिजाइन करना है। 4 अध्यापक रखने हैं। 

 फिर ऐसे कई परिवार भी है। जिनके यहां ऐसे बच्चे हैं। और उन्हें यही चिंता सुबह शाम दिन रात सताती है , कि आगे आखिर इन बच्चों का क्या होगा ? जब यह बच्चे बाकी सामान्य बच्चों के साथ रोज स्कूल जाएंगे। इनके भी कुछ सामान्य लोग दोस्त बनेंगे और कहीं ना कहीं इस कदम का असर हमारे समाज पर भी पड़ेगा। हमारे समाज में इस तरह के विशेष लोगों को दया की दृष्टि से नहीं स्वीकार करने के नजरिए से देखा जाएगा । 

 इस ब्लॉग के माध्यम से फ्लाइंगबर्ड्स परिवार से निवेदन करता हूं कि आप इस तरह की मांग सरकार के सामने रखकर एक अच्छी पहल को अंजाम दे। हो सकता है आज का कार्यक्रम ईश्वर ने इसी लिए आयोजित करवाया हो कि हमारे मन में यह विचार आए मैं फ्लाइंगबर्ड्स परिवार को !!!  

फ्लाइंग बर्ड्स परिवार को उनके ऐसे पुनीत आयोजन पर हृदय से बधाई देता हूं।  ईश्वर करे आप लोग ऐसे ही समाज की तहे दिल से सेवा करते रहे।  ईश्वर आप सभी लोगों को ऐसे ही शुभ कार्य करते रहने की शक्ति प्रदान करे और आपको इस जीवन से वह सब कुछ मिले जो आपने कभी चाहा है।

जय श्री कृष्ण

नरेश राघानी
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